मौसम में हो रहे बदलाव के दौरान बरतें कृषि संबंधित सावधानियां

Take precautions related to agriculture during the weather changes
  • खेत में जल निकास का प्रबंधन करें ताकि खेत में पानी ज्यादा देर तक न रुक सके।
  • फसल कटाई के दौरान उसे खुले खेत में न रखकर किसी छपरे, कमरे, गोदाम अथवा जहाँ बारिश का पानी न आये, ऐसी जगह पर रखें।
  • आसमान के साफ़ होने पर चना मसूर गेहूं को तिरपाल या प्लास्टिक की चादरों पर खोलकर 2 से 3 दिन तक अच्छी तरह सुखा लें। दानों में नमी की मात्रा 12% से कम हो जाए तभी इसका भंडारण करें।
  • बीज भंडारण के पहले फफूंदनाशक दवा से बीज उपचार करना जरूरी होता है जिससे बीज जनित रोग का सस्ता एवं कारगर नियंत्रण हो सकता है।
  • बीज उपचार हेतु थाइरम या केप्टान दवा 3 ग्राम अथवा कार्बोक्सिन 2 ग्राम प्रति किलो की दर से उपचारित करना चाहिए।
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अप्रैल के पहले हफ्ते में किसानों को मिलेगी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की पहली किस्त

कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए देश भर में चल रहे लॉकडाउन के बीच किसान भाइयों के लिए एक खुशख़बरी आई है। यह खुशख़बरी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत आई है। इस योजना के अंतर्गत आने वाले किसानों को इसकी पहली किस्त दिए जाने की तारीख घोषित कर दी गई है।

ख़बरों के अनुसार आगामी एक अप्रैल से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत पहली किस्त के भुगतान की शुरुआत कर दी जायेगी। ग़ौरतलब है की इस योजना के अंतर्गत सरकार किसानों को पूरे वर्ष के दौरान तीन समान किस्तों में 6000 रुपये देती है। भारत सरकार की तरफ से किसानों को आर्थिक मदद देने हेतु यह महत्वाकांक्षी योजना पिछले वर्ष आरम्भ की गई थी।

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मूंग की उन्नत किस्मों की जानकारी

Information of improved varieties of Moong bean

शक्तिवर्धक विराट: मूंग की यह किस्म 70-80 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है। इसका पौधा सीधा, सख्त, कम बढ़ने वाला होता है और इसकी फली में 10-12 दाने होते हैं। यह उन्नत किस्म ग्रीष्म व खरीफ दोनों मौसम में बिजाई के लिए उपयुक्त होती है।

मूंग अवस्थी सम्राट: यह उन्नत किस्म ग्रीष्म व खरीफ दोनों मौसम में बिजाई के लिए उपयुक्त होती है। मूंग की यह किस्म 70-80 दिनों में अच्छी उपज देती है।

ईगल मूंग: यह किस्म पीडीएम-139 नाम से भी जानी जाती है जो 55-60 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है। इसकी उपज 12-15 क़्वींटल प्रति हैक्टर होती है। यह किस्म पीले मौजेक वायरस के प्रति मध्यम प्रतिरोधक क्षमता रखती है। यह उन्नत किस्म ग्रीष्म मौसम में बिजाई के लिए उपयुक्त होती है।

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कोरोना वायरस के मद्देनजर क्या है देश में खाद्य भंडारण की स्थिति?

What is the situation of food storage in the country
  • कोरोना वायरस से बचने के लिए 21 दिनों तक घोषित देश में तालाबंदी (लॉक डाउन) के इस कठिन समय में भारतीय खाद्य निगम के चेयरमैन ने बताया कि देश में इस वक्त सरकारी गोदामों में गेहूं, दाल, तेल और चीनी का भरपूर भंडार है।
  • देश के पास पर्याप्त खाद्य भंडार, मौजूदा स्टॉक से ज़रूरतमंदों को 18 महीने तक आपूर्ति की जा सकती है।
  • इस साल देश में रिकॉर्ड 291.10 लाख टन खाद्यान्न के उत्पादन का अनुमान लगाया गया है जो मेहनती किसानों के कारण संभव हो सका।
  • इस विपदा के समय में ग्रामोफ़ोन परिवार सभी किसानों का आभार व्यक्त करता है।
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मौसम बदलाव के कारण हो सकते है कीट आक्रमण

Pest attacks may occur in the change of weather
  • मौसम बदलाव को देखते हुए कई तरह के कीट फसलों पर हमले कर सकते हैं क्योंकि नमीयुक्त वातावरण इनके लिए उपयुक्त होता है।
  • ग्रीष्मकालीन कद्दूवर्गीय सब्जियों में लाल भृंग कीट के आक्रमण की संभावना रहती है। इस कीट की संख्या अधिक हो तो साइपरमैथ्रिन 4% ईसी + प्रोफेनोफॉस 40% ईसी 400 मिली या बाइफेंथ्रीन 10% ईसी 200 मिली या डाइक्लोरोवोस 76 ईसी 300 मिली/एकड़ का छिड़काव करें।
  • भिंडी में रस सूचक कीट जैसे सफेद मक्खी, एफिड, जैसिड आदि के नियंत्रण के लिए थायोमेथोक्सोम 25 डब्लू जी 5 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें।
  • प्याज में थ्रिप्स (तेला) के प्रकोप की अधिक संभावना बनी हुई रहती है अतः प्रोफेनोफोस 50 ई.सी. @ 45 मिली या लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 4.9% सी.एस. @ 20 मिली या स्पिनोसेड @ 10 मिली या फिप्रोनिल 5 एस.सी. प्रति 15 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
  • रासायनिक दवा के साथ इस मौसम में 0.5 मिली चिपको प्रति 15 लीटर पानी में मिलाकर प्रयोग करें ताकि दवा पौधों द्वारा अवशोषित हो जाये।
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मध्य प्रदेश में बारिश और ओलावृष्टि से फसल को हुए नुकसान पर सीएम ने दिया मदद का भरोसा

Crops in damaged in MP due to rain and hailstorm, CM ensured for help

 

पिछले 24 घंटे में मध्य प्रदेश के करीब 20 जिले में बारिश के साथ भारी ओलावृष्टि हुई जिससे किसानों द्वारा लगाई गई फ़सलों को भारी नुकसान हुआ है। इस ओलावृष्टि की वजह से खेतों में सफ़ेद चादर बिछ गई। फ़सलों के नष्ट होने की वजह से लाखों किसान नुकसान झेलने को मजबूर हुए हैं।

एक तरफ पहले ही कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए चल रहे देशव्यापी लॉक डाउन से किसानों को परेशानी हो रही थी वहीं दूसरी तरफ अब इस ओलावृष्टि से किसानों को और ज्यादा परेशानी होती नजर आ रही है।

बहरहाल इस परेशानी के समय में किसान भाइयों को मध्यप्रदेश सरकार की तरफ से मदद की उम्मीद है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस ओलावृष्टि को देखते हुए किसान भाइयों की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है। सीएम शिवराज ने इस बाबत ट्वीट करते हुए किसानों को फ़िक्र ना करने को कहा है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने ट्वीट में लिखा की “मेरे किसान भाइयों, प्रदेश के विभिन्न स्थानों में भारी बारिश के साथ ओले गिरने का समाचार मिला है। मैं स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा हूँ। आप चिंता मत कीजिए, फसल के नुकसान को लेकर परेशान मत होइये। मैं संकट की हर घड़ी में आपके साथ खड़ा हूँ, इससे भी बाहर निकालकर ले जाऊंगा।”

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किसानों को राहत, अल्पकालीन फसली ऋण चुकाने की मियाद एक महीने बढ़ाई गई

Relief for farmers, Govt. extended the duration of short-term crop loan

कोरोना वैश्विक महामारी की वजह से देश भर में चल रहे लॉक डाउन से बहुत सारे लोगों को परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है। हमारे किसान भाइयों को भी इसकी वजह से कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन्ही समस्याओं को देखते हुए भारत सरकार ने किसानों द्वारा ली गई अल्पकालीन फसली ऋण के भुगतान की तिथि एक महीने आगे बढ़ा दी है। 

केंद्र सरकार ने किसानों के लिए अल्पकालीन फसली ऋण के पुनर्भुगतान की अवधि 31 मई 2020 तक बढ़ाने का फैसला किया है। बता दें की अब किसान भाई 31 मई 2020 तक अल्पकालीन फसली ऋण को बगैर किसी दंडात्मक ब्याज के महज 4% सालाना ब्याज की दर पर भुगतान कर सकते हैं।

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गेहूँ और चावल की कीमतों पर केंद्र सरकार देगी रियायत

Central government will give concession on the prices of wheat and rice
  • कोरोना विश्व महामारी के इस मुश्किल दौर से निपटने के लिए सरकार ने कुछ बड़े कदम उठाये हैं। 
  • जनता को परेशानी ना हो इसका ध्यान रखते हुए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में देश के 80 करोड़ लोगों को सस्ती दर पर अनाज देने का फैसला किया गया है। 
  • सरकार ने 80 करोड़ लोगों को 27 रूपये प्रति किलो वाला गेहूं मात्र ₹2 प्रति किलोग्राम में और 37 रूपये प्रति किलो वाला चावल 3 रूपये प्रति किलोग्राम में देने का फैसला किया है। 
  • इस पर 1 लाख 80 हजार करोड़ रूपये खर्च होंगें जो तीन महीने के लिए राज्यों को एडवांस में दिया गया है।
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प्याज की फसल में थ्रिप्स (तेला) का प्रबंधन कैसे करें?

यह एक छोटे आकार का कीट होता है, जो प्याज की फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाता है। इसके शिशु और वयस्क दोनों रूप पत्तियों के कपोलों में छिपकर रस चूसते हैं जिससे पत्तियों पर पीले सफेद धब्बे बनते हैं, और बाद की अवस्था में पत्तियां सिकुड़ जाती है। यह कीट शुरू की अवस्था में पीले रंग का होता है जो आगे चलकर काले भूरे रंग का हो जाता है। इसका जीवन काल 8-10 दिन होता है। व्यस्क प्याज के खेत में ज़मीन में, घास पर और अन्य पौघो पर सुसुप्ता अवस्था में रहते है। सर्दियों में थ्रिप्स (तैला) कंद में चले जाते है और अगले वर्ष संक्रमण के स्त्रोत का कार्य करते है। यह कीट मार्च-अप्रैल के दौरान बीज उत्पादन और प्याज कंद पर बड़ी संख्या में वृद्धि करते हैं जिससे ग्रसित पौधों की वृद्धि रुक जाती है, पत्तियाँ घूमी हुई नजर आती है और कंद निर्माण पुरी तरह बंद हो जाता है। भंडारण के दौरान भी इसका प्रकोप कंदों पर रहता है।   

रोकथाम के उपाय 

  • प्याज में रोग एवं नियंत्रण हेतु गर्मी में खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए।
  • अधिक नाइट्रोजन उर्वरक का प्रयोग ना करें। 
  • प्रोफेनोफोस 50 ई.सी. @ 45 मिली या लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 4.9% सी.एस. @ 20 मिली या स्पिनोसेड @ 10 मिली या फिप्रोनिल 5 एस.सी. SC  प्रति 15 लीटर की दर से छिड़काव करें।
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करेले के सेवन से होने वाले स्वास्थ्यवर्धक फायदे

Bitter gourd Benefits
  • करेले में फास्फोरस पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह कफ, कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है। इसके सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है।
  • पेट में गैस बनने और अपच होने पर करेले के रस का सेवन करना अच्छा होता है, जिससे लंबे समय के लिए यह बीमारी दूर हो जाती है।
  • करेले का जूस पीने से लीवर मजबूत होता है और लीवर की सभी समस्याएं खत्म हो जाती है तथा इससे पीलिया में भी लाभ मिलता है।
  • यह हानिकारक वसा को हृदय की धमनियों में जमने नहीं देता जिससे रक्त संचार व्यवस्थित बना रहता है।
  • इसमें मोमर्सिडीन और चैराटिन नामक के दो कम्पाउंड होते हैं जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करते हैं।
    करेला इंसुलिन को ऐक्टिव करता है, खाली पेट करेले का जूस पीने से डायबटीज़ में काफी फायदा होता है।
  • इसमें बीटा-कैरोटिन होता है जो आंखों से संबंधित बीमारियों को दूर रखता है और रोशनी बढ़ाने में भी मदद करता है।
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