मंडी |
कमोडिटी |
न्यूनतम मूल्य (किलोग्राम में) |
अधिकतम मूल्य (किलोग्राम में) |
जयपुर |
अनन्नास |
34 |
36 |
जयपुर |
कटहल |
20 |
22 |
जयपुर |
आम |
140 |
– |
जयपुर |
आम |
60 |
65 |
जयपुर |
आम |
50 |
– |
जयपुर |
नींबू |
100 |
110 |
जयपुर |
नारियल |
35 |
37 |
जयपुर |
अनार |
75 |
80 |
जयपुर |
अदरक |
25 |
26 |
जयपुर |
तरबूज |
10 |
12 |
जयपुर |
आलू |
10 |
13 |
कोलकाता |
आलू |
13 |
– |
कोलकाता |
प्याज |
15 |
– |
कोलकाता |
अदरक |
31 |
– |
कोलकाता |
लहसुन |
29 |
– |
कोलकाता |
लहसुन |
31 |
– |
कोलकाता |
लहसुन |
33 |
– |
कोलकाता |
तरबूज |
18 |
– |
कोलकाता |
अनन्नास |
45 |
55 |
कोलकाता |
सेब |
115 |
128 |
लखनऊ |
आम |
60 |
65 |
लखनऊ |
सेब |
90 |
105 |
लखनऊ |
प्याज |
12 |
13 |
लखनऊ |
अदरक |
25 |
26 |
लखनऊ |
आलू |
13 |
14 |
रतलाम |
आलू |
12 |
14 |
रतलाम |
टमाटर |
18 |
22 |
रतलाम |
कद्दू |
14 |
– |
रतलाम |
पपीता |
14 |
– |
रतलाम |
हरी मिर्च |
45 |
60 |
रतलाम |
नींबू |
150 |
– |
रतलाम |
खरबूज |
22 |
26 |
रतलाम |
तरबूज |
6 |
8 |
रतलाम |
कटहल |
18 |
– |
रतलाम |
भिंड़ी |
7 |
10 |
रतलाम |
प्याज |
2 |
3 |
रतलाम |
प्याज |
3 |
5 |
रतलाम |
प्याज |
5 |
8 |
रतलाम |
लहसुन |
6 |
11 |
रतलाम |
लहसुन |
11 |
19 |
रतलाम |
लहसुन |
18 |
32 |
रतलाम |
लहसुन |
28 |
56 |
सोलापुर |
आलू |
19 |
– |
सोलापुर |
आलू |
18 |
23 |
सोलापुर |
प्याज |
5 |
7 |
सोलापुर |
प्याज |
6 |
9 |
सोलापुर |
प्याज |
9 |
13 |
सोलापुर |
प्याज |
11 |
16 |
सोलापुर |
अनार |
70 |
90 |
सोलापुर |
अनार |
75 |
150 |
सोलापुर |
अनार |
100 |
180 |
सोलापुर |
अंगूर |
30 |
65 |
सोलापुर |
लहसुन |
12 |
17 |
सोलापुर |
लहसुन |
15 |
20 |
सोलापुर |
लहसुन |
25 |
38 |
सोलापुर |
लहसुन |
40 |
55 |
गुवाहाटी |
प्याज |
11 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज |
14 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज |
17 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज |
11 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज |
15 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज |
17 |
– |
गुवाहाटी |
लहसुन |
30 |
– |
गुवाहाटी |
लहसुन |
38 |
– |
गुवाहाटी |
लहसुन |
45 |
– |
गुवाहाटी |
लहसुन |
50 |
– |
गुवाहाटी |
लहसुन |
30 |
– |
गुवाहाटी |
लहसुन |
40 |
– |
गुवाहाटी |
लहसुन |
50 |
– |
गुवाहाटी |
लहसुन |
55 |
60 |
लखनऊ |
प्याज |
9 |
10 |
लखनऊ |
प्याज |
11 |
13 |
लखनऊ |
प्याज |
11 |
12 |
लखनऊ |
प्याज |
13 |
– |
लखनऊ |
प्याज |
14 |
– |
लखनऊ |
लहसुन |
10 |
15 |
लखनऊ |
लहसुन |
20 |
25 |
लखनऊ |
लहसुन |
30 |
35 |
लखनऊ |
लहसुन |
40 |
45 |
भोपाल |
प्याज |
8 |
– |
भोपाल |
प्याज |
9 |
– |
भोपाल |
प्याज |
10 |
– |
भोपाल |
लहसुन |
9 |
– |
भोपाल |
लहसुन |
15 |
– |
भोपाल |
लहसुन |
16 |
– |
भोपाल |
लहसुन |
10 |
– |
भोपाल |
लहसुन |
21 |
– |
जयपुर |
प्याज |
11 |
12 |
जयपुर |
प्याज |
13 |
– |
जयपुर |
प्याज |
14 |
– |
जयपुर |
प्याज |
5 |
6 |
जयपुर |
प्याज |
7 |
8 |
जयपुर |
प्याज |
9 |
10 |
जयपुर |
प्याज |
11 |
– |
जयपुर |
लहसुन |
10 |
13 |
जयपुर |
लहसुन |
17 |
20 |
जयपुर |
लहसुन |
23 |
26 |
जयपुर |
लहसुन |
33 |
36 |
जयपुर |
लहसुन |
13 |
15 |
जयपुर |
लहसुन |
18 |
25 |
जयपुर |
लहसुन |
30 |
35 |
जयपुर |
लहसुन |
40 |
42 |
कोलकाता |
प्याज |
10 |
– |
कोलकाता |
प्याज |
12 |
– |
कोलकाता |
प्याज |
14 |
15 |
कोलकाता |
प्याज |
16 |
– |
कोलकाता |
लहसुन |
29 |
– |
कोलकाता |
लहसुन |
31 |
– |
कोलकाता |
लहसुन |
33 |
– |
पश्चिम बंगाल |
प्याज |
13 |
– |
पश्चिम बंगाल |
प्याज |
15 |
16 |
पश्चिम बंगाल |
प्याज |
10 |
– |
पश्चिम बंगाल |
प्याज |
14 |
15 |
पश्चिम बंगाल |
प्याज |
16 |
– |
पश्चिम बंगाल |
लहसुन |
28 |
30 |
पश्चिम बंगाल |
लहसुन |
35 |
36 |
शाजापुर |
प्याज |
4 |
6 |
शाजापुर |
प्याज |
7 |
9.5 |
शाजापुर |
प्याज |
9.5 |
10.5 |
शाजापुर |
लहसुन |
12 |
– |
शाजापुर |
लहसुन |
18 |
23 |
शाजापुर |
लहसुन |
23 |
26 |
तिरुवनंतपुरम |
प्याज |
25 |
35 |
तिरुवनंतपुरम |
प्याज |
12 |
– |
तिरुवनंतपुरम |
प्याज |
16 |
– |
तिरुवनंतपुरम |
प्याज |
19 |
– |
तिरुवनंतपुरम |
लहसुन |
50 |
– |
तिरुवनंतपुरम |
लहसुन |
55 |
– |
तिरुवनंतपुरम |
लहसुन |
65 |
– |
कोलकाता |
प्याज |
11 |
– |
कोलकाता |
प्याज |
13 |
– |
कोलकाता |
प्याज |
14 |
15 |
कोलकाता |
प्याज |
16 |
– |
कोलकाता |
लहसुन |
30 |
– |
कोलकाता |
लहसुन |
32 |
– |
कोलकाता |
लहसुन |
33 |
– |
मंदसौर |
लहसुन |
13 |
18 |
मंदसौर |
लहसुन |
19 |
25 |
मंदसौर |
लहसुन |
26 |
32 |
मंदसौर |
लहसुन |
32 |
45 |
आगरा |
प्याज |
7 |
7.5 |
आगरा |
प्याज |
7.5 |
8 |
आगरा |
प्याज |
8 |
9 |
आगरा |
प्याज |
10 |
11 |
आगरा |
प्याज |
8 |
9 |
आगरा |
प्याज |
9 |
10 |
आगरा |
प्याज |
10.5 |
11 |
आगरा |
प्याज |
12 |
13 |
आगरा |
प्याज |
5 |
6 |
आगरा |
प्याज |
6.5 |
7 |
आगरा |
प्याज |
7.5 |
8 |
आगरा |
प्याज |
8 |
8.5 |
आगरा |
लहसुन |
15 |
20 |
आगरा |
लहसुन |
22 |
24 |
आगरा |
लहसुन |
25 |
27 |
आगरा |
लहसुन |
28 |
30 |
आगरा |
लहसुन |
– |
|
आगरा |
नींबू |
90 |
– |
आगरा |
कटहल |
18 |
16 |
आगरा |
अदरक |
20 |
– |
आगरा |
अनन्नास |
30 |
– |
आगरा |
तरबूज |
7 |
10 |
आगरा |
आम |
50 |
65 |
वाराणसी |
प्याज |
7 |
9 |
वाराणसी |
प्याज |
10 |
11 |
वाराणसी |
प्याज |
14 |
– |
वाराणसी |
प्याज |
11 |
12 |
वाराणसी |
प्याज |
13 |
– |
वाराणसी |
लहसुन |
14 |
– |
वाराणसी |
लहसुन |
8 |
12 |
वाराणसी |
लहसुन |
15 |
25 |
वाराणसी |
लहसुन |
25 |
35 |
वाराणसी |
लहसुन |
35 |
40 |
गुवाहाटी |
प्याज |
12 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज |
16 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज |
18 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज |
18 |
– |
गुवाहाटी |
लहसुन |
32 |
– |
गुवाहाटी |
लहसुन |
39 |
– |
गुवाहाटी |
लहसुन |
47 |
– |
गुवाहाटी |
अदरक |
46 |
51 |
गुवाहाटी |
अदरक |
33 |
40 |
गुवाहाटी |
आलू |
12 |
– |
गुवाहाटी |
आलू |
11 |
– |
गुवाहाटी |
निंबू |
48 |
– |
गुवाहाटी |
तरबूज |
13 |
15 |
नासिक |
प्याज |
4 |
5 |
नासिक |
प्याज |
5 |
6 |
नासिक |
प्याज |
7 |
9 |
नासिक |
प्याज |
12 |
– |
पटना |
टमाटर |
15 |
18 |
पटना |
आलू |
10 |
12 |
पटना |
लहसुन |
10 |
– |
पटना |
लहसुन |
26 |
– |
पटना |
लहसुन |
32 |
– |
पटना |
तरबूज |
18 |
– |
पटना |
कटहल |
25 |
– |
पटना |
अंगूर |
60 |
– |
पटना |
खरबूज |
26 |
– |
पटना |
सेब |
65 |
– |
पटना |
अनार |
95 |
– |
पटना |
हरी मिर्च |
20 |
– |
पटना |
करेला |
25 |
– |
पटना |
ककड़ी |
12 |
– |
पटना |
कद्दू |
8 |
– |
कोचीन |
अनन्नास |
30 |
– |
कोचीन |
अनन्नास |
29 |
– |
कोचीन |
अनन्नास |
36 |
– |
अब नलकूप खनन पर किसानों को मिलेगा 75% का अनुदान
किसानों को मदद पहुंचाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से नलकूप खनन योजना चलाई जा रही है और इस योजना के अंतर्गत किसानों को नलकूप के खनन हेतु 75% तक का अनुदान दिया जा रहा है।
नलकूप खनन योजना का लाभ प्रदेश के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति के किसान उठा सकते हैं। इसके अलावा सामान्य वर्ग के किसानों को अलग योजना के तहत लाभ दिया जाता है। वर्तमान में यह योजना इंदौर और शाजापुर जिले को छोड़कर पूरे राज्य में लागू है।
इस योजना में सफल या असफल नलकूप खनन पर 75% राशि राज्य सरकार द्वारा मिल जाती है। इसके अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा अधिकतम 25000 रूपये की राशि दी जाती है। इसके अलावा सफल नलकूप पर पंप लगाने हेतु भी 75 प्रतिशत की राशि किसान की दो जाती है। इसके अंतर्गत अधिकतम 15000 हजार रूपये की राशि राज्य सरकार देती है।
स्रोत: कृषि जागरण
Shareकृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए रोजाना पढ़ते रहें ग्रामोफ़ोन के लेख। इस लेख को शेयर बटन के माध्यम से अपने दोस्तों के साथ साझा करें।
खस की खेती से किसान बना लखपति, सालाना 20 लाख की कमाई
किसानों के लिए खेती करना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। अक्सर बदलते मौसम की वजह से किसान भाईयों को नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार तो बाढ़ या सूखे की वजह से भी फसल बर्बाद हो जाती है। ऐसी मुश्किलों से जूझ रहे किसानों के लिए मेघराज प्रसाद प्रेरणास्त्रोत बन चुके हैं।
बिहार राज्य के कररिया गांव के निवासी मेघराज प्रसाद ने खस की खेती कर एक मिसाल पेश की है। मेघराज ने बताया कि वे हमेशा से ही कृषि क्षेत्र में कुछ अलग करना चाहते थे। अपने सपने को साकार करने के लिए उन्होंने हिमाचल के एक मित्र से औषधीय पौधों के बारे में जानकारी हासिल की। जहां मित्र से उन्हें खस के बारे में पता चला।
खस की खेती करने के उद्देश्य से उन्होंने लखनऊ के सीमैप रिसर्च सेंटर जाकर ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग के बाद सेंटर से ही 20 हजार रूपए के 10 हजार खस के बीज खरीदे। मेघराज ने बताया कि शुरूआत में उन्होंने सिर्फ एक बीघे में ही खेती की। जहां उन्हें उम्मीद से ज्यादा यानि एक लाख रूपए की आमदनी हुई। इसके बाद उन्होंने 20 बीघे में खेती करके बंपर मुनाफा कमाया। अब आलम यह है कि मेघराज 20 एकड़ जमीन पर खस की खेती कर सलाना 20 लाख की कमाई कर रहे हैं।
मेघराज बताते हैं कि खस को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं पड़ती है। इसके अलावा बारिश की अधिकता से भी यह फसल प्रभावित नहीं होती है। कहने का मतलब ये है कि खस की फसल हर विषम परिस्थिति में फलती-फूलती है। इसके साथ ही इस फसल को जानवरों से भी कोई नुकसान नहीं है। ऐसे में खस की खेती के लिए किसान भाईयों को बाढ़, सूखा और जानवरों से कोई डर नहीं है।
बता दें कि खस का उपयोग खासकर इत्र बनाने में किया जाता है। जिस कारण इसकी बाजार में मांग काफी ज्यादा है। वहीं इसके पौधे की जड़ से सुंगधित तेल निकाला जाता है। इसके अलावा खस का प्रयोग साबुन, सुंगधित प्रसाधन सामग्री बनाने में किया जाता है। ऐसे में आप भी खस की खेती के जरिए कम लागत के साथ लाखों रूपए का कमा सकते हैं।
स्रोत: गांव कनेक्शन
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👉🏻किसान भाइयों, डीकम्पोजर एक प्रकार का जैव उर्वरक है जो मृदा की उर्वरा शक्ति सुधारने का कार्य करता है।
👉🏻जब खेत में से फसल की कटाई हो चुकी हो तब इसका उपयोग करना चाहिए।
👉🏻किसान भाई पाउडर के रूप में डीकम्पोजर 4 किलो प्रति एकड़ की दर से खेत की मिट्टी या गोबर में मिलाकर भुरकाव कर सकते हैं।
👉🏻भुरकाव के बाद खेत में थोड़ी नमी की मात्रा बनाएं रखें। छिड़काव के 10 से 15 दिनों के बाद कपास की फसल की बुवाई कर सकते हैं।
👉🏻चूंकि ये सूक्ष्म जीव पुरानी फसलों के अवशेषों को खाद में बदलने का काम करते हैं, इसलिए इनकी पाचन प्रक्रिया एनएरोबिक से एरोबिक में बदल जाती है, जो रोगकारक एवं हानिकारक जीवों को नष्ट कर देती है।
👉🏻जैव संवर्धन और एंजाइमी कटैलिसीस की सहक्रियात्मक क्रिया के द्वारा पुराने अवशेषों को स्वस्थ, समृद्ध, पोषक-संतुलित खाद में बदल देती है।
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कई राज्यों में तेज बारिश की संभावना, देखें मौसम पूर्वानुमान
कल दिल्ली के कुछ भागों में हल्के ओले गिरे तथा कुछ स्थानों पर हल्की आंधी के साथ बारिश देखी गई। राजस्थान पंजाब हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश में भी यही स्थिति बनी रही। अब धीरे-धीरे उत्तर भारत में मौसम साफ होने लगेगा तथा तापमान में बढ़ोतरी भी संभव है। बंगाल की खाड़ी में एक निम्न दबाव बन सकता है जो धीरे-धीरे और सशक्त होगा। पूर्वी उत्तर पूर्वी भारत सहित दक्षिण भारत में तेज बारिश के आसार।
स्रोत: स्काइमेट वेदर
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