नाइट्रोजन की कमी होने पर करें यूरिया का छिड़काव, जानें इसके लाभ

Benefits of spraying urea in case of nitrogen deficiency
  • किसान भाइयों यूरिया का पत्तियों पर छिड़काव एक सरल पद्धति है जिसके द्वारा नाइट्रोजन की कमी को बहुत ही जल्दी दूर किया जा सकता है। 

  • छिड़काव के 1-2 दिन बाद ही फसल गहरे हरे रंग की हो जाती है। 

  • पानी की कमी की स्थिति में छिड़काव विधि अधिक उपयोगी रहती है क्योंकि छिड़काव के बाद यदि किसी कारण पानी नहीं भी मिल पाए तो भी किसान को संतोषजनक लाभ मिल जाता है जबकि मिट्टी में नाइट्रोजन उर्वरक प्रयोग करते समय पार्यप्त मात्रा में नमी का होना या तुरंत सिंचाई लगना नितांत आवश्यक होता है।

  • जहां भूमि समतल नहीं है वहां भी यूरिया छिड़काव लाभकारी रहता है। 

  • कम मात्रा में संपूर्ण क्षेत्र में यूरिया का समान वितरण किया जा सकता है। 

  • नाइट्रोजन का पौधों द्वारा उपयुक्त उपयोग किया जाता है।

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क्या आज भी होगी बारिश और ओलावृष्टि, देखें संपूर्ण देश का मौसम पूर्वानुमान

Weather Forecast

दिल्ली सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मूसलाधार बारिश के साथ ओले गिरे हैं। अब बारिश की गतिविधियां हरियाणा पंजाब राजस्थान पश्चिमी मध्य प्रदेश गुजरात तथा दिल्ली से लगभग समाप्त हो जाएंगी। पहाड़ों पर हिमपात जारी रहेगा। पंजाब और हरियाणा के तराई वाले जिलों में बारिश संभव है। अब पूर्वी भारत में वर्षा की गतिविधियां बढ़ेंगी।

स्रोत: स्काइमेट वेदर

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क्या प्याज भाव में आई तेजी, देखें 8 जनवरी को इंदौर मंडी का हाल

Indore onion Mandi Bhaw

वीडियो के माध्यम से जानें आज यानी 8 जनवरी के दिन इंदौर के मंडी में क्या रहे प्याज के मंडी भाव?

वीडियो स्रोत: यूट्यूब

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सरकारी सब्सिडी पर करें इन फलों की बागबानी, जानें आवेदन की प्रक्रिया

Plant these fruits on government subsidy

मानसून अब धारे धारे खत्म हो रहा है और इस समय में फलदार पौधों की बागबानी किसान कर सकते हैं। मध्य प्रदेश सरकार के उद्यानिकी विभाग की तरफ से भी फलों की उपज बढ़ाने के लिए “फल क्षेत्र विस्तार योजना” की शुरुआत की गई है।

इस योजना के अंतर्गत किसानों से आवेदन करने के लिए कहा गया है। प्रदेश में पहले से चल रहे एक जिला एक उत्पाद कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न फलों की बागवानी हेतु अलग-अलग जिलों को चुना गया है।

मध्य प्रदेश के किसानों के लिए राज्य प्रायोजित योजना “फल क्षेत्र विस्तार” के तहत विभिन्न प्रकार के फलों की बागवानी के लिए सरकार द्वारा अनुदान दिया जाता है | किसान सीताफल, संतरा, आम, अमरुद, नींबू, केला जैसे फलों की बागवानी फसलों के लिए जारी लक्ष्य के अनुसार आवेदन कर सकते हैं | इस योजना में किसान आम, सीताफल, संतरा, नींबू, केला जैसे फलों की बागवानी फसलों के लिए जारी लक्ष्य के अनुसार आवेदन कर सकते हैं।

सीताफल, संतरा, आम, अमरुद के अलीराजपुर, धार, सिवनी, आगर–मालवा, राजगढ़, अनुपपुर, बैतूल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भोपाल, होशंगाबाद तथा सीहोर जिले के किसानों से आवेदन मांगे गए हैं। किसान https://mpfsts.mp.gov.in/mphd/#/ पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

स्रोत: किसान समाधान

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कृषि बिजली बिल पर मिलेगी 12000 रूपये की वार्षिक सब्सिडी

An annual subsidy of Rs 12000 will be available on the agricultural electricity bill

कृषि क्षेत्र में किसानों के कृषि खर्च को कम करने और आय को बढ़ाने के लिए सरकार कई योजनाएं ला रही है। इसी कड़ी में राजस्थान के किसानों के लिए सरकार “मुख्यमंत्री किसान मित्र उर्जा योजना” चला रही है। इस योजना की मदद से लघु व मध्यम वर्ग के किसानों को कृषि उपयोग हेतु बिजली तकरीबन मुफ्त दी जाएगी।

इस योजना के अंतर्गत हर महीने कृषि बिजली बिल पर 1000 रूपये की सब्सिडी दी जाएगी। इसका मतलब ये हुआ की अगर किसान को एक महीने में 1000 रूपये की कृषि बिजली बिल आती है तो यह उसे कोई राशि जमा नहीं करनी होगी। इसके अलावा अगर किसी किसान की बिजली बिल 1000 रूपये से कम आती है तो तो उस महीने के सब्सिडी की बची हुई राशि अगले महीने की राशि में जोड़ दी जाएगी। कुछ इस तरह किसानों को बिजली बिल सब्सिडी के माध्यम से 12000 रूपये दिए जाएंगे।

स्रोत: किसान समाधान

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गेहूँ की फसल में जिंक की कमी से होगा नुकसान

Zinc an essential element in wheat
  • किसान भाइयों मध्य प्रदेश की मिट्टी में जिंक की कमी मुख्यतः पाई जाती है जिससे किसानों को अपनी गेहूँ फसल में यह समस्या देखने को मिलती है। जिंक की कमी के कारण फसल पकने में अधिक समय लगता है। 

  • गेहूँ में जिंक की कमी के लक्षण 25 से 30 दिन में नजर आने लगते हैं।

  • गेहूँ में जिनक यानी जस्ते की कमी के कारण पौधे की ऊंचाई घट जाती है, फसल वृद्धि असमान दिखाई देती है, पत्तियां छोटी रह जाती है। 

  • पौधों की बीच की पत्तियों में सफेद, भूरे धब्बे दिखाई देते हैं, जो लंबाई में फैलते हैं। जिंक की कमी ज्यादा होने पर पत्तियां सफेद होकर कर मर जाती है।

  • जिंक की कमी को खेत में जिंक सल्फेट देकर दूर किया जा सकता है। इसकी कमी के अनुसार, मात्रा 5-10 किलोग्राम प्रति एकड़ तक दी जा सकती है।

  • खड़ी फसल में कमी दिखाई देने पर जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत घोल का छिड़काव बुवाई के 30 दिन के अंदर कर सकते है, एवं 15 दिनों के अंतराल में आवश्यकतानुसार दोहरा सकते है।

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मध्य प्रदेश राजस्थान समेत कई राज्यों में ओलावृष्टि व भारी बारिश के आसार

know the weather forecast,

पहाड़ों पर अगले 2 दिनों के दौरान भारी और उसके बाद हल्का हिमपात जारी रहेगा। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान तथा मध्य प्रदेश में तेज बारिश के साथ ओले गिरेंगे। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु तथा तेलंगाना सहित महाराष्ट्र के कुछ भागों में बारिश संभव है। गुजरात में भी हल्की वर्षा हो सकती है।

स्रोत: स्काइमेट वेदर

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आपकी गेहू फसल के लिए अगली गतिविधि

बुवाई के 115 से 120 दिन बाद- कटाई की अवस्था

बालियों के पक जाने (भौतिक परिपक्वता) पर फसल को तुरन्त काट लेना चाहिए अन्यथा दाने झड़ने की साम्भावना होती हे। खराब मौसम की दशा में कम्बाइंड हार्वेस्टर का प्रयोग श्रेयस्कर है जिससे हानियों से बचा जा सकता है।

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आपकी गेहू फसल के लिए अगली गतिविधि

100-110 बुवाई के बाद- अनाज के उचित सुखने और परिपक्वता के लिए सिंचाई बंद कर दें

अनाज भरने की अवस्था के बाद फसल को अंतिम सिंचाई दें ताकि उचित परिपक्वता हो और अनाज अच्छे से सूख सके। इसके बाद सिंचाई बंद कर दें।

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आपकी गेहू फसल के लिए अगली गतिविधि

बुवाई के 85-90 दिन बाद- अनाज का आकार बढ़ाने और पाले की चोट से बचाव के लिए

दानों का आकार बढ़ाने और गेरुआ रोग के नियंत्रण के लिए 00:00:50 (ग्रोमोर) 1 किलो + प्रोपिकोनाज़ोल 25% ईसी (ज़ेरॉक्स) 200 मिली प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करे। फसल को पाले से बचाने के लिए स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस (मोनास कर्ब) 500 ग्राम प्रति एकड़ की दर से इस छिड़काव में मिलाए।

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