- भारत में गाय की कई प्रकार की नस्लें पाई जाती हैं।
- गाय की एक नस्ल मेवाती (Mewati Cow) है, जो मेवात क्षेत्र में पाई जाती है।
- यह मेवाती गाय राजस्थान के भरतपुर जिले, पश्चिम उत्तर प्रदेश के मथुरा और हरियाणा के फ़रीदाबाद और गुरुग्राम जिलों पाई जाती है।
- मेवाती नस्ल के पशुओं की गर्दन सामान्यतः सफेद होती है।
- इनका चेहरा लंबा व पतला होता है, आंखे उभरी हुई और काले रंग की होती हैं।
- इनके ऊपरी होंठ मोटे व लटके हुए होते हैं। इनके नाक का ऊपरी भाग सिकुड़ा हुआ प्रतीत होता है।
मध्यप्रदेश में 500 करोड़ की लागत से खुलेंगे 10500 फूड प्रोसेसिंग प्लांट
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘आत्म निर्भर मध्य प्रदेश’ के अंतर्गत राज्य में 500 करोड़ रुपये की लागत से फूड प्रोसेसिंग प्लांट्स लगाए जाने की बात कही है। इस बाबत राज्य सरकार की तरफ से अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं।
राज्य मंत्री कुशवाह ने इस विषय पर कहा है कि “अगले 4 सालों में राज्य में 10 हजार 500 नए फूड प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जाएंगे जिसे हाल में मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। इन प्लांट्स को लगाने के लिए 500 करोड़ रुपये की राशि अनुमोदित की गई है।”
स्रोत: कृषि जागरण
Share22 जनवरी से मौसम में होगा बदलाव, जानें अपने क्षेत्र का मौसम पूर्वानुमान
आने वाले दिनों में मध्य भारत का मौसम जहाँ स्थिर रहेगा वहीं उत्तर भारत के पर्वतीय राज्यों के पास एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ जल्द दस्तक देगा। इसके प्रभाव से 23 जनवरी से 25 जनवरी के बीच जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश लद्दाख उत्तराखंड में कई जगहों पर बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। पंजाब, हरियाणा में भी कुछ स्थानों पर हो सकती है वर्षा और ओलावृष्टि। इस बीच अगले 48 घंटों के दौरान पूर्वोत्तर राज्यों और तमिलनाडु में हल्की से मध्यम वर्षा जारी रहेगी।
वीडियो स्रोत: स्काईमेट वेदर
Shareसोलर जल पंप से होगा किसानों को लाभ, कृषि लागत में आएगी कमी
- डीजल तथा बिजली की बढ़ती कीमतों के कारण किसानों को इन माध्यमों से जल पम्प के इस्तेमाल में खर्च बहुत ज्यादा हो जाता है। इसीलिए किसान इनके विकल्प के रूप में सौर ऊर्जा संचालित पंप का उपयोग कर सकते हैं।
- सौर जल पंप प्रणाली में बिजली या तो एक या फिर कई फोटो वोल्टेइक (पीवी) पैनलों के माध्यम से मिलती है।
- सौर ऊर्जा से चलने वाली इस पंपिंग प्रणाली में एक सौर पैनल होता है। यह सौर पैनल एक इलेक्ट्रिक मोटर को ऊर्जा प्रदान करती है। यही मोटर पंप को शक्ति देता है।
- इन पंपों के रखरखाव की लागत भी काफी कम होती है और इसका इस्तेमाल भी लंबे समय तक किया जा सकता है।
50% सरकारी सब्सिडी पर करें मछली आहार का बिजनेस, होगा बंपर मुनाफा
मध्य प्रदेश सरकार मछली आहार का बिजनेस करने के इच्छुक लोगों को 50% की सब्सिडी दे रही है। इस योजना का लाभ मध्य प्रदेश के सभी जिले के हर वर्ग के किसान उठा सकते हैं।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए भूमि संबंधित आवश्यक दस्तावेजों जैसे खसरा तथा नक्शा देना होता है। गौरतलब है कि मछली आहार उत्पादन यूनिट लगाने में तक़रीबन 10 लाख रूपये का खर्च होता और इस योजना के तहत इस खर्च का 50% हिस्सा सब्सिडी के रूप में राज्य सरकार देती है।
स्रोत: कृषि जागरण
Shareअगले कुछ दिनों तक मध्य भारत के राज्यों में मौसम सामान्य बना रहेगा
मध्य भारत के राज्यों में अगले कुछ दिन मौसम सामान्य बना रहेगा। पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में विशेषकर असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा के आसार हैं। तमिलनाडु में भी कुछ स्थानों पर होगी बारिश। जबकि उत्तर भारत के मैदानी राज्यों और गंगा के मैदानी क्षेत्रों में बढ़ेगी और सर्दी।
वीडियो स्रोत: स्काईमेट वेदर
Share20 जनवरी तक मध्यप्रदेश में फिर से गिरेगा पारा और बढ़ेगी ठंड
कल यानी 19 जनवरी से पुनः एक बार पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पूर्वी राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश के न्यूनतम तापमान में गिरावट की संभावना। 2 दिनों बाद यानी 20 जनवरी से पूर्वी मध्य प्रदेश तथा आसपास के क्षेत्रों में तापमान में गिरावट होगी।
वीडियो स्रोत: स्काईमेट वेदर
Shareगेहूँ की फसल में नुकसान पहुंचाने वाले कीट जड़ माहू का नियंत्रण
- वर्तमान समय में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण गेहूँ की फसल में जड़ माहू कीट का काफी प्रकोप हो रहा है।
- जड़ माहू कीट कीट हल्के पीले रंग से गहरे पीले रंग का होता है। गेहूँ के पौधों को जड़ से उखाड़ कर देखने पर यह कीट जड़ों के ऊपर तने वाले भाग में आसानी से दिखाई देता है।
- यह कीट गेहूँ के पौधों की जड़ों के ऊपर तने वाले भाग से रस चूसता है, जिसके कारण पौधा पीला पड़ने लगता है और धीरे-धीरे सूखने लगता है। शुरुआत में इसके प्रकोप के कारण खेतों में जगह-जगह पीले पड़े हुए पौधें दिखाई देते हैं।
- अभी कुछ जगहों पर गेहूँ की बुआई चल रही है या होने वाली है इस समय गेहूँ की बुआई के पहले खेत के मिट्टी का उपचार करना बहुत आवश्यक है। अतः थियामेंथोक्साम 25% WG@ 200-250 ग्राम/एकड़ की दर से मिट्टी उपचार करें। साथ ही जैविक उपचार के रूप में बवेरिया बेसियाना @ 500 ग्राम/एकड़ की दर से उपयोग करें।
- गेहूँ के बीजों का बीज़ उपचार करके ही बुआई करें। इसके लिए इमिडाक्लोप्रिड 48% FS @ 1.0 मिली/किलो बीज़ या थियामेंथोक्साम 30% FS @ 4 मिली/किलो बीज़ को बीज़ उपचार रूप उपयोग करें।
- जिन जगहों पर गेहूँ की बुआई हो चुकी है एवं जड़ माहू का बहुत अधिक प्रकोप दिखाई दे रहा है वैसे जगहों पर इसके नियंत्रण के लिए थियामेंथोक्साम 25% WG@ 100 ग्राम/एकड़ या इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL @ 100 ग्राम/एकड़ की दर से उपयोग करें। साथ ही जैविक उपचार के रूप में बवेरिया बेसियाना @ 250 ग्राम/एकड़ की दर से उपयोग करें।
- इस प्रकार समय समय पर नियंत्रण के उपाय करके जड़ माहू का नियंत्रण किया जा सकता है।
मध्य प्रदेश में किसानों को खेत की मेढ़ों पर पेड़ लगाने के लिए मिलेगी सरकारी सब्सिडी
मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से राष्ट्रीय विकास योजना के तहत एग्रोफारेस्ट्री प्लांटेशन हेतु किसानों को सब्सिडी दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत किसानों को खेतों या खेतों को मेढ़ों पर पेड़ लगाने के लिए 50% सब्सिडी दी जाती है।
इस योजना का उद्देश्य इमारती लकड़ियों की भारी मांग की पूर्ती के साथ साथ फल, पशुचारे, खाद्यान्न तथा ईंधन आदि की पूर्ति करना भी है। इस योजना के अंतर्गत पौधा लगाने में आये खर्च का 50% हिस्सा किसान को उठाना होता है और बाकी 50% हिस्सा राज्य सरकार सब्सिडी के रूप में देती है। बता दें की इसके अंतर्गत एक किसान को ज्यादा से ज्यादा 50 हजार रूपए की सब्सिडी मिल सकती है।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए मध्य प्रदेश के किसान अपने जिले के वानिकी विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
स्रोत: कृषि जागरण
Shareलाइट ट्रैप में फंस कर मर जाएंगे कीट और फसल रहेगी सुरक्षित
- लाइट ट्रैप प्रकाश से चलने वाला एक यंत्र होता है।
- इसमें एक बल्ब लगा होता है और बल्ब को जलने के लिए बिजली या बैटरी की जरूरत पड़ती है।
- बाज़ार में सौर्य ऊर्जा से चार्ज होने वाला लाइट ट्रैप भी उपलब्ध है।
- जब इस लाइट ट्रैप को जलाया जाता है तो कीट प्रकाश से आकर्षित होकर ट्रैप के पास आ जाते हैं।
- ट्रैप के पास आकर बल्ब से टकराकर बल्ब के नीचे लगी कीप में कीट गिर जाते हैं।
- इन कीटों को आसानी से नष्ट किया जा सकता है या कुछ दिनों बार ये खुद मर जाते हैं।
