- अच्छी तरह जल निकास वाली दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए अच्छी मानी जाती हैं।
- वर्षा आधारित खेती के लिए चिकनी मिट्टी अच्छी होती है जिसका pH 6-8 होनी चाहिए।
- धनिया की फसल हेतु उपयुक्त तापमान 20-25 oC होता हैं|
- ठंडी और शुष्क जलवायु इसकी फसल के लिए अच्छी मानी जाती हैं।
मटर में माहु का नियंत्रण
मटर में माहु का नियंत्रण:-
- हरे रंग के छोटे कीट होते है । वयस्क, बड़े नाशपाती के आकार वाले हरे, पीले या गुलाबी रंग के होते है।
हानि :-
- पत्तियों, फूलों व फल्लियों से रस चूसते है ।
- प्रभावित पत्तियां मुड़ जाती है व टहनियां छोटी रह जाती है ।
- यह कीट मीठे पदार्थ का रिसाव करते है जो सूटी मोल्ड को विकसित करते है ।
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Control of Root-Knot Nematode in Tomato
- प्रतिरोधक किस्मों को उगाये|
- ग्रीष्म ऋतू में भूमि की गहरी जुताई करें|
- नीम खली 80 किलो प्रति एकड़ की दर से देना चाहिए|
- कार्बोफ्युरोन 3% G 8 किलो प्रति एकड़ की दर से देना चाहिए|
- पेसिलोमाइसेस लिलासिनास -1% डब्ल्यूपी, बीज उपचार के लिए 10 ग्राम/किलोग्राम बीज, 50 ग्राम/मीटर वर्ग नर्सरी उपचार, 2.5 से 5 किलो/हेक्टेयर जमीन से देने के लिए |
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Root-Knot Nematode in Tomato
हानि
- पत्तियों का रंग हल्का पीला हो जाता है|
- सूत्रकृमि से ग्रसित पौधों की वृद्धि रुक जाती है एवं पौधा छोटा ही रहता है| अधिक संक्रमण होने पर पौधा सुखकर मर जाता है|
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How to flower promotion in chickpea
नीचे दिए गए कुछ उत्पादों के द्वारा चने की फसल में फूलों की संख्या को बढ़ाया जा सकता है|
- होमोब्रासिनोलॉइड 0.04% डब्लू/डब्लू 100-120 एम.एल./एकड़ का स्प्रे करें|
- समुद्री शैवाल का सत 200-250 ml/एकड़ का उपयोग करें|
- सूक्ष्म पोषक तत्त्व 200 ग्राम/एकड़ का स्प्रे करें ख़ासतौर पर बोरोन |
- 2 ग्राम/एकड़ जिब्रेलिक एसिड का स्प्रे भी कर सकते है|
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The critical stage of irrigation in Potato
- आलू की फसल में सीजन के दौरान उच्चतम मृदा नमी को बांये रखने के लिए उच्च स्तरीय प्रबंधन की आवश्यकता होता है |
- वृद्धि के कुछ चरण जब जल प्रबंधन बहुत महत्त्वपूर्ण है-
- 1). अंकुरण अवस्था
- 2). कंद स्थापित अवस्था
- 3). कंद बढ़वार अवस्था
- 4). अंतिम फसल अवस्था
- 5). खुदाई के पूर्व |
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Requirement of Irrigation in Pea
- यदि भूमि सूखी हो तो अच्छी तरह से बीजांकुर होने के लिये बोने पूर्व सिंचाई करें ।
- भूमि के प्रकार व मौसमानुसार 10 से 15 के अंतर से सिंचाई करना चाहिये ।
- फल एवं फल्ली आने के समय नमी की कमी होने पर उपज में कमी आती है अंतः इस समय सिंचाई अवश्य करें ।
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Role of Calcium in Garlic
- कैल्शियम लहसुन में एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है और यह फसल की पैदावार और गुणवत्ता में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
- कैल्शियम से जड़ स्थापना में वृद्धि एवं कोशिकाओं का विस्तार को बढ़ता है जिससे पौधों की ऊँचाई बढ़ती है ।
- यह रोग और ठण्ड से सहिष्णुता बढ़ता है यद्यपि लहसुन में कैल्शियम की सिफारिश की गई मात्रा उपज, गुणवत्ता और भंडारण क्षमता के लिए अच्छी है।
- कैल्शियम की अनुशंसित खुराक 4 किलोग्राम/एकड़ या मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार है।
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Management of termite
- बुवाई के पहले खेत में गहरी जुताई करें|
- खेत में अच्छी सड़ी हुई खाद का ही उपयोग करे|
- दीमक के टीले को केरोसिन से भर दे ताकि दीमक की रानी के साथ-साथ अन्य सभी कीट मर जाएँ|
- बुवाई से पहले क्लोरोपायरीफोस (20% ई.सी ) @ 5 मिली/ किलो बीज से बीजोपचार करें ।
- क्लोरोपायरीफोस (20% ई.सी) @ 1 लीटर/ एकड़ को किसी भी उर्वरक के साथ मिलाकर जमीन से दें और सिंचाई कर दे|
- बवेरिया बेसियाना 1 किलो / एकड़ छिड़काव करे.
- फाक्स ग्रेनुयल 7.५ किलो/ एकड़ भुरकाव करे।
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Identification of termite on wheat crop
- बुवाई के बाद और कभी-कभी परिपक्वता की अवस्था पर दीमक द्वारा फसल को नुकसान पहुँचाया जाता है|
- दीमक प्रायः फसल की जड़ों, बढ़ते पौधों के तनों, पौधे के मृत ऊतकों को नुकसान पहुँचाती है|
- क्षतिग्रस्त पौधे पूरी तरह से सूख जाते हैं और आसानी से जमीन से उखाड़े जा सकते है|
- जिन क्षेत्रों में अच्छी तरह सड़ी हुई खाद का प्रयोग नहीं किया जाता उन क्षेत्रो में दीमक का प्रकोप अधिक होता है|
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