फसलों की फूल अवस्था का सबसे जरूरी टॉनिक न्यूट्रीफुल मैक्स

Increase the speed of flower and fruit growth in crops with Nutriful Maxx
  • यह एक प्लांट सुपरफूड है जो फसल विकास को बढ़ावा देता है।

  • यह अमेरिका से आयातित बेस ऑर्गेनिक एसिड से स्वदेशी रूप से निकाला जाता है।

  • इससे फसल में पौधे स्वस्थ एवं मजबूत होते हैं।

  • इसकी मदद से फसलों में फूल निर्माण तेज होता है जिससे बेहतर फल बनते हैं।

  • इससे जड़ से अंकुर तक पोषक प्रणाली का परिवहन बढ़ता है।

  • सूखे व पाले आदि के खिलाफ यह उत्पाद पौधों की प्रतिरक्षा करती है।

  • इस उत्पाद के उपयोग की मात्रा छिड़काव के लिए 250 मिली प्रति एकड़ है।

  • कपास, धान, दलहनी फसलें एवं सभी सब्जियों वाली फसलों में आप इसका उपयोग कर सकते हैं।

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सोयाबीन में मामा गाय का प्रकोप बढ़ रहा है, जल्द करें बचाव के उपाय

Outbreak of False wireworm is increasing in soybean
  • सोयाबीन में लगने वाले “मामा गाय” कीट को अंग्रेजी में फॉल्स वायरवॉर्म के नाम से जानते हैं।

  • इस कीट के वयस्क नए अंकुर के पत्तों को, या बढ़ती हुई नोक को, या जमीन के स्तर के पास तने को ‘रिंग बार्किंग’ करके खा जाती हैं जिसकी वजह से उभरते हुए अंकुर नष्ट हो जाते हैं।

  • इसके वयस्क मिट्टी की सतह पर सक्रिय होते हैं। ये अनाज वाली फसलों की तुलना में दलहनी फसलों को अधिक नुकसान पहुंचाते हैं।

  • यह कीट सोयबीन की फलियों में नवविकसित दानों को खा जाते हैं तथा फलियों को काट कर गिरा भी देते हैं।

  • इस कीट के नियंत्रण हेतु लैमनोवा (लैम्ब्डा-साइहलोथ्रिन 04.90% CS) @ 200-250 मिली/एकड़ या ट्रेसर स्पिनोसैड 45% SC @ 75 मिली/एकड़ का छिड़काव करें।

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धान की फसल में ब्राउन प्लांट हॉपर पहुंचाएगा भारी नुकसान

Brown plant hopper will cause heavy loss in paddy crop
  • ब्राउन प्लांट हॉपर के व्यस्क स्वरूप दरअसल पत्तीयों की मुख्य शिराओं के पास अर्ध चंद्राकार अंडे देते हैं।

  • इस कीट का निम्फ और व्यस्क भूरे से सफेद रंग का होता और पौधे के तने के आधार के पास रहता है तथा वहीं से पौधे को नुकसान पहुँचता है।

  • प्लांट हॉपर द्वारा किया गया नुकसान पौधे में पीलेपन के रूप में नजर आता है।

  • अधिक जनसंख्या होने पर हॉपरबर्न के लक्षण नजर आते हैं, इस स्थिति में फसल से शत प्रतिशत हानि हो जाती हैं।

  • धान की फसल में ब्राउन प्लांट हॉपर का नियंत्रण के लिए नोवासेटा (एसिटामिप्रिड 20% SP) @ 40 ग्राम/एकड़ या फिपनोवा (फिप्रोनिल 5% SC) @ 400-600 मिली/एकड़ का उपयोग करें।

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मिर्च की फसल में ऐसे बढ़ाएं फूल व फल विकास

Increase flower and fruit growth in chilli crop like this
  • किसी भी फसल में फूल वाली अवस्था बहुत ही महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इससे हीं अच्छी उपज सुनिश्चित होती है।

  • इस अवस्था में ज्यादातर फसलों में फूल झड़ने की समस्या देखने की मिलती है। मिर्च की फसल में भी फूलों का गिरना एक आम समस्या है।

  • मिर्च के उत्पादन में फूलों की संख्या बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

  • कुछ जबरदस्त उत्पादों की मदद से मिर्च की फसल में फूलों को झड़ने से बचा कर उनकी संख्या को बढ़ाया जा सकता है जिसके परिणाम स्वरूप उपज बढ़ जाती है।

  • डबल होमोब्रासिनोलॉइड 0.04% w/w 100-120 मिली/एकड़ का स्प्रे करें।

  • न्यूट्रीफुल मैक्स @ 250 मिली/एकड़ का उपयोग करें।

  • प्रो-अमीनोमैक्स @ 250 ग्राम/एकड़ का स्प्रे करें।

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करेले में फल मक्खी के प्रकोप का ऐसे करें प्रबंधन

How to manage fruit fly outbreak in bitter gourd

फल मक्खी के मेगट (लार्वा) फलों में छेंद करने के बाद उनका रस चूसते हैं। इनसे ग्रसित फल खराब होकर गिर जाते हैं। मक्खी प्रायः कोमल फलों पर ही अण्डे देती है। मक्खी अपने अंडे देने वाले भाग से फलों में छेंद करके उन्हे हानि पहुचाती है। इन छेदों से फलों का रस निकलता हुआ दिखाई देता है। अंततः छेद ग्रसित फल सड़ने लगते हैं। मेगट फलों में छेद कर गुदा एवं मुलायम बीजों को भी खाते हैं जिसके कारण फल परिपक्व होने के पहले हीं गिर जाते हैं।

करेले में फल मक्खी का प्रबंधन

ग्रसित फलों को इकठ्ठा करके नष्ट कर दें। अंडे देने वाली मक्खी की रोकथाम करने के लिए खेत में प्रकाश प्रपंच या फेरोमोन ट्रैप लगाएं, इस प्रकाश प्रपंच में मक्खी को मारने के लिए 1% मिथाइल इंजीनाँल या सिनट्रोनेला तेल या एसीटिक अम्ल या लेक्टीक एसिड का घोल बनाकर रखें। परागण की क्रिया के तुरंत बाद तैयार होने वाले फलों को पॉलीथीन या पेपर के द्वारा लपेट देना चाहिए। इन मक्खीयों को नियंत्रित करने के लिए करेले के खेत में कतारों के बीच में मक्के के पौधों को उगाया जाना चाहिए, इन पौधों की ऊँचाई ज्यादा होने के कारण मक्खी पत्तों के नीचे अंडे देती है। गर्मी के दिनों में गहरी जुताई करके भूमि के अंदर सुप्त अवस्था में रहने वाली मक्खी को नष्ट करना चाहिए। फ्लुबेंडियामाइड 8.33% + डेल्टामेथ्रिन 5.56% w/w SC @ 100-125 मिली/एकड़ का उपयोग कर इसका नियंत्रण किया जा सकता है।

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सोयाबीन की फसल में अत्यधिक जल भराव से जड़ गलन की समस्या एवं बचाव के उपाय

Root rot problem and preventive measures due to excessive water logging in soybean crops

जलभराव की स्थिति में पानी आवश्यकता से अधिक मात्रा में खेत में मौजूद होता है। खेत में अतिरिक्त जल से निम्न हानि होती है-

सोयाबीन की फसल में अत्यधिक जल भराव के कारण, वायु संचार में बाधा एवं मृदा तापक्रम में गिरावट आती है, साथ ही लाभदायक जीवाणुओं की सक्रियता कम हो जाती है, एवं नाइट्रोजन स्थिरीकरण की क्रिया सही से नहीं हो पाती है। इस कारण पौधो की जड़ों को पूरी मात्रा में हवा, पानी, पोषक तत्व एवं खाली स्थान नहीं मिल पाता है। अधिक जल भराव के कारण हानिकारक लवण एकत्रित होते है, जिससे जड़ सड़न की समस्या देखने को मिलती है l

खेत में जलभराव को कम करने के लिए जल निकास जरूरी है। ये ऐसी फसल है जो न तो सूखा सहन कर सकती है और न ही अधिक पानी सहन कर सकती है। इसलिए जल निकासी के लिए बुवाई के समय ही नालियां तैयार कर लेना चाहिए व खेत में जलभराव होने की स्थिति में खेत से अतिरिक्त जल निकास नालियां बनाकर जल को खेत से बाहर निकाल दें।

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फूलगोभी में डाउनी मिल्ड्यू का बढ़ रहा प्रकोप, जानें नियंत्रण के उपाय

Increasing outbreak of downy mildew in cauliflower
  • इस रोग के लक्षण तने पर भूरे दबे हुए धब्बे के रूप में दिखाई देते हैं जिन पर फफूंद की सफेद मृदुरोमिल बढ़ती चली जाती है।

  • पत्तियों की निचली सतह पर बैगनी भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं और इनमें भी मृदुरोमिल फफूंद की वृद्वि होती है।

  • इस रोग के प्रभाव से फूलगोभी का शीर्ष संक्रमित होकर सड़ जाता है।

  • फूलगोभी में डाउनी मिल्ड्यू के नियंत्रण हेतु उचित जल प्रबंधन करें ताकि मिट्टी की सतह पर अतिरिक्त नमी न रहे। फसल में प्रकोप हो जाने पर करमानोवा (कार्बेन्डाजिम 12% + मैनकोजेब 63% WP) @ 300-400 ग्राम/एकड़ या नोवैक्सिल (मेटलैक्सिल-एम 8% + मैनकोजेब 64% WP) @ 1 किलोग्राम/एकड़ का उपयोग करें। इसके साथ हीं फसल चक्र अपना कर और खेत में साफ़ सफाई रख कर भी इसका नियत्रण कर सकते हैं।

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कपास की फसल में माहू कीट की पहचान एवं नियंत्रण के उपाय

Identification and control measures of aphids in cotton crops

माहू:- ये छोटे आकार के कीट होते हैं। इस कीट के शिशु एवं प्रौढ़ हरे – पीले रंग के होते हैं, जो पत्तियों की निचली सतह पर असंख्य संख्या में पाए जाते हैं, जो पत्तियों का रस चूसते हैं। इसके फलस्वरूप पत्तियाँ सिकुड़ जाती हैं और पत्तियों का रंग पीला हो जाता है। प्रकोप बढ़ने पर पत्तियाँ ऐंठी हुई मतलब कड़क हो जाती हैं और कुछ समय बाद सूखकर गिर जाती हैं। इस कारण पौधे का विकास ठीक से नहीं पाता है एवं पौधा रोग ग्रस्त दिखाई देता है।  

नियंत्रण के उपाय:- 

  • इस कीट के नियंत्रण के लिए, मार्शल (कार्बोसल्फान 25% ईसी) @ 500 मिली या नोवासेटा (एसिटामिप्रीड 20 % एससी) @ 20 ग्राम या केआरआई-मार्च (बुप्रोफेज़िन 25% एससी) @ 400 मिली + सिलिकोमैक्स @ 50 मिली, प्रति एकड़ 150 -200 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें

  • जैविक नियंत्रण के लिए, ब्रिगेड बी (बवेरिया बेसियाना 1.15% डब्ल्यूबी) @ 1 किग्रा/एकड़ 150 -200 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।

  • इसके अलावा किसान भाई कीट प्रकोप की सूचना के लिए, पीले चिपचिपे ट्रैप (येलो स्टिकी ट्रैप ) @ 8 -10, प्रति एकड़ के हिसाब से खेत में स्थापित करें। 

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बागवानी फसलों में दीमक के प्रकोप का ऐसे करें नियंत्रण

How to control the outbreak of termites in horticulture crops
  • दीमक की समस्या बागवानी वाले फसल जैसे अनार, आम, अमरुद, जामुन, निम्बू, संतरा, पपीता, आंवला आदि में काफी देखने को मिलता है।

  • यह जमीन में सुरंग बनाकर पौधों की जड़ों को खाते हैं। अधिक प्रकोप होने पर ये तने को भी खाते हैं और मिट्टी युक्त संरचना बनाते हैं।

  • गर्मियों के मौसम में मिट्टी में दीमक को नष्ट करने के लिए गहरी जुताई करें और हमेशा अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद का हीं उपयोग करें।

  • 1 किग्रा ब्यूवेरिया बेसियाना को 25 किग्रा गोबर की सड़ी खाद में मिलाकर पौधरोपण से पहले डालना चाहिए।

  • दीमक के टीले को केरोसिन से भर दें ताकि दीमक की रानी के साथ-साथ अन्य सभी कीट मर जाएँ।

  • दीमक द्वारा तनों पर बनाए गए छेद में क्लोरोपायरिफोस 50 EC @ 250 मिली प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर प्रयोग करें और पेड़ की जड़ों के पास यही दवा 50 मिली प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर डालें।

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कपास की फसल में फूल व पूड़ी झड़ने की समस्या का ऐसे करें निदान

This is how to control the problem of flowers and Square dropping in cotton crop
  • कपास की फसल में फूल व पूड़ी के झड़ने की बहुत सारी वजहें हो सकती हैं।

  • कई बार प्रकाश संश्लेषक की क्रिया में बाधा उत्पन्न होने की वजह से पूड़ी तथा फूलों के झड़ने की समस्या आती है।

  • फूल वाली अवस्था में खेत में पानी भरा रहने पर भी फूलो के झड़ने की दर को बढ़ावा मिलता है।

  • मिट्टी में पानी की अधिकता हवा के आवागमन को प्रभावित करती है जिससे फूल तथा फल दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

  • पौधे में जिंक और बोरान की कमी की वजह से भी फूल और फल झड़ जाते है।

  • फूल और फल की अवस्था में आसमान में अधिक समय तक बादलों का होना या बहुत दिनों तक धुप का न निकलना फूलों को प्रभावित करता है।

  • प्रति इकाई पौधों की अधिक संख्या भी फूल तथा फल झड़ने का एक कारण हो सकती है।

  • नाइट्रोजन के अत्यधिक उपयोग से वानस्पति विकास को बढ़ावा मिलता है जिसके परिणामस्वरूप फूल व पूड़ी झड़ते हैं, कीट या रोगों के लगने से भी फूल एवं फल समय से पहले झड़ जाते हैं। कभी-कभी पौधे में हार्मोनल असंतुलन की वजह से भी यह समस्या देखने को मिलती है।

  • फूलों को झड़ने से बचाने तथा अच्छे बॉल्स के विकास के लिए होमोब्रासिनोलॉइड 0.04% W/W 100-120 मिली/एकड़ का स्प्रे करें। समुद्री शैवाल विगरमैक्स जेल गोल्ड का 400 ग्राम/एकड़ की दर से उपयोग करें और सूक्ष्म पोषक तत्त्व न्यूट्रीफुल मैक्स 250 मिली/एकड़ का स्प्रे करें।

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