Management of root aphid in Wheat

  • फसल की देर से बुवाई न करें|
  • यूरिया का प्रयोग ज्यादा न करे|
  • खड़ी फसल में इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL 60-70 मिली प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करें|
  • या थायमेथॉक्ज़ाम 25% WG @ 100 ग्राम के साथ बिवेरिया बेसियाना 2 किलो प्रति एकड़ की दर से  खाद/रेत/मिट्टी में मिला कर जमीन से दे और सिंचाई करें |

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Identification of root aphid in Wheat Crop

  • गेहूँ में माहु का प्रकोप नवंबर- फरवरी माह में देखने को अधिक मिलता है|
  • वर्षा आधारित एवं देर से बुवाई की हुई फसल में यह कीड़ा अधिक नुकसान करता है|
  • छोटे-छोटे पीले रंग के मच्छर गेहूँ के तने के आसपास दिखाई देते है|
  • यह पौधों से रस चूसता है जिस कारण पौधा पीला पड़ने लगता है|
  • यह कीड़ा वायरस रोग फ़ैलाने में भी मदद करता है|
  • खड़ी फसल में इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL 60-70 या थायमेथॉक्ज़ाम 25% WG @ 100 ग्राम के साथ बिवेरिया बेसियाना 2 किलो प्रति एकड़ की दर से  खाद/रेत/मिट्टी में मिला कर जमीन से दे और सिंचाई करें |

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Measures for prevention of frost in crops

  • इसके लिए हमें पौधों की पत्तियों पर शाम के समय हल्की सिंचाई करनी चाहिए | 
  •  हर साल खेत में थोड़ी मात्रा में रेत के इस्तेमाल से फसलों में पाले का असर कम हो जाता है|
  • सुखा खरपतवार तथा सूखी लकड़ियां हवा के विपरीत दिशा में जलाने से भी पाले में कमी आती है | 
  • सल्फर 90 % WDG पाउडर को 3 किलोग्राम 1 एकड़ में छिड़काव करने के बाद सिंचाई करें ।या 
  • सल्फर 80% WDG पाउडर को 40 ग्राम प्रति पम्प (15 लीटर पानी) में मिलाकर स्प्रे करें ।
  • स्यूडोमोनास  फ्लोरोसेंस १  किलो प्रति एकड़ छिड़काव करे.

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Chemical management of leaf miner on garlic crop

  • आक्रमण की शुरुआती अवस्था में प्रभावित पौधे को खेत से बाहर निकाल दे या नष्ट कर दे | 
  • वेपकील (एसिटामप्रिड) @ 100 ग्राम /एकड़ का छिड़काव करे  या
  • कॉन्फीडोर (इमिडाक्लोप्रिड) @ 100 एमएल/एकड़ का छिड़काव करे या
  • एविडेंट (थाइमिथोक्सम) @ 5 ग्राम/पंप का छिड़काव करे या

एबासिन (एबामेक्टिन 1.8% ईसी) @ 150 एमएल का छिड़काव करे |  

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Identification of leaf miner

  • वयस्क कीट छोटे काले और पीले मक्खियों के जैसे दिखाई देते है।
  • लार्वा अपने विकास के पूरा होने पर पत्ती से बाहर निकलते हैं उसके बाद मादा कीट पत्ती के ऊतक भीतर अंडे देने के लिए पत्ती को पंचर करती हैं।
  • परिणामस्वरूप  पौधे का विकास रूक जाता है  और बल्ब की उपज कम हो जाती है | 
  • प्रभावित पौधे की पत्तियों मे सुरंग दिखाई देती है।

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Nutrient management on garlic after 25 day

    • सूक्ष्म पोषक तत्व लहसुन की फसल की उपज बढ़ाने  के लिये प्रभावकारी होते है अतः फसल के विकास हेतु आप निम्नलिखित पोषक प्रबंधन का क्रम अपनाये |
    •  15 दिन बाद की अवस्था पर – 20 किलो यूरिया + 20 किलो 12:32:16 + 300 ग्राम/एकड़ विगोर का छिड़काव करे | 
    •  30 दिन बाद की अवस्था पर –  20 किलो यूरिया + मेक्सग्रो 8 किग्रा / एकड़ | 

 

  •  50 दिन बाद की अवस्था पर – कैल्शियम नाइट्रेट @ 6 किग्रा/एकड़ + जिंक सल्फेट @ 8 किग्रा/एकड़| 

 

 

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Irrigation management on garlic

  •  रोपण के उपरांत पहली सिचाई देनी चाहिये । 
  •   अंकुरण के तीन दिन पश्चात फिर से सिचाई करनी चाहिये।
  •   वनस्पति वृद्धि के एक सप्ताह बाद सिचाई क रना चाहिये। 
  •   आवश्यकता  अनुसार सिचाई  करते रहे। 
  •   जब कंद परिपक्त हो रहे हो तब सिचाई नही देना चाहिये।
  •   फसल को निकालने के 2-3 दिन पहले सिचाई करनी चाहिये जिससे की फसल को निकालने में आसानी होती है। 
  •   फसल के पकने के दौरान भूमि में नमी कम नही होना चाहिये अन्तः कंद के विकास में विपरीत प्रभाव पड़ता है|
  •  10-15 दिनों में कंद का विकास होता है

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Control of Yellow Mosaic Disease in Okra

  • वायरस से ग्रसित पौधों और पौधों के भागों को उखाड़ के नष्ट कर देना चाहिए|
  • कुछ किस्मे जैसे परभणी क्रांति, जनार्धन, हरिता, अर्का अनामिका और अर्का अभय इत्यादि वायरस के प्रति सहनशील होती है|
  • पौधों की वृद्धि की अवस्था में उर्वरकों का अधिक उपयोग ना करें|
  • जहाँ तक हो सके भिंडी की बुवाई समय से पहले कर दें|
  • फसल में प्रयोग होने वाले सभी उपकरणों को साफ रखें ताकि इन उपकरणों के माध्यम से यह रोग अन्य फसलों में ना पहुँच पाए|
  • जो फसलें इस बीमारीं से प्रभावित होती है उन फसलों के साथ भिंडी की बुवाई ना करें|
  • सफ़ेद मक्खी के नियंत्रण के लिए 4-5 चिपचिपे प्रपंच/एकड़ उपयोग कर सकते है|
  • डाइमिथोएट 30% ई.सी. 250  मिली /एकड़ पानी मे घोल बना कर स्प्रे करें|
  • इमिडाइक्लोप्रिड 17.8% SL 80 मिली /एकड़ की दर से स्प्रे करें|

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Yellow Mosaic Disease in Okra/Bhindi

  • यह बीमारी सफ़ेद मक्खी नामक कीट के कारण होती है|
  • यह बीमारी भिंडी की सभी अवस्था में दिखाई देती है|
  • इस बीमारी में पत्तियों की शिराएँ पीली दिखाई देने लगती हैं|
  • पीली पड़ने के बाद पत्तियाँ मुड़ने लग जाती हैं|
  • इससे प्रभावित फल हल्के पीले, विकृत और सख्त हो जाते है|

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Grading of green peas

  • ताजे सब्जी के रुप में  उपयोग करते समय, ज्यादा पकी पीली फल्लियों, चपटे फल्लियों रोग ग्रस्त व कीट ग्रस्त  फल्लियों को अलग कर देना चाहिये । 
  • मटर को आकार के आधार पर चार  वर्गों में विभाजित किया गया है ।  
  • छोटे मटर की गुणवत्ता अधिक  होती है ।

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