अरब सागर में उठे समुद्री तूफ़ान ताऊ ते से किन राज्यों में होगी बारिश, जानें मौसम पूर्वानुमान

storm in Arabian Sea Tauktae

अरब सागर में एक समुद्री तूफ़ान आने वाला है जिसका नाम है ‘ताऊ ते’ और इस तूफ़ान की वजह से आने वाले कुछ दिनों में पश्चिमी राज्यों में भारी बारिश की संभावना बन रही है। केरल, कर्णाटक सहित लक्ष्यदीप में इसका काफी असर देखने की मिलेगा। 15 और 16 मई से महाराष्ट्र के तटों पर भी बारिश हो सकती है। मुंबई तथा आसपास के इलाकों में 17 से 19 मई के बीच बारिश संभव है। 18 से 21 मई के बीच गुजरात के कई भागों में हो सकती है बारिश। आने वाले दिनों में जैसे जैसे यह तूफ़ान आगे बढ़ेगा वैसे वैसे इसका प्रभाव भी बढ़ सकता है जिसके कारण मध्य प्रदेश के पश्चिमी जिलों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

वीडियो स्रोत: स्काईमेट वेदर

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मुफ्त मिलेंगे दालों के उन्नत बीज, उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने लिया फैसला

Seeds of pulses will be given free

भारत दालों के उत्पादन में पूरी दुनिया में पहले स्थान पर है। इसके बाद भी भारत में दाल की खपत इतनी ज्यादा है की दाल आयात भी करना पड़ जाता है। इसी वजह से सरकार दलहन फसलों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनना चाहती है और इसके लिए विशेष रणनीति भी बनाई गई है।

इस रणनीति के तहत किसानों को दलहनी फसलों के प्रमाणित बीज मुफ्त दिए जाएंगे। केन्द्रीय व राज्य एजेंसियां द्वारा बीजों के मिनी किट 15 जून 2021 तक जिला स्तर पर निर्धारित केंद्र तक पहुंचा दी जाएगी जहाँ से यह किसानों को दी जाएगी।

स्रोत: किसान समाधान

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एकीकृत खेती करने से किसानों को मिलते हैं कई प्रकार के फायदे

Integrated Farming and its benefits
  • यह एक ऐसी तकनीक है जिससे किसान पूरे वर्ष आमदनी ले सकते है।

  • किसानों की आय बढ़ाने के लिए एकीकृत (इंटीग्रेटेड) फार्मिंग सिस्टम प्रणाली काफी लाभकारी है।

  • एकीकृत खेती का मूल यह है कि किसान की जमीन का अधिकतम इस्तेमाल किया जाए।

  • इस तकनीक में किसान खेती के साथ साथ मछली पालन, पशुपालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन आदि भी कर सकते हैं।

  • इसमें एक घटक दूसरे घटक के उपयोग में लाया जाता है।

  • एकीकृत खेती से अधिक मुनाफा कमा सकते है साथ ही कृषि लागत भी कम कर सकते हैं।

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गर्मियों में सब्जियों की खेती करें तो इन बातों का रखें ख़ास ख्याल

If you cultivate vegetables in summer take special care of these things
  • ग्रीष्मकाल में जिस प्रकार तापमान में बढ़ोतरी होती है इसके कारण सब्जी वर्गीय फसलों को बहुत नुकसान पहुँचता है।

  • गर्मियों में सब्जियां उगाने के लिए पहले से तैयार किये गये पौधों का उपयोग करना चाहिए।

  • सब्जी वर्गीय फसलों को गर्मियों में नेट या पॉली हाउस में लगाने से फसलों में नुकसान कम होता है।

  • ध्यान रखें की सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था हो ताकि तापमान बढ़ने के बाद भी फसल में पानी की कमी के कारण तनाव की स्थिति ना हो पाए।

  • फूल एवं फल वृद्धि के लिए समय समय पर बेहतर पोषण देने के उपाय करते रहना चाहिए।

  • गर्मियों में कद्दू वर्गीय फसलें जैसे मिर्च, टमाटर, बैंगन आदि की बुआई कर सकते हैं।

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आपकी प्याज फसल के लिए अगली गतिविधि

रोपाई के 46-50 दिन बाद- रसचूसक कीट व फफूंदजनित रोग नियंत्रित करने के लिए

अच्छे विकास के लिए और रसचूसक कीट व फफूंदजनित रोग नियंत्रित करने के लिए जिब्बरेलिक एसिड (नोवामेक्स) 300 मिली + (फिप्रोनिल 40% + इमिडाक्लोप्रिड 40% WG) (पोलिस) 40 ग्राम+ (टेबुकोनाज़ोल 10% + सल्फर 65% WG) (नोवाकेमा) 500 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करे।

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आपकी प्याज फसल के लिए अगली गतिविधि

रोपाई के 41 से 45 दिन बाद- तीसरी पोषण खुराक

यूरिया 30 किलो + कैल्शियम नाइट्रेट 10 किलो + मैगनेशियम सल्फेट (ग्रोमोर) 10 किलो प्रति एकड़ की दर से आपस में मिलाकर मिट्टी में मिलाएं।

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आपकी प्याज फसल के लिए अगली गतिविधि

रोपाई के 36 से 40 दिन बाद- थ्रिप्स और बैंगनी धब्बा रोग नियंत्रण के लिए

संतुलित पोषण प्रदान करने और थ्रिप्स और बैंगनी धब्बा रोग नियंत्रण के लिए सीवीड एक्सट्रेक्ट (विगरमैक्स जेल) 400 मिली + फ्लोनिकेमिड 50.00% WG (पनामा) 60 ग्राम + क्लोरोथालोनिल 75% WP (जटायु) 400 ग्राम प्रति एकड़ छिड़काव करें।

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आपकी प्याज फसल के लिए अगली गतिविधि

रोपाई के 31 से 35 दिन बाद- उर्वरको का भुरकाव

बेहतर विकास के लिए और सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करने के लिए यूरिया 30 किग्रा + मेक्सग्रो 8 किग्रा + जिंक सल्फेट 5 किग्रा + सल्फर 5 किग्रा प्रति एकड़ मिट्टी पर प्रसारित करें

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आपकी प्याज फसल के लिए अगली गतिविधि

रोपाई से 26 से 30 दिन बाद – थ्रिप्स, एवं कवक रोगो की रोकथाम

वानस्पतिक विकास को बढ़ावा देने के लिए और थ्रिप्स और कवक रोग के प्रबंधन के लिए, 19:19:19 (ग्रोमोर) 1 किलो + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 4.9% SC (लेमनोवा) 200 मिली + हेक्साकोनाज़ोल 5% एससी (नोवाकोन) 400 मिली प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

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आपकी प्याज फसल के लिए अगली गतिविधि

रोपाई से 21 से 25 दिन बाद – दूसरी सिचाई

वानस्पतिक अवस्था के दौरान फसल को दूसरी सिंचाई दें। जड़ सड़न, विल्ट जैसी बीमारियों से बचाव के लिए अतिरिक्त पानी को बाहर निकालें। मिट्टी की नमी के आधार पर 7 से 10 दिनों के अंतराल पर अगली सिंचाई दें।

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