ड्रिप इरिगेशन को बढ़ावा देने के लिए सरकार किसानों को दे रही 4 हजार करोड़ रुपए

Government is giving 4 thousand crores rupees to farmers for promoting drip irrigation

किसान भाई आजकल सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन का इस्तेमाल खूब कर रहे हैं। केंद्र सरकार भी इसे बढ़ावा दे रही है और “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” स्कीम के अंतर्गत विभिन्न राज्य के किसानों के लिए 4 हजार करोड़ रुपए आवंटित किये हैं। इस स्कीम के पीछे का मुख्य उद्देश्य खेती में पानी के उपयोग को कम करके पैदावार बढ़ाना है।

ग़ौरतलब है की केंद्र सरकार ने सिंचाई प्रक्रिया में पानी की एक-एक बूंद का उपयोग करने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना चलाई है। इस योजना के अंतर्गत ही ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप- माइक्रो इरीगेशन’ कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप- माइक्रो इरीगेशन’ कार्यक्रम के अंतर्गत सिंचाई की आधुनिक तकनीकों पर जोर दिया रहा है। इसके साथ ही विभिन्न राज्य के किसानों को 4000 करोड़ रुपए आवंटित कर दिए हैं। इस कार्यक्रम का लक्ष्य सूक्ष्म सिंचाई तकनीक जैसे ड्रिप और स्प्रिंक्लर इरिगेशन सिस्टम द्वारा खेतों में पानी का कम उपयोग करके अधिक पैदावार लेना है।

स्रोत: कृषि जागरण

Share

कपास की फसल में छिड़काव प्रबंधन

Spray management in cotton crop
  • कपास की बुआई के 15-20 दिनों के बाद उसमे आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति की  बहुत आवश्यकता होती है।    
  • बुआई के कुछ दिनों बाद कवक जनित एवं किट जनित बीमारियों का प्रकोप होने  लगता है। इसका निवारण बहुत आवश्यक होता है।  
  • एसीफेट @ 300 ग्राम/एकड़ + मोनोक्रोटोफ़ॉस 36% SL@ 400 मिली/एकड़ + सीविड @ 400 मिली/एकड़ + क्लोरोथायोनिल @ 400 ग्राम/एकड़ का छिड़काव करें। 
  • इस छिड़काव का महत्व रस चूसने वाले कीट जैसे थ्रिप्स/एफिड एवं कवक से होने वाली बीमारियों के प्रारंभिक संक्रमण को रोकना और पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध करवाना है।
Share

मक्का समृद्धि किट में उपस्थित जैविक उत्पाद और इनके उपयोग का तरीका

Organic products and methods of use in Makka Samriddhi Kit
  • मक्का की उपज बढ़ाने में मक्का समृद्धि किट महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 
  • मक्का समृद्धि किट में पोटाश एवं फास्फोरस के जीवाणु, नाइट्रोज़न के बैक्टीरिया, ज़िंक सोलुबलाइज़िंग बैक्टीरिया, ह्यूमिक एसिड, एमिनो एसिड, समुद्री शैवाल और माइकोराइजा जैसे जैविक उत्पाद हैं।
  • इस किट का पहला उत्पाद तीन प्रकार के बैक्टीरिया ‘नाइट्रोजन फिक्सेशन बैक्टीरिया, PSB और KMB’ से बना है। यह मिट्टी और फसल में तीन प्रमुख तत्वों नाइट्रोजन, पोटाश और फास्फोरस की आपूर्ति में मदद करता है। जिसके कारण पौधे को समय पर आवश्यक तत्व मिलते हैं, विकास अच्छा होता है, फसल उत्पादन बढ़ता है और साथ ही मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता भी बढ़ती है।
  • इस किट का दूसरा उत्पाद ज़िंक सोलुबलाइज़िंग बैक्टीरिया है जो मिट्टी में मौजूद अघुलनशील ज़िंक को घुलनशील रूप में पौधों को उपलब्ध कराता है। यह पौधों के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्वों में से एक है। इसकी 100 ग्राम  की मात्रा प्रति एकड़ मिट्टी उपचार हेतु उपयोग की जाती है 
  • किट का अंतिम उत्पाद में ह्यूमिक एसिड, एमिनो एसिड, समुद्री शैवाल और माइकोराइजा तत्वों का खजाना होता है। यह 2 किलो प्रति एकड़ की दर से मिट्टी में उपयोग किया जाता है। 
  • मक्का समृद्धि किट की 4.1 किलो (जिसमें उपरोक्त सभी जैविक उत्पाद सम्मलित है) को 4 टन अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद में अंतिम जुताई के समय या बुआई से पहले एक एकड़ खेत में मिला देना चाहिए ताकि फसल को इसका पूरा लाभ मिल सके।
Share

धान की सीधी या ज़ीरो टिल से बुआई का महत्व

Importance of direct sowing of paddy or zero til
  • धान की सीधी बुआई उचित नमी पर यथासंभव खेत की कम जुताई करके अथवा बिना जोते हुए खेतों में आवश्यकतानुसार नॉनसेलेक्टिव खरपतवारनाशी का प्रयोग कर जीरो टिल मशीन से की जाती है।
  • धान की बुआई मानसून आने के पूर्व (15-20 जून) अवश्य कर लेना चाहिए, ताकि बाद में अधिक नमी या जल जमाव से पौधे प्रभावित न हो। इसके लिए सर्वप्रथम खेत में हल्का पानी देकर उचित नमी आने पर आवश्यकतानुसार हल्की जुताई या बिना जोते जीरो टिल मशीन से बुआई करनी चाहिए। 
  • धान की नर्सरी उगाने में होने वाला खर्च बच जाता है। इस विधि में जीरो टिल मशीन द्वारा 10-15 किग्रा. बीज प्रति⁄एकड़ बुआई के लिए पर्याप्त होता है।
  • इस तरह से धान की बुआई  करने के पूर्व खरपतवारनाशी का उपयोग कर लेना चाहिए
Share

राजस्थान से बढ़ा 12 किमी लंबा टिड्डी दल, यूपी और एमपी में फ़सलों को पहुँचा सकता है भारी नुकसान

After 27 years in MP, large locust attack, Threat on Moong crop of 8000 crores

पिछले कुछ हफ्ते से टिड्डी दलों का कहर भारत के कई राज्यों में देखने को मिल रहा है। ये टिड्डी दल ईरान से पाकिस्तान होते हुए राजस्थान में प्रवेश करते हैं और उसके बाद भारत के भीतरी राज्यों में फ़सलों को भारी नुकसान पहुँचाते हैं। खबर है की पाकिस्तान से 9 से भी ज्यादा नए टिड्डी दल राजस्थान के अलग-अलग जिलों में पहुँच गए हैं और वे जल्द ही मध्यप्रदेश तथा उत्तरप्रदेश के कई क्षेत्रों में नुकसान पहुंचा सकते हैं।

राजस्थान पहुँच चुके इन नए टिड्डी दलों के मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में आने की संभावनाओं को देखकर कृषि विभाग भी अलर्ट पर है। आने वाले दिनों में हवा की दिशा यह तय करेगी की यह दूसरे राज्यों में प्रवेश करता है या नहीं। अगर हवा की दिशा नहीं बदली तो 12 किलोमीटर लंबा टिड्डी दल अगले कुछ दिनों में एमपी और यूपी में प्रवेश कर जाएगा।

स्रोत: जागरण

Share

ग्रामोफ़ोन की सलाह से की खेती तो कपास किसान को हुआ 18 लाख का मुनाफ़ा

कभी कभी एक सही मशवरा भी आपकी जिंदगी में बड़ा बदलाव लेकर आ सकता है। कुछ ऐसा ही बदलाव बड़वानी जिले के राजपुर तहसील के साली गांव के किसान श्री बजरंग बरफा जी के जिंदगी में तब आया जब वे ग्रामोफ़ोन के संपर्क में आये। हालांकि ऐसा नहीं था की बजरंग को खेती में सफलता नहीं मिल रही थी। वे कपास की खेती से कभी थोड़ा बहुत लाभ तो कभी औसत कमाई कर लेते थे पर उन्हें इससे आगे बढ़ना था और इसी दौरान वे टीम ग्रामोफ़ोन के फील्ड स्टाफ से मिले और फिर उन्होंने ऐसी सफलता पाई की जिसे देख हर कोई आश्चर्यचकित हो गया।

दरअसल ग्रामोफ़ोन के संपर्क में आने के बाद उन्होंने ग्रामोफ़ोन से उन्नत किस्म के बीज मंगवाए, कृषि विशेषज्ञों की राय से कपास की खेती के हर चरण में जरूरी उर्वरक और अन्य दवाइयाँ दी। इन सब से न सिर्फ बजरंग की कृषि लागत घटी बल्कि खेती से होने वाला मुनाफ़ा भी डबल हो गया।

जहाँ पहले बजरंग की कपास की खेती की लागत 2.5 लाख तक चली जाती थी वहीं अब यह घटकर 1.78 लाख रह गई। इसके अलावा मुनाफ़ा भी 1029000 रूपये से बढ़ कर 1974500 रूपये हो गया।

ग्रामोफ़ोन से सलाह प्राप्त कर कई किसान भाई अपनी खेती में सुधार कर रहे हैं जिसका लाभ भी उन्हें मिल रहा है। अगर आप भी बजरंग की तरह ही अपनी खेती से ज्यादा मुनाफ़ा कमाना चाहते हैं तो ग्रामोफ़ोन से कृषि सलाह ज़रूर लें। ग्रामोफ़ोन से संपर्क करने के लिए आप टोल फ्री नंबर 18003157566 पर मिस्डकॉल कर सकते हैं या फिर ग्रामोफ़ोन कृषि मित्र एप पर लॉगिन कर सकते हैं।

Share

गैर दलहनी फसलों में नाइट्रोजन कल्चर का महत्व

Nitrogen culture importance in non-leguminous crops
  • सभी प्रकार के पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए मुख्यतः 17 तत्वों की आवश्यकता होती है, जिनमें नाइट्रोजन अति आवश्यक तत्व हैं।
  • गैर दलहनी फसलें जैसे गेहूँ, मक्का, कपास, सब्ज़ियाँ, धान, गन्ना आदि की अच्छे उत्पादन के लिए नाइट्रोज़न आवश्यक है।  
  • नाइट्रोजन स्थिरीकरण के लिए प्राकृतिक रूप से मिट्टी में कुछ ऐसे जीवाणु पाये जाते हैं, जो वायुमंडलीय नत्रजन को अमोनिया में बदल देते हैं। 
  • एजोटोबेक्टर, एजोस्पीरिलम, ऐसीटोबैक्टेर या सभी नाइट्रोज़न स्थिरीकरण बेक्टेरिया है इनका प्रयोग करने से 20 से 30 किग्रा० नत्रजन की बचत भी की जा सकती है।
  • इनके उपयोग से फ़सलों की 10 से 20 प्रतिशत तक पैदावार में बढ़ोत्तरी होती है तथा फलों एवं दानों का प्राकृतिक स्वाद बना रहता है।
  • इनके प्रयोग करने से अंकुरण शीघ्र और स्वस्थ होते हैं तथा जड़ों का विकास अधिक एवं शीघ्र होता है।
  • फसलें भूमि से फास्फोरस का अधिक प्रयोग कर पाती हैं जिससे किल्ले अधिक बनते हैं। ऐसे जैव उर्वरकों का प्रयोग करने से जड़ एवं तने का अधिक विकास होता है। 
  • इन जैव उर्वरकों के जीवाणु बीमारी फैलाने वाले रोगाणुओं का दमन करते हैं, जिससे फसलों का बीमारियों से बचाव होता है तथा पौधों में रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती है।
Share

इस योजना से किसानों को कृषि यंत्रों पर मिलेगी 50 से 80% की सब्सिडी, जानें पूरी जानकारी

Relief for farmers, Govt. extended the duration of short-term crop loan

भारतीय कृषि को रफ़्तार देने में काफी मददगार हो रहे हैं आधुनिक कृषि यंत्र। इनकी मदद से न केवल कृषि विकास दर को गति मिलता है बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को मज़बूती भी मिलती है। आज कृषि में जुताई, बुआई, सिंचाई, कटाई, मड़ाई एवं भंडारण आदि सभी प्रकार के कृषि कार्य आधुनिक कृषि यंत्रों से करना ही संभव है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार SMAM योजना के अंतर्गत कृषि यंत्रों पर 50 से 80% तक सब्सिडी दे रही है।

यह योजना देश के सभी राज्यों के किसानों के लिए उपलब्ध है और देश का कोई भी किसान इस योजना कि पात्रता रखने वाला इस योजना के लिए आवेदन कर सकता है। इसका आवेदन ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है।

कैसे करें आवेदन?

कृषि यंत्रों के लिए ऑनलाइन आवेदन के लिए सबसे पहले आप https://agrimachinery.nic.in/Farmer/SHGGroups/Registration पर जाएँ। इसके बाद पंजीकरण कॉर्नर पर जाएं जहाँ आपको तीन विकल्प मिलेंगे। इन विकल्पों में आपको Farmer विकल्प पर क्लिक करना है। इसके बाद आपसे जो भी विवरण मांगा जाएं उसे सावधानी से भरें। इस तरह आपके आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

स्रोत: कृषि जागरण

Share

मेटारीजियम कल्चर का कृषि में महत्व

Importance of Metarhizium Culture in Agriculture
  • मेटारीजियम एनीसोपली एक बहुत ही उपयोगी जैविक फफूंदी है। 
  • इसका उपयोग सफेद ग्रब, दीमक, ग्रासहोपर, प्लांट होपर, वुली एफिड, बग और बीटल आदि के करीब 300 कीट प्रजातियों के विरुद्ध किया जाता है।
  • इसके उपयोग के पूर्व खेत में आवश्यक नमी का होना बहुत आवश्यक है।  
  • इस फफूंदी के स्पोर पर्याप्त नमी में कीट के शरीर पर अंकुरित हो जाते हैं। 
  • यह फफूंदी परपोषी कीट के शरीर को खा जाती है। 
  • इसका उपयोग गोबर की खाद के साथ मिलाकर मिट्टी उपचार में किया जाता है। 
  • इसका उपयोग खड़ी फसल में छिड़काव के रूप भी किया जा सकता है।
Share

कपास की फसल के प्रारंभिक चरण में कीट और रोग प्रबंधन

Pest and Disease management in early stage of cotton crop
  • कपास की फसल के शुरूआती अवस्था में अनेक प्रकार के कीट एवं कवकों का प्रकोप बहुत अधिक होता है और इनके बचाव के उपाय यदि सही समय पर किये जाएँ तो इनका नियंत्रण बहुत अच्छी तरह से हो सकता है।
  • कवक जनित रोगों के प्रभावी नियंत्रण के लिए कसुगामाइसिन 5% + कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 45% WP @300 ग्राम/एकड़ या थियोफैनेट मिथाइल 70% WP@ 300 ग्राम/एकड़ या कीटाजिन @200 ग्राम/एकड़ या ट्राइकोडर्मा विरिडी @1 किलो/एकड़ (mix with FYM) का उपयोग करें।
  • कीटों के प्रभावी नियंत्रण के लिए ऐसीफेट 75% SP @300 ग्राम/एकड़ + मोनोक्रोटोफॉस @ 400 मिली/एकड़ या इमिडाक्लोरोप्रिड 17.8% SL @ 100 मिली/एकड़ या एसिटामेंप्रिड 20% SP या बेवेरिया बेसियाना 500 ग्राम/एकड़ का छिड़काव करें।
Share