गेहूँ की कटाई के बाद खेत में ऐसे करें डीकम्पोजर का उपयोग

How to use decomposer after harvesting wheat
  • किसान भाइयों गेहूँ कटाई के बाद उसके फसल अवशेष बहुत अधिक मात्रा में खेत में रह जाते हैं।

  • इन अवशेषों के कारण लगायी जाने वाली अगली फसल में फफूंदी एवं जीवाणु जनित रोगों का प्रकोप होने की सम्भावना रहती है। 

  • फफूंदी एवं जीवाणु जनित रोगों का प्रकोप नयी फसल में ना हो इसके लिए गेहूँ की कटाई के बाद खाली खेत में या फिर नई फसल की बुवाई के बाद दोनों ही स्थिति में डीकम्पोजर का उपयोग करना बहुत आवश्यक होता है। इसके उपयोग से पूर्व गेहूँ के अवशेषों को रोटावेटर की मदद से मिट्टी में अच्छी तरह से मिलाएं।

  • इसके लिए यदि किसान तरल द्रव्य का उपयोग करना चाहते है तो 1 लीटर/एकड़ की दर से डीकंपोजर का उपयोग छिड़काव के रूप में कर सकते हैं। 

  • इसके अलावा ग्रामोफोन ऐप के बाजार सेक्शन पर उपलब्ध डीकम्पोजर ‘स्पीड कपोस्ट’ की 4 किलो मात्रा 10 किलो यूरिया एवं 50-100 किलोग्राम मिट्टी में मिलाकर खेत में प्रति एकड़ की दर से भुरकाव कर सकते हैं।

  • ध्यान रखें जब डीकम्पोजर का उपयोग किया जा रहा हो तो खेत में पर्याप्त नमी होना अनिवार्य है।

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सिंचाई यंत्रों, ड्रिप-स्प्रिंकलर पर 55% तक की सब्सिडी

Now apply drip-sprinkler for irrigation and get up to 55% subsidy

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत ड्रिप-स्प्रिंकलर, मिनी स्प्रिंकलर आदि लगाने पर उद्यानिकी विभाग की तरफ से भारी सब्सिडी का प्रावधान है। इसके अंतर्गत किसानों को 55 प्रतिशत से 45 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिल सकती है।

बता दें कि इस योजना के अंतर्गत लघु सीमांत किसानों को सब्सिडी मिलेगा। इनमें सामान्य, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति शामिल हैं जिन्हें 55 प्रतिशत की सब्सिडी मिलेगी वहीं बड़े किसानों जिनमें सामान्य, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति शामिल हैं को 45 प्रतिशत की सब्सिडी मिलेगी।

स्रोत: कृषक जगत

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सरकार देगी प्रति हेक्टेयर 29000 की सब्सिडी, ताड़ की खेती पर मिलेगा लाभ

The government will give a subsidy of 29 thousand rupees per hectare for palm cultivation

देश में खाद्य तेल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए सरकार कई सारे प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में खरीफ सीजन में दलहन व तिलहन फसलों की उपज बढ़ाने के लिए साल 2021–22 में 13.51 लाख तक के उच्च उपज वाले बीज किट वितरित किये गए। तिलहन उत्पादन वृद्धि हेतु सरकार दूसरे क्षेत्रों में भी प्रयासरत है। इसमें ताड़ के तेल यानी पाम आयल पर सरकार ज्यादा ध्यान दे रही है।

इसके लिए “राष्ट्रीय खाद्य तेल–पाम ऑयल मिशन” की शुरुआत की गई है और इसके तहत 11040 करोड़ रूपये खर्च करने का फैसला किया गया है। मिशन पाम ऑयल के लिए किसान भाइयों द्वारा ताड़ के पेड़ लगाने पर सहायता राशि को बढ़ा कर देने का फैसला किया है। इसके अंदर जहाँ पहले प्रति हेक्टेयर 12 हजार रूपये दिये जाते थे वहीं अब इसे बढाकर 29 हजार रुपये कर दिया गया है।

स्रोत: किसान समाधान

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सोयाबीन भाव में दिखी तेजी, देखें 19 फरवरी को रतलाम मंडी के भाव

Mandsaur Mandi Soybean Rate,

सोयाबीन भाव में आज कितनी तेजी या मंदी देखने को मिली? वीडियो के माध्यम से देखें की आज मंडी में कैसा चल रहा है सोयाबीन का भाव !

स्रोत: यूट्यूब

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इंदौर मंडी में 19 फरवरी को क्या रहे प्याज भाव?

Indore onion Mandi Bhaw

वीडियो के माध्यम से जानें आज यानी 19 फरवरी के दिन इंदौर के मंडी में क्या रहे प्याज के मंडी भाव?

वीडियो स्रोत: यूट्यूब

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तरबूज के पौधों में भयंकर कॉलर रॉट रोग की समस्या

Collar rot disease problem in watermelon
  • किसान भाइयों कॉलर रॉट तरबूज की फसल का एक प्रमुख और भयंकर रोग है जो खेत में अत्यधिक पानी जमा होने के कारण होता है।

  • इस रोग में तने के आधार पर गहरे भूरे हरे रंग के जल रहित धब्बों का निर्माण हो जाता है। जिसके कारण अंत में पूरा पौधा सड़ कर मर जाता है। 

  • रोग से बचाव के लिए बीजों को बुवाई से पहले करमनोवा (कार्बेन्डाजिम 12% + मैनकोज़ेब 63% डब्ल्यूपी) @ 3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज उपचार कर बुवाई करना चाहिए।  

  • कोनिका (कासुगामाइसिन 5% + कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 45 डब्ल्यूपी) @ 300 ग्राम या संचार (मैनकोज़ेब 64%+ मेटलैक्सिल 8% डब्ल्यूपी) @ 600 ग्राम प्रति एकड़ की दर से घोल बनाकर 10 दिन के अंतराल पर दो बार ड्रेंचिंग करें।

  • जैविक नियंत्रण के लिए, राइजोकेयर (ट्राईकोडर्मा विरिडी) @ 1 किलोग्राम + फसल रक्षक (स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस) @ 1 किलोग्राम का घोल 200 लीटर पानी में बनाये और एक एकड़ खेत में इस घोल से ड्रेंचिंग करें।

अपने खेत को ग्रामोफ़ोन एप के मेरे खेत विकल्प से जोड़ें और पूरे फसल चक्र में पाते रहें स्मार्ट कृषि से जुड़ी सटीक सलाह व समाधान। इस लेख को नीचे दिए गए शेयर बटन से अपने मित्रों संग साझा करें।

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मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में बारिश के आसार, देखें मौसम पूर्वानुमान

Madhya Pradesh Weather Update Madhya Pradesh Weather Update

देश के ऊपर कई मौसम प्रणालियां बनी हुई है जिनके प्रभाव से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल सहित लक्ष्यदीप पूर्वी मध्य प्रदेश विदर्भ तथा छत्तीसगढ़ कहीं-कहीं हल्की वर्षा संभव है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भारी बारिश के आसार हैं। अरुणाचल प्रदेश मैं बारिश तथा हिमपात हो सकता है।

स्रोत: स्काइमेट वेदर

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किसानों को मिलेंगे MSP के 2.37 लाख करोड़ रुपये, सीधे ट्रांसफर होंगे खाते में

Farmers will get Rs 2.37 lakh crore of MSP

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद भवन में वर्ष 2022 का बजट मंगलवार को पेश कर दिया गया। इस बजट में उनके द्वारा कृषि क्षेत्र के लिए कई घोषणाएं की गईं।

इस दौरान सीतारमण ने कहा कि “प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा, इसके अलावा, किसानों को हाईटेक बनाने के लिए PPP मॉडल शुरू होगा। किसानों के खातों में 2.37 लाख करोड़ रुपये की एमएसपी सीधे ट्रांसफर की जाएगी। कृषि-वानिकी को अपनाने के इच्छुक किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।”

उन्होंने आगे कहा की “रबी सीजन 2021-22 में गेहूं की खरीद और खरीफ सीजन 2021-22 में धान की अनुमानित खरीद से 163 लाख किसानों से 1208 लाख मीट्रिक टन गेहूँ और धान का कवर मिलेगा और 2.37 लाख करोड़ रुपये उनके एमएसपी मूल्य का सीधा भुगतान होगा।

स्रोत: दैनिक जागरण

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सोयाबीन भाव में कितनी तेजी, देखें 18 फरवरी को रतलाम मंडी के भाव

Mandsaur Mandi Soybean Rate,

सोयाबीन भाव में आज कितनी तेजी या मंदी देखने को मिली? वीडियो के माध्यम से देखें की आज मंडी में कैसा चल रहा है सोयाबीन का भाव !

स्रोत: यूट्यूब

अब ग्रामोफ़ोन के ग्राम व्यापार से घर बैठे, सही रेट पर करें अपनी  फसलों की बिक्री। भरोसेमंद खरीददारों से खुद भी जुड़ें और अपने किसान मित्रों को भी जोड़ें।

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इस योजना से मछली पालकों को मिलेगा 60% का अनुदान, पढ़ें पूरी खबर

Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana

मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत वित्त वर्ष 2020-21 में की गई है। यह योजना मछली उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने में मदद हेतु शुरू की गई है। इससे मछली पालकों की आय में भी वृद्धि होगी।

इस योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रावधान हैं। इन प्रावधानों में मछली बीज उत्पादन हैचरी निर्माण, नए मछली बीज संवर्धन हेतु पोखर-तालाब का निर्माण, नए तालाब का निर्माण, पंगेसियस मछली पालन, मिश्रित मछली पालन, तिलापिया मछली पालन की व्यवस्था शामिल हैं।

इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और महिला वर्ग से आने वाले हितग्राहियों को 60% का अनुदान दिया जाएगा। इसके साथ ही सामान्य वर्ग एवं अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाले हितग्राहियों को 40% का अनुदान दिया जाएगा।

स्रोत: कृषि जागरण

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