बैंगन में फल छेदक एवं तना भेदक कीट प्रकोप की ऐसे करें रोकथाम

Fruit and shoot borer pests in brinjal crop

  • किसान भाइयों बैंगन की फसल में फल छेदक एवं तना भेदक कीट एक अत्यधिक हानि पहुंचाने वाला कीट है।

  • इसकी अत्यधिक नुकसान पहुंचाने वाली अवस्था सूंडी होती है, जो शुरूआती अवस्था में बड़ी पत्तियों, कोमल टहनियों व तने को नुकसान पहुंचाता है, और बाद में कलियों एवं फलों पर गोल छेद कर के अंदर की सतह को खोखला बना देता है।

  • यह कीट बैंगन की फसल को 70 से 100% तक नुकसान पहुंचा सकता है। 

नियंत्रण के उपाय:

  • रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें। 

  • रोग ग्रस्त पौधों और फलों को उखाड़कर खेत से बाहर फेक दें। 

  • फेरोमोन ट्रैप 10 प्रति एकड़ स्थापित करें।  

  • फसल में समयानुसार कीटनाशक दवाओ का छिड़काव करें।  

  • रासायनिक नियंत्रण: इस कीट के नियंत्रण के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG [ईमानोवा] @ 100 ग्राम या क्लोरानट्रानिलीप्रोल 18.5% SC [कोराजन] @ 60 मिली या स्पिनोसेड 45% SC [ट्रेसर] @ 60 मिली या क्युँनालफॉस 25% EC [सेलक्विन] @ 600 मिली 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। 

  • जैविक नियंत्रण: बवेरिया बेसियाना [बवे कर्ब ] @ 500 ग्राम प्रति एकड़ की दर से  छिड़काव करें।

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आइये जानते हैं, क्या है कोकोपीट?

👉🏻किसान भाइयों बहुत से आवश्यक पोषक तत्व नारियल के रेशों में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं इन्ही नारियल के रेशों को कृत्रिम रूप से अन्य पोषक खनिज लवणों के साथ मिलाकर मिट्टी का निर्माण करने की प्रक्रिया को “कोकोपीट” कहते हैं।

👉🏻यह नारियल उद्योग का एक उत्पाद है और समुद्री इलाकों के लोगों को एक अतिरिक्त आय का स्रोत भी देता है। 

👉🏻नारियल के ऊपर के रेशे को सड़ाकर, उसके छिलके निकाल कर, बुरादा बनाकर इसे प्राप्त किया जाता है। 

👉🏻पीट मोस या कोकोपिट दोनों का उद्देश्य एक जैसा ही है, दोनों ही गमले की मिट्टी को हवादार बनाते हैं साथ ही उसमें नमी रोककर रखते हैं और यह बहुत हल्का भी रहता है l 

👉🏻किसान भाई इसका उपयोग मिर्च, टमाटर एवं सभी प्रकार की नर्सरी तैयार करने में भी कर सकते है।

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जीरो बजट खेती अपनाएं, कम लागत में अधिक उत्पादन पाएं

👉🏻किसान भाइयों जीरो बजट खेती एक प्रकार से प्राकृतिक खेती होती है।

👉🏻यह खेती देसी गाय के गोबर एवं गोमूत्र पर निर्भर होती है।

👉🏻इस विधि से खेती करने वाले किसान को बाजार से किसी प्रकार की खाद और कीटनाशक, रसायन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। 

👉🏻इसमें रासायनिक खाद के स्थान पर किसान गोबर से तैयार की हुई खाद बनाते हैं। 

👉🏻देसी गाय के गोबर एवं मूत्र से जीवामृत तथा घनजीवामृत बनाया जाता है।

👉🏻इनका खेत में उपयोग करने से मिट्टी में पोषक तत्वों की वृद्धि के साथ-साथ जैविक गतिविधियों का विस्तार होता है। 

👉🏻जीवामृत का महीने में एक अथवा दो बार खेत में छिड़काव किया जा सकता है। साथ ही जीवामृत का इस्तेमाल बीजों को उपचारित करने में भी किया जा सकता है।

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स्पीड कम्पोस्ट के इस्तेमाल से फसल अवशेष को खाद में बदले

👉🏻किसान दोस्तों स्पीड कम्पोस्ट एक उत्पाद है जिसका उपयोग फसल अपशिष्ट (गेहूं के डंठल/नरवाई, धान की पराली इत्यादि) से त्वरित खाद के निर्माण में किया जाता है। 

👉🏻यह 1 किलो उत्पाद 1 टन फसल अपशिष्ट को खाद में परिवर्तित कर देता है।  

👉🏻इसमें बेसिलस, एज़ोटोबैक्टर, ट्राइकोडर्मा, सेल्युलोलिटिक, एस्परजिलस, पेनिसिलियम इत्यादि जाति के सूक्ष्मजीव पाए जाते है जो त्वरित खाद निर्माण के अलावा मिट्टी में हानिकारक कवक को नष्ट करता है। अतः यह पौध संरक्षण का कार्य भी करता है।   

👉🏻सबसे पहले फसल के अवशेषों, को रोटोवेटर की सहायता से भूमि में मिला दें। 

👉🏻उसके बाद 4 किलो स्पीड कम्पोस्ट और 45 किलो यूरिया प्रति एकड़ की दर से खेत में बिखेर दें और तुरंत बाद पानी लगा दे। ताकि सूक्ष्मजीव अपना कार्य तेजी से कर सके।  

👉🏻लगभग 15-20 दिन बाद यह फसल अपशिष्ट खाद में बदल जाता है।

 

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मिर्च की दोहरे उद्देश्य वाली कुछ खास किस्में

  • एडवांटा AK-47- इस किस्म का पौधा आधा सीधा होता है एवं इस किस्म की पहली फल तुड़ाई बुबाई के 60-65 दिनों में होती है फल का रंग गहरा लाल एवं गहरा हरा होता है, फल की लम्बाई 6-8 सेंटीमीटर होती है एवं फल की मोटाई 1.1-1.2 सेंटीमीटर होती है, इस किस्म में तीखापन बहुत अधिक होता है l यह किस्म लीफ कर्ल वायरस के लिए प्रतिरोधी किस्म है। 

  • नुन्हेम्स इन्दु 2070 – इस किस्म का पौधा छाता नुमा अधिक शाखाओं वाला सेहतमंद होता है। फल की लम्बाई – मोटाई 8.0-10 x 0.8-1.0 सेमी होती है। लम्बे यातायात एवं भण्डारण के लिए उपयुक्त ठोस फल। सूखे लाल एवं ताज़ा हरे दोनों प्रयोजनों के लिए उपयुक्त लम्बे समय तक लाल रंग बरकरार रहने की मध्यम प्रतिरोधक क्षमता वाली l 

  • नुन्हेम्स मिर्च यूएस 720 – इस किस्म का पौधा सीधा एवं अच्छा होता है। इस किस्म की पहली तुड़ाई प्रत्यारोपण के 60-65 दिनों में होती है। हरी मिर्च का रंग गहरा हरा एवं पकने पर गहरा लाल होता है। फल की लम्बाई 18-20 सेंटीमीटर होती है एवं फल की मोटाई 1-2 सेंटीमीटर होती है इस किस्म में तीखापन बहुत अधिक होता है। फल अच्छा एवं वज़न में भी अधिक होता है। 

  • स्टार फील्ड 9211 एवं स्टार फील्ड शार्क-1 इन किस्मों की पत्तियां मोटी होने के साथ साथ अच्छा पौधा होता है। इस किस्म की पहली तुड़ाई रोपण के 60-65 दिनों में होती है। फलों का रंग गहरा हरा, पके फलों का रंग गहरा लाल होता है फल की लम्बाई 8-9 सेंटीमीटर होती है एवं फल की मोटाई 0.8-1.0 सेंटीमीटर होती है यह किस्में बहुत तीखी होती हैं। इस किस्म का फल सुखाकर बेचने के लिए उपयुक्त होता है फफूंदी जनित रोगो के प्रति प्रतिरोधी किस्म है।

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लंबे फल वाली मिर्च की उन्नत किस्में लगाएं, अधिक मुनाफा पाएं

  • नुन्हेम्स मिर्च यूएस 720: इस किस्म का पौधा सीधा व अच्छा होता है। इसकी पहली तुड़ाई प्रत्यारोपण के 60-65 दिनों में होती है। इसका रंग गहरा हरा व पकने पर गहरा लाल हो जाता है। फल की लम्बाई 18-20 सेंटीमीटर व मोटाई 1-2 सेंटीमीटर होती है। इस किस्म में तीखापन बहुत अधिक होता है। फल अच्छा व वज़न में भी अधिक होता है।  

  • हायवेज सोनल: इस किस्म का पौधा सीधा होता है। इसकी पहली तुड़ाई प्रत्यारोपण के 50-55 दिनों में होती है। पके फल लाल व अपरिपक्व फल का रंग पीलापन लिए हुए हरा होता है। फल की लंबाई 14.5 सेंटीमीटर व मोटाई 0.3 मिमी होती है। इस किस्म में तीखापन मध्यम होता है। यह किस्म सुखाने के लिए उपयुक्त है। यह किस्म लीफ कर्ल वायरस के लिए प्रतिरोधी है।

  • हायवेज सानिया 03: इस किस्म का पौधा सीधा होता है। इसकी पहली तुड़ाई रोपाई के 50-55 दिनों में होती है। पके फल लाल व अपरिपक्व फल का रंग पीलापन लिए हरा होता है। फल की लम्बाई 15-17 सेंटीमीटर व मोटाई 0.3 मिलीमीटर होती है। इस किस्म में तीखापन बहुत अधिक होता है। यह किस्म सुखाने के लिए उपयुक्त होती है। यह अच्छी उपज देने वाली एक हाइब्रिड किस्म है। 

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देरी से तैयार होने वाली कपास की उन्नत किस्में !

👉🏻किसान भाइयों, मध्य प्रदेश में कपास की फसल मई जून माह में सिंचित एवं असिंचित अवस्थाओं में लगाई जाती है। कपास की किस्मों की सामान्यतः फसल अवधि 140 -180 दिन के मध्य होती है। 

👉🏻आज हम इस लेख के माध्यम से आपको मध्य प्रदेश में लगाई जाने वाली कुछ अधिक अवधि (155 -180 दिन) वाली कपास की उन्नत किस्मों व उनकी महत्वपूर्ण विशेषताओं के बारे में जानेंगे। 

👉🏻नुजीवीडू गोल्डकोट:-  इसके डेंडु का आकार मध्यम और कुल वज़न 5 ग्राम होता है। इसकी फसल अवधि 155 से 160 दिन की होती है, जो भारी मिट्टी के लिए उत्तम है। 

👉🏻अंकुर स्वदेशी 5:- इसके डेंडु का आकार बड़ा, कुल वज़न 3.50-4 ग्राम और फसल अवधि 160 से 180 दिन की होती है। जो भारी मिट्टी के लिए उत्तम व प्रतिकूल स्थिति में अधिक उपज के साथ आसानी से पकने वाली किस्म है।

👉🏻कावेरी जादू:- इसके डेंडु का आकार मध्यम व कुल वज़न 6-6.5 ग्राम होता है। फसल अवधि 155 से 170 दिन की होती है। जो हल्की मध्यम मिट्टी और नज़दीकी बुवाई के लिए उत्तम है। इसमें बोलवर्म का प्रकोप कम से कम होता है ।

👉🏻मेटाहेलिक्स आतिश:- इसके डेंडु का आकार बड़ा, कुल वज़न 5.5-6.5 ग्राम  और पौधे मध्यम से लंबा व झाड़ीदार होता है। इस फसल की अवधि 160 से 170 दिन की होती है। फसल के लिए हल्की मध्यम मिट्टी के लिए उत्तम है।

किसान भाइयों यह किस्में लगाएं बंपर उत्पादन पाएं।

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कपास की बुवाई के पूर्व डीकम्पोजर अपनाएं और उत्पादन बढ़ाएं

decomposer before sowing cotton

👉🏻किसान भाइयों, डीकम्पोजर एक प्रकार का जैव उर्वरक है जो मृदा की उर्वरा शक्ति सुधारने का कार्य करता है। 

👉🏻जब खेत में से फसल की कटाई हो चुकी हो तब इसका उपयोग करना चाहिए। 

👉🏻किसान भाई पाउडर के रूप में डीकम्पोजर 4 किलो प्रति एकड़ की दर से खेत की मिट्टी या गोबर में मिलाकर भुरकाव कर सकते हैं।  

👉🏻भुरकाव के बाद खेत में थोड़ी नमी की मात्रा बनाएं रखें। छिड़काव के 10 से 15 दिनों के बाद कपास की फसल की बुवाई कर सकते हैं।

👉🏻चूंकि ये सूक्ष्म जीव पुरानी फसलों के अवशेषों को खाद में बदलने का काम करते हैं, इसलिए इनकी पाचन प्रक्रिया एनएरोबिक से एरोबिक में बदल जाती है, जो रोगकारक एवं हानिकारक जीवों को नष्ट कर देती है। 

👉🏻जैव संवर्धन और एंजाइमी कटैलिसीस की सहक्रियात्मक क्रिया के द्वारा पुराने अवशेषों को स्वस्थ, समृद्ध, पोषक-संतुलित खाद में बदल देती है।

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मिर्च की नर्सरी में आवश्यक है मिट्टी का उपचार

👉🏻किसान भाइयों, नर्सरी में मिट्टी का उपचार करके मिर्च की बुवाई करने से मिर्च की रोप बहुत अच्छी एवं रोग मुक्त होती है। 

👉🏻10 किलो सड़ी हुई खाद के साथ DAP @ 1 किलो और मैक्सरूट @ 50 ग्राम प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से नर्सरी बेड का मिट्टी उपचार करें। 

👉🏻बेड को चींटियों और दीमक से बचाने के लिए कार्बोफ्यूरान @ 15 ग्राम प्रति बेड के हिसाब से उपयोग करें इसके पश्चात बीज बुवाई करें। 

👉🏻बुवाई की प्रक्रिया पूरी करने के बाद आवश्यकतानुसार नर्सरी में सिंचाई करते रहें। 

👉🏻मिर्च की नर्सरी अवस्था में खरपतवार के निवारण के लिए आवश्यकता अनुसार निराई भी जरूर करें।

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मई माह में किये जाने वाले आवश्यक कृषि कार्य

Do these important agricultural work in the first fortnight of May

किसान भाइयों मई माह के प्रथम पखवाड़े में रबी फसल की कटाई, जायद फसल की निगरानी और जो किसान इस समय खेत खाली छोड़ देते हैं उनके लिए मिट्टी परीक्षण समेत कई अन्य सुरक्षात्मक कृषि कार्य करने का समय होता है। आज हम इस लेख के माध्यम से आपको मई माह के प्रथम पखवाड़े आवश्यक कृषि कार्यों की जानकारी देंगे। 

👉🏻टमाटर, मिर्च एवं अन्य सब्जियों की नर्सरी डालने का उचित समय 10-30 मई रहता है। नर्सरी की तैयारी के लिए अपने क्षेत्र के हिसाब से उन्नत किस्मों का चयन करें।

👉🏻खेत की गहरी जुताई कर खेत को खुला छोड़ दें, ताकि मिट्टी में उपस्थित कीट, कृमिकोष, व उनके अंडे, खरपतवार तथा फफूंदी जनित रोग फैलाने वाले रोगकारक नष्ट हो जाएँ। 

👉🏻इस महीने खेत खाली होने पर मिट्टी की जांच जरूर कराएं। मिट्टी परीक्षण से मिट्टी पीएच, विद्युत चालकता, जैविक कार्बन के साथ साथ मुख्य और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी का पता लगाया जाता है, जिसे समयानुसार सुधारा जा सकता है। 

👉🏻कपास की खेती करने के लिए गहरी जुताई कर 3-4 बार हैरो चला दें ताकि मिट्टी के भुरभुरा होने के साथ जलधारण क्षमता भी बढ़ जाये। ऐसा करने से मिट्टी में उपस्थित हानिकारक कीट, उनके अंडे, प्युपा तथा कवकों के बीजाणु भी नष्ट हो जायेंगे।

👉🏻जिन किसान भाइयों के खेत में जायद फसलें जैसे मूंग, कद्दूवर्गीय सब्जियां आदि लगी हुई है वह समय समय पर खेत में निगरानी रख आवश्यकतानुसार उचित फसल संरक्षण उपाय अपनाएँ।

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