प्याज़ एवं लहसुन की फसल में बुआई के 30-40 दिनों बाद फसल पूर्ण वर्द्धि अवस्था में रहती है जिसके कारण प्याज़/लहसुन की फसल में कीट एवं कवक जनित रोगों का प्रकोप बहुत होता है। इनके नियंत्रण हेतु निम्र उपाय किया जाना बहुत आवश्यक है।
कवक रोग नियंत्रण के लिए थायोफिनेट मिथाइल 70% W/W@ 300 ग्राम/एकड़ या टेबुकोनाज़ोल 10% + सल्फर 65% WG @ 500 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
कीट नियंत्रण लिए फिप्रोनिल 5% SC@ 400 मिली/एकड़ या थियामेंथोक्साम 12.6% + लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन 9.5% ZC@ 80 ग्राम/एकड़ कीदर से छिड़काव करें।
फसल के अच्छे वृद्धि एवं विकास के लिए यूरिया @ 25 किलो/एकड़ + सूक्ष्म पोषक तत्व @ 10 किलो/एकड़ की दर से मिट्टी उपचार के रूप में उपयोग करें।
इन सभी उत्पादों का उपयोग करने से प्याज़ एवं लहसुन की फसल का अच्छा विकास होता है एवं उत्पादन बहुत हद तक बढ़ जाता है।
प्याज की फसल के लिए ग्रामोफोन लेकर आया है प्याज़ समृद्धि किट।
यह किट मिट्टी में पाए जाने वाले आवश्यक पोषक तत्वों को घुलनशील रूप में परिवर्तित करके पौधे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इससे मिट्टी में पाए जाने वाले हानिकारक कवक खत्म होते हैं और पौधे को होने वाले नुकसान से भी बचाव होती है।
यह उत्पाद उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक अवयवों से बना है, यह मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को बढ़ाने में सहायक है।
यह मिट्टी के पीएच को बेहतर बनाने में मदद करता है और जड़ों को एक अच्छी शुरुआत प्रदान करता है, जिससे जड़ पूरी तरह से विकसित होती है, जो फसल के अच्छे उत्पादन का कारण बनती है।
यह किट मिट्टी की संरचना में सुधार करके पोषक तत्वों की उपलब्धता को कम नहीं होने देता है और जड़ प्रणाली द्वारा पोषक तत्वों में सुधार कर के जड़ विकास को बढ़ावा देता है।
यह जड़ों के द्वारा मिट्टी से पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है और मिट्टी में सूक्ष्म जीवो की गतिविधि को बढ़ावा देता है।
यह समृद्धि किट दरअसल खेत की मिट्टी में पाए जाने वाले आवश्यक पोषक तत्वों को घुलनशील रूप में परिवर्तित करके पौधे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मिट्टी में पाए जाने वाली हानिकारक कवकों को खत्म करके यह पौधे को होने वाले नुकसान से बचाती है।
यह उत्पाद उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक अवयवों से बना है, यह मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को बढ़ाने में सहायक है।
यह मिट्टी के पीएच को बेहतर बनाने में मदद करता है और जड़ों को एक अच्छी शुरुआत प्रदान करता है। इससे जड़ पूरी तरह से विकसित होती हैं, और फसल के अच्छे उत्पादन का कारण बनती हैं।
मिट्टी की संरचना में सुधार करके मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता को भी यह कम नहीं होने देता है। यह जड़ प्रणाली द्वारा पोषक तत्वों में सुधार से जड़ विकास को बढ़ावा देता है।
जड़ों के द्वारा यह मिट्टी से पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है, मिट्टी में सूक्ष्म जीवो की गतिविधि को बढ़ावा देता है।
चने की फसल कीट प्रकोप के प्रति बहुत अधिक संवेदनशील होती है क्योंकि यह रबी के कम तापमान वाले मौसम में लगायी जाती है।
चने की फसल में हरी इल्ली का बहुत अधिक प्रकोप होता है, यह इल्ली हरे और भूरे रंग की हो सकती है। यह इल्ली चने की फसल की पत्तियों के पर्णहरित को खुरच कर खा जाती है।
इसके प्रकोप के कारण चने की पत्तियों को बहुत अधिक नुकसान होता है एवं अविकसित फलों एवं फूलों को भी यह कीट बहुत अधिक नुकसान पहुंचाते हैं।
इस कीट के निवारण के लिए क्लोरानट्रानिलीप्रोल 18.5% SC@ 60 मिली/एकड़ या नोवालूरान 5.25% + इमामेक्टिन बेंजोएट 0.9% SC@ 600 मिली/एकड़ या प्रोफेनोफोस 40% + सायपरमेथ्रिन 4% EC@ 400 मिली/एकड़ या इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG@ 100 ग्राम/एकड़ की दर छिड़काव करें।
जैविक उपचार रूप में बवेरिया बेसियाना @ 250 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
अधिक नमी के कारण यह रोग बैगन की फसल को अधिक संक्रमित करता है।
कवक के संक्रमण के कारण बैगन के फलों पर सूखे हुए धब्बे दिखाई देते हैं जो बाद में धीरे धीरे दूसरे फलों में भी फैल जाते हैं।
संक्रमित फलों की बाहरी सतह भूरे रंग की हो जाती है जिस पर सफ़ेद रंग के कवक का निर्माण हो जाता है।
इस रोग से ग्रसित पौधे की पत्तियों एवं अन्य भागों को तोड़कर नष्ट कर देना चाहिए ताकि रोग के प्रसार को रोका जा सके।
इस रोग के निवारण के लिए फसल पर मेंकोजेब 75% WP@ 600 ग्राम/एकड़ या कासुगामायसिन 5% + कॉपरआक्सीक्लोराइड 45% WP@ 300 ग्राम/एकड़ या हेक्साकोनाज़ोल 5% SC@ 400 मिली/एकड़ या स्ट्रेप्टोमायसिन सल्फेट 90% + टेट्रासायक्लीन हाइड्रोक्लोराइड 10% W/W @ 24 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव कर दें।
15-20 दिनों बाद आवश्यकतानुसार छिड़काव दवा बदल कर करें।
जैविक उपचार के रूप में स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस @ 250 ग्राम/एकड़ या ट्राइकोडर्मा विरिडी@ 500 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव कर दें।
मटर दलहनी फसल में आती है, इसलिए मटर की फसल को अधिक नाइट्रोज़न उर्वरक की आवश्यकता नहीं होती है।
मटर की फसल में 15-20 दिनों की अवस्था सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति बहुत आवश्यक होती है इसी के साथ कवक रोग एवं कीट से फसल की रक्षा करना बहुत आवश्यक है।
इन सभी व्याधियों से मटर की फसल की सुरक्षा के लिए सूक्ष्म पोषक मिश्रण @ 8 किलो/एकड़ + सल्फर 90% @ 5 किलो/एकड़ + जिंक सल्फेट @ 5 किलो/एकड़ की दर मिट्टी उपचार के रूप में उपयोग करें।
कीटों के नियंत्रण के लिए एसिटामिप्रीड 20% SP@ 100 ग्राम/एकड़ या प्रोफेनोफोस 50% EC @ 500 मिली/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
कवक रोग के नियंत्रण के लिए कार्बेन्डाजिम 12% + मैंकोजेब 63% @ 300 ग्राम/एकड़ या हेक्साकोनाज़ोल 5% SC@ 400 मिली/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
जैविक उपचार के रूप में स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस @ 250 ग्राम/एकड़ की दर से उपयोग करें।
फेरोमोन एक प्रकार का कीट जाल होता है जो कीड़ों को लुभाने के लिए उपयोग किया जाता है।
अलग अलग प्रकार के कीटों के लिए अलग अलग फेरोमोन का उपयोग किया जाता है।
इसे खेत के चारो कोने पर लगाया जाता है, हर फेरोमोन में एक कैप्सूल लगा होता है जिसमें नर वयस्क कीट कैद हो जाता है।
इस नई तकनीक का लाभ यह है कि किसान अपने खेतों पर कीड़ों की संख्या का आंकलन कर इसका उपयोग कर सकता है।
फल मक्खी एवं इल्ली वर्गीय कीट से छुटकारा पाने का सबसे सस्ता जैविक तरीका है कीटों के वयस्क का नियंत्रण, इससे कीट के जीवन चक्र को नियंत्रित किया जा सकता है।
मौसम में हो रहे परिवर्तनों के कारण रबी के मौसम में लगायी गयी सभी फसलों में रस चूसक कीटों का प्रकोप देखने को मिल सकता है।
थ्रिप्स, एफिड, जैसिड, मकड़ी, सफ़ेद मक्खी जैसे कीट फसलों की पत्तियों का रस चूसकर फसल को बहुत नुकसान पहुँचाते हैं।
थ्रिप्स नियंत्रण के लिए प्रोफेनोफोस 50% EC@ 500 मिली/एकड़ या एसीफेट 75% SP @ 300 ग्राम/एकड़ लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन 4.9% CS @ 300 मिली/एकड़ या फिप्रोनिल 5% SC @ 400 मिली/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
एफिड/जैसिड नियंत्रण के लिए एसीफेट 50% + इमिडाक्लोप्रिड 1.8% SP@ 400 ग्राम/एकड़ या एसिटामिप्रीड 20% SP@ 100 ग्राम/एकड़ या इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL@ 100 मिली/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
सफ़ेद मक्खी के नियंत्रण हेतु डायफैनथीयुरॉन 50% WP@ 250 ग्राम/एकड़ या फ्लोनिकामिड 50% WG @ 60 ग्राम/एकड़ या एसिटामिप्रीड 20% SP @ 100 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
मकड़ी के नियंत्रण मैच प्रॉपरजाइट 57% EC @ 400 मिली/एकड़ या स्पायरोमैसीफेन 22.9% SC @ 250 मिली/एकड़ या एबामेक्टिन 1.9% EC @ 150 मिली/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
अधिकतर क्षेत्रों में रबी के मौसम की फसल बुआई लगभग पूरी हो चुकी है।
मौसम में हो रहे परिवर्तनों के कारण कई जगहों पर फसल का अंकुरण बहुत अच्छे से नहीं हो पा रहा है।
किसान कुछ सरल उपाय अपनाकर फसल के अंकुरण प्रतिशत को बहुत हद तक बढ़ा सकते हैं।
बुआई के समय खेत में अंकुरण के लिए पर्याप्त नमी होना बहुत आवश्यक होता है। पर्याप्त नमी में पौधे का अंकुरण अच्छा होता है और पौधों में नई जड़ें बनने लगती हैं।
जड़ों के अच्छे विकास एवं बढ़वार के लिए बुआई के 15 -20 दिनों के अन्दर जैविक उत्पाद मैक्समायको 2 किलो/एकड़ का उपयोग मिट्टी उपचार के रूप में करें।
इसी के साथ सी वीड @ 300 मिली/एकड़ या ह्यूमिक एसिड @ 100 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
यदि मिट्टी में किसी भी प्रकार के कवक जनित रोगों का प्रकोप दिखाई देता है तो उचित कवकनाशी का उपयोग करें।
इन उपायों को अपनाकर फसलों का अंकुरण बहुत हद तक बढ़ाया जा सकता है।