जानिए, फसलों में मैक्समायको के फायदे

Advantages of Maxxmyco product in crops

👉🏻किसान भाइयों, ग्रामोफोन विशेष मैक्समायको उत्पाद को ह्यूमिक एसिड, अमीनो एसिड, सीवीड एक्सट्रेट एवं मायकोराइज़ा आदि को मिलाकर तैयार किया गया है।

👉🏻यह उत्पाद उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक अवयवों से बना है, यह मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को बढ़ाने में सहायक है, साथ ही मिट्टी के पीएच को बेहतर बनाने में मदद करता है। 

👉🏻इसमें ह्यूमिक एसिड मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करके मिट्टी की जल धारण क्षमता में वृद्धि करता और सफेद जड़ के विकास को बढ़ाता है।

👉🏻समुद्री शैवाल पौधों को पोषक तत्व ग्रहण करने में मदद करता है और अमीनो एसिड प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को बढ़ाता है जिससे पौधे का बेहतर वनस्पति विकास होता है।

👉🏻माइकोराइजा पौधों को मजबूती प्रदान करता हैं साथ ही प्रतिरक्षा शक्ति में वृद्धि करता हैं परिणाम स्वरूप उत्पाद की गुणवत्ता में वृद्धि होती हैं। 

👉🏻माइकोराइजा जड़ क्षेत्र को बढ़ाता हैं इसके कारण जड़ो में जल अवशोषण की क्षमता बढ़ जाती है। यह सफेद जड़ के विकास में भी मदद करता है।

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आइये जानते हैं कपास फर्टी किट के बारे में

👉🏻किसान भाइयों, कपास फसल की अच्छी पैदावार एवं उत्पादन को बढ़ाने के लिए ग्रामोफोन लेकर आया है कपास फर्टी किट।

👉🏻यह किट कपास की फसल को प्रारम्भिक वृद्धि अवस्था में सभी प्रकार के आवश्यक पोषक तत्वों को उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 

👉🏻ग्रामोफोन की कपास पोषण किट मिट्टी उपचार एवं ड्रिप उपचार दोनों के लिए ही उपयोगी है। 

👉🏻मिट्टी उपचार के लिए इस किट का कुल वजन 7.25 किलो है जो एक एकड़ के लिए पर्याप्त है l इसके अंतर्गत निम्न उत्पादों जैसे केलबोर, मैक्समायको, मैक्सरुट आदि को सम्मिलित किया गया है। 

👉🏻ड्रिप के लिए इस किट का कुल वजन 1.1 किलो है जो एक एकड़ के लिए पर्याप्त है l इसके अंतर्गत निम्न उत्पादों जैसे एक्सपोलरर ग्लोरी, एग्रोमिन गोल्ड, मैक्सरुट, वीगरमैक्स जेल आदि उत्पाद उपलब्ध है। 

👉🏻कपास पोषण किट का उपयोग, फसल के अंकुरण के पश्चात दूसरी वृद्धि अवस्था तक किया जा सकता है। 

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मिर्च की नर्सरी तैयार करते समय रखी जाने वाली सावधानियां

👉🏻किसान भाइयों, मिर्च की नर्सरी तैयार करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि जिस जगह पर नर्सरी लगाई जा रही है, वह पूरी तरह से साफ होनी चाहिए और जल भराव की समस्या नहीं होनी चाहिए।

👉🏻अच्छी फसल उगाने के लिए पौधे का स्वस्थ होना जरूरी होता है। इसलिए पौधशाला की मिट्टी में पर्याप्त मात्रा में जैविक पदार्थ होने चाहिए।  

👉🏻पौधशाला में नमी अधिक होने पर पद गलन रोग की आशंका बनी रहती है।

👉🏻पहले नर्सरी की मिट्टी और बीजों का उपचार करें, उसके बाद ही बुवाई करें।  

👉🏻हर सप्ताह खरपतवार और अवांछनीय पौधों को हटाये।

👉🏻आवश्यकतानुसार नर्सरी की सिंचाई करें।

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गेहूँ भाव में जबरदस्त तेजी, देखें 20 मई को देश के प्रमुख मंडियों के भाव

wheat mandi rates

गेहूँ भाव में कितनी तेजी या मंदी देखने को मिल रही है? वीडियो के माध्यम से देखें अलग अलग मंडियों में क्या चल रहा है गेहूँ का भाव !

स्रोत: बाजार इन्फो इंडिया

अब ग्रामोफ़ोन के ग्राम व्यापार से घर बैठे, सही रेट पर करें अपनी  फसलों की बिक्री। भरोसेमंद खरीददारों से खुद भी जुड़ें और अपने किसान मित्रों को भी जोड़ें। जानकारी पसंद आये तो लाइक और शेयर जरूर करें।

 

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ग्रीष्मकालीन सब्जियों की खेती के लिए आवश्यक सुझाव

👉🏻किसान भाइयों, ग्रीष्मकाल में जिस प्रकार तापमान में बढ़ोतरी होती है, इस कारण सब्जी वर्गीय फसलों को बहुत नुकसान पहुँचता है। 

👉🏻गर्मियों में सब्जियां उगाने के लिए पहले से तैयार किये गये पौधों का उपयोग करना चाहिये। 

सब्जी वर्गीय फसलों को गर्मियों में नेट या पॉली हाउस में लगाने से फसलों में होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। 

👉🏻सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था होनी चहिये, ताकि तापमान बढ़ने के बाद भी फसल में पानी की कमी के कारण तनाव की स्थिति ना हो। 

👉🏻फसल में फूल व फल वृद्धि के लिए समय समय पर उपाय करते रहना चाहिए l 

👉🏻गर्मियों में कद्दू वर्गीय फसलें, मिर्च, टमाटर, बैंगन,आदि सब्जियों की बुवाई कर सकते है।

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पशुओं को लू से बचाने के उपाय

👉🏻किसान भाइयों, पशुओं को लू से बचाने के ये कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए, जैसे –

👉🏻पशु आवास में स्वस्थ वायु आने व दूषित वायु बाहर निकलने के लिए रोशनदान होना चाहिए।

👉🏻गर्म दिनों में पशुओं को दिन में नहलाना चाहिए। विशेष तौर पर भैसों को ठन्डे पानी से नहलाना चाहिए।

👉🏻पशुओं को ठंडा पानी पर्याप्त मात्रा में पिलाना चाहिए।

👉🏻संकर नस्ल के पशु जिनको अधिक गर्मी सहन नहीं होती है उनके आवास में पंखे या कूलर लगाना चाहिए। 

👉🏻गर्मी में पशुओं को हरे चारे की अधिक मात्रा उपलब्ध करानी चाहिए, इसके दो फायदे हैं, एक तो पशु चाव से हरा चारा खाकर अपनी उदरपूर्ति करता है, दूसरा हरे चारे में 70 से 90 प्रतिशत पानी की मात्रा होती है, जो पशु में पानी की कमी को पूरा करती है। 

👉🏻गर्मी के मौसम में पशुओं को भूख कम व प्यास अधिक लगती है। पशुपालकों को पशुओं को इस समय दिन में कम से कम तीन बार पानी जरूर पिलाना चाहिए, इससे पशुओं के शरीर के तापक्रम को कम करने में मदद मिलती है।

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सब्सिडी पर मिलेंगे कृषि उपकरण, इस योजना से मिलेगा लाभ

e-Krishi Yantra Anudan Schem

भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि पर बहुत ज्यादा निर्भर करती है। इसीलिए सरकार कृषि उत्पादन की बढ़ाने के लिए कई कदम उठाती रहती है। इन्हीं क़दमों में से एक है मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के किसानों के लिए शुरू की गई ‘ई-कृषि यंत्र अनुदान योजना’

इस योजना के माध्यम से किसानों को कई प्रकार के कृषि यंत्रों पर सब्सिडी यानी की अनुदान दी जाती है। इसके लिए जारी सूची में नाम आ जाने पर किसान सब्सिडी पर कृषि यंत्र खरीद सकते हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को नई तकनीकी उपकरण से परिचित करवाना है ताकि इसके उपयोग से वे अपनी कृषि उपज बढ़ा सके।

इन योजना के अंतर्गत सरकार समय समय पर किसानों से आवेदन आमंत्रित करती रहती है और इसके माध्यम से किसान लाभ प्राप्त करते रहते हैं। किसान इस योजना में आवेदन करने के लिए ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल (https://dbt.mpdage.org/index.htm) पर आवेदन की नई तिथि देखते रहें और नई तिथि आने पर तुरंत आवेदन कर दें। ग़ौरतलब है की जून महीने में भी कई किसानों ने इस योजना का लाभ उठाया है।

कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल: https://dbt.mpdage.org/index.htm

स्रोत: पत्रिका

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आइए जानते हैं, खेतों में सफेद ग्रब के प्रकोप का कारण

👉🏻किसान भाइयों खरीफ के मौसम में फसल व खेतों में सफेद लट का प्रकोप होता है l सफेद लट को गोजा लट के नाम से भी जाना जाता है। 

👉🏻इसके प्रकोप का कारण गर्मियों के समय खाली खेत में उपयोग किये जाने वाला कच्चा गोबर है।  

👉🏻जिस गोबर का उपयोग किया जाता है, वह पूरी तरह पकी हुई नहीं होती है।  

👉🏻इस गोबर में बहुत से हानिकारक कीट व कवक पाए जाते हैं, जो की सफेद लट के आक्रमण का कारण होता है। 

👉🏻इस तरह के गोबर के ढेर पर सफेद लट अंडे देती है व जब गोबर को खेत में डाला जाता है तो, सफेद लट मिट्टी में जाकर फसलों को नुकसान पहुंचाने लगती है। 

👉🏻इस कीट के नुकसान से बचाव के लिए गोबर को पूरी तरह सड़ाकर ही उपयोग करें या गोबर की खाद को खाली खेत में भुरकाव के बाद डिकम्पोज़र का उपयोग अवश्य करें।

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छोटे आकार की मिर्च की खेती के लिए खास किस्में

👉🏻किसान भाइयों मिर्च भारत की एक महत्तवपूर्ण मसाले वाली फसल है। भारत, विश्व में मिर्च उत्पादन करने वाले देशों में प्रमुश देश हैं। आइये आज कुछ छोटे आकार की मिर्च की किस्मों के बारे में जानते हैं। 

👉🏻दिव्या शक्ति (शक्ति – 51):- इस किस्म की पहली तुड़ाई प्रत्यारोपण के 42-50 दिनों में होती है। फल का रंग गहरा हरा होता है। फल की लम्बाई 6-8 सेंटीमीटर तक होती है। यह किस्म लीफ कर्ल वायरस (पर्ण कुंचन) के प्रति 100% प्रतिरोधी है। 

👉🏻स्टार फील्ड 9211 एवं स्टार फील्ड शार्क-1:-  इस किस्म की पहली तुड़ाई रोपण के 60-65 दिनों में होती है। फलों का रंग गहरा हरा, पके फलों का रंग गहरा लाल होता है फल की लम्बाई 8-9 सेंटीमीटर होती है l यह किस्में बहुत तीखी होती हैं। इस किस्म का फल सुखाकर बेचने के लिए उपयुक्त होता है फफूंद जनित रोगो के प्रति प्रतिरोधी किस्म है। 

👉🏻नुन्हेम्स इन्दु 2070:- फल की लम्बाई  8 सेमी होती है। लम्बे यातायात एवं भण्डारण के लिए उपयुक्त ठोस फल। 

👉🏻एडवांटा AK-47:- इस किस्म की पहली फल तुड़ाई बुबाई के 60-65 दिनों में होती है फल का रंग गहरा लाल एवं गहरा हरा होता है, फल की लम्बाई 6-8 सेंटीमीटर होती है l इस किस्म में तीखापन बहुत अधिक होता है l यह किस्म लीफ कर्ल वायरस के लिए प्रतिरोधी किस्म हैl

👉🏻सिजेंटा HPH 12:- इस किस्म की पहली तुड़ाई रोपाई के 50-55 दिनों में हो जाती है। फल चिकने, हरे रंग के होते हैं, और परिपक्वता के समय आकर्षक गहरे लाल रंग में बदल जाते हैं। फलों की औसत लंबाई 7-8 सेमी होती हैl 

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मिर्च की नर्सरी ऐसे तैयार कर स्वस्थ फसल पाएं

👉🏻किसान भाइयों इस समय सामान्य रूप से मिर्च की नर्सरी तैयार की जाती है ,क्योंकि नर्सरी में पौध तैयार करने से अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं।   

👉🏻जुताई से पहले नर्सरी के लिए चयनित क्षेत्र को साफ कर लें।

👉🏻चयनित क्षेत्र अच्छी तरह से सूखा व जलभराव से मुक्त होना चाहिए और उचित धूप आनी चाहिए।

👉🏻नर्सरी में पानी एवं सिंचाई की उचित व्यवस्था होनी चाहिए ताकि सिंचाई समय से हो सके। 

👉🏻नर्सरी क्षेत्र को पालतू और जंगली जानवरों से अच्छी तरह से संरक्षित किया जाना चाहिए।

👉🏻इसके लिए कार्बनिक पदार्थ से भरपूर बालुई दोमट और दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है। 

👉🏻स्वस्थ पौध के लिए मिट्टी रोगजनक से मुक्त होनी चाहिए।

👉🏻इसके बाद बेड की तैयारी से पहले हल से 2 बार खेत की जुताई करें।  

👉🏻बीज बोने के लिए आवश्यकतानुसार उठी क्यारियां (जैसे 33 फीट × 3 फीट × 0.3 फीट) बना लें।

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