मंडी |
फसल |
न्यूनतम मूल्य (किलोग्राम में) |
अधिकतम मूल्य (किलोग्राम में) |
रतलाम |
आलू |
16 |
– |
रतलाम |
पपीता |
10 |
14 |
रतलाम |
हरी मिर्च |
22 |
– |
रतलाम |
तरबूज |
8 |
10 |
रतलाम |
खरबूजा |
12 |
14 |
रतलाम |
टमाटर |
35 |
38 |
रतलाम |
केला |
20 |
– |
रतलाम |
आम |
30 |
– |
रतलाम |
आम |
30 |
– |
जयपुर |
अनन्नास |
60 |
65 |
जयपुर |
कटहल |
18 |
– |
जयपुर |
नींबू |
45 |
– |
जयपुर |
आम |
45 |
52 |
जयपुर |
आम |
35 |
– |
जयपुर |
नींबू |
45 |
– |
जयपुर |
हरा नारियल |
36 |
38 |
जयपुर |
अदरक |
30 |
32 |
जयपुर |
आलू |
13 |
15 |
जयपुर |
तरबूज |
6 |
– |
जयपुर |
कच्चा आम |
25 |
– |
जयपुर |
लीची |
60 |
– |
जयपुर |
सेब |
105 |
– |
पटना |
टमाटर |
50 |
55 |
पटना |
आलू |
10 |
12 |
पटना |
लहसुन |
12 |
– |
पटना |
लहसुन |
28 |
– |
पटना |
लहसुन |
36 |
– |
पटना |
तरबूज |
18 |
– |
पटना |
कटहल |
20 |
– |
पटना |
अंगूर |
55 |
– |
पटना |
खरबूजा |
16 |
– |
पटना |
सेब |
95 |
100 |
पटना |
अनार |
95 |
100 |
पटना |
हरी मिर्च |
25 |
– |
पटना |
करेला |
30 |
– |
पटना |
खीरा |
7 |
– |
पटना |
कद्दू |
8 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
11 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
12 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
13 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
11 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
12 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
13 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
14 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
11 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
16 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
17 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
19 |
– |
गुवाहाटी |
लहसुन |
20 |
25 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
28 |
34 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
34 |
38 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
38 |
42 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
20 |
25 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
27 |
33 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
34 |
38 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
38 |
42 |
रतलाम |
लहसुन |
8 |
12 |
रतलाम |
लहसुन |
13 |
15 |
रतलाम |
लहसुन |
16 |
24 |
रतलाम |
लहसुन |
25 |
29 |
मंदसौर |
लहसुन |
6 |
11 |
मंदसौर |
लहसुन |
12 |
14 |
मंदसौर |
लहसुन |
15 |
22 |
मंदसौर |
लहसुन |
23 |
27 |
जयपुर |
प्याज़ |
11 |
12 |
जयपुर |
प्याज़ |
13 |
14 |
जयपुर |
प्याज़ |
15 |
16 |
जयपुर |
प्याज़ |
4 |
5 |
जयपुर |
प्याज़ |
6 |
7 |
जयपुर |
प्याज़ |
8 |
9 |
जयपुर |
प्याज़ |
10 |
11 |
जयपुर |
लहसुन |
12 |
15 |
जयपुर |
लहसुन |
18 |
22 |
जयपुर |
लहसुन |
28 |
35 |
जयपुर |
लहसुन |
38 |
45 |
जयपुर |
लहसुन |
10 |
12 |
जयपुर |
लहसुन |
15 |
18 |
जयपुर |
लहसुन |
22 |
25 |
जयपुर |
लहसुन |
30 |
35 |
पटना |
प्याज़ |
9 |
11 |
पटना |
प्याज़ |
12 |
13 |
पटना |
प्याज़ |
15 |
– |
पटना |
प्याज़ |
9 |
11 |
पटना |
प्याज़ |
12 |
13 |
पटना |
प्याज़ |
15 |
– |
पटना |
लहसुन |
20 |
25 |
पटना |
लहसुन |
30 |
33 |
पटना |
लहसुन |
35 |
36 |
रतलाम |
प्याज़ |
3 |
4 |
रतलाम |
प्याज़ |
5 |
7 |
रतलाम |
प्याज़ |
8 |
9 |
रतलाम |
लहसुन |
4 |
8 |
रतलाम |
लहसुन |
9 |
20 |
रतलाम |
लहसुन |
22 |
32 |
रतलाम |
लहसुन |
34 |
58 |
कानपुर |
प्याज़ |
5 |
6 |
कानपुर |
प्याज़ |
8 |
– |
कानपुर |
प्याज़ |
9 |
11 |
कानपुर |
प्याज़ |
13 |
– |
कानपुर |
लहसुन |
5 |
– |
कानपुर |
लहसुन |
23 |
– |
कानपुर |
लहसुन |
30 |
32 |
कानपुर |
लहसुन |
38 |
40 |
आगरा |
आलू |
21 |
– |
आगरा |
बैंगन |
25 |
30 |
आगरा |
हरी मिर्च |
40 |
– |
आगरा |
भिन्डी |
15 |
– |
आगरा |
शिमला मिर्च |
30 |
– |
आगरा |
आम |
70 |
– |
आगरा |
टमाटर |
25 |
30 |
आगरा |
नींबू |
25 |
– |
विजयवाडा |
टमाटर |
45 |
– |
विजयवाडा |
करेला |
60 |
– |
विजयवाडा |
लौकी |
20 |
– |
विजयवाडा |
बैंगन |
40 |
– |
विजयवाडा |
पत्ता गोभी |
25 |
– |
विजयवाडा |
शिमला मिर्च |
55 |
– |
विजयवाडा |
गाजर |
50 |
– |
विजयवाडा |
फूलगोभी |
45 |
– |
विजयवाडा |
कोलोकेशिया |
50 |
– |
विजयवाडा |
खीरा |
30 |
– |
विजयवाडा |
अदरक |
120 |
140 |
विजयवाडा |
हरी मिर्च |
40 |
45 |
विजयवाडा |
भिन्डी |
35 |
– |
विजयवाडा |
आलू |
20 |
– |
कोलकाता |
आलू |
20 |
– |
कोलकाता |
अदरक |
34 |
– |
कोलकाता |
तरबूज |
16 |
– |
कोलकाता |
अनन्नास |
45 |
55 |
कोलकाता |
सेब |
135 |
145 |
कोलकाता |
आम |
50 |
60 |
कोलकाता |
लीची |
40 |
50 |
राज्य के लाखों किसानों का बिजली बिल हुआ शून्य
राजस्थान सरकार ने राज्य के बिजली उपभोक्ताओं और किसानों को राहत पहुंचाने के लिए एक विशेष योजना लागू की है। ‘मुख्यमंत्री किसान मित्र ऊर्जा योजना’ के माध्यम से लाखों उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य किया गया है। इसके साथ राज्य के सामान्य श्रेणी ग्रामीण ब्लॉक आवर सप्लाई कृषि उपभोक्ताओं को हर महीने 1 हजार रूपए का अनुदान दिया जा रहा है।
राज्य के मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार बजट 2022 में 118 लाख घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली की दरों में अनुदान दिया जाएगा। इसके अनुसार लगभग 40 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को अप्रैल व मई 2022 में 310 करोड़ रूपए की अनुदान राशि जारी की गई है।
योजना के अंतर्गत 1 अप्रैल से 50 यूनिट प्रतिमाह इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को शून्य राशि बिल जारी किया जाएगा। इसके माध्यम से राज्य के 13.42 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को लाभ प्राप्त होगा। इसके लिए सरकार की ओर से लगभग 79 करोड़ रूपए की अतिरिक्त अनुदान राशि जारी की गई है। इसके चलते उपभोक्ताओं को बिजली बिल नहीं चुकाना पड़ेगा।
स्रोत: किसान समाधान
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चने को समर्थन मूल्य पर मिल रहा बढ़िया भाव, जानें बिक्री की अंतिम तिथि
समर्थन मूल्य पर फसल बेचकर किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। वहीं मंडियों में समर्थन मूल्य पर चना खरीद का काम भी रफ्तार पर चल रहा है। हालांकि जिन किसानों का पंजीयन नहीं हुआ है, वे इसके लाभ से वंचित हैं। इन किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने समर्थन मूल्य पर चना खरीद की तारीख 7 जून से 29 जून कर दी है।
इसके तहत अब किसान भाई पंजीयन करवाकर 29 जून तक अपनी उपज को समर्थन मूल्य पर बेच सकते हैं। इसके अलावा राज्य सरकार ने चना खरीद की सीमा को बढ़ाकर 25 क्विंटल से 40 क्विंटल कर दिया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इसका लाभ उठा सकें। सरकार द्वारा की जा रही चने की सरकारी खरीद का भुगतान किसानों को JIT पोर्टल के जरिए दिया जा रहा है।
इसके साथ ही अगर किसी कारण से 72 घंटे के भीतर भुगतान प्राप्त न हो तो, किसान भाई ऑनलाइन पोर्टल http://www.jit.nic.in/PFMS/Default.aspx के माध्यम से भुगतान की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। बता दें कि इस साल चने की खरीद 5230 रूपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य पर की जा रही है। तो जल्द ही बिना समय गंवाएं इस योजना का लाभ उठाएं।
स्रोत: किसान समाधान
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देश के प्रमुख मंडियों में 6 जून को क्या रहे लहसुन के भाव?
लहसुन भाव में कितनी तेजी या मंदी देखने को मिल रही है? वीडियो के माध्यम से देखें अलग अलग मंडियों में क्या चल रहा है लहसुन का भाव !
स्रोत: ऑल इनफार्मेशन
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गेहूँ भाव में तेजी जारी, देखें 6 जून को देश के प्रमुख मंडियों के भाव
गेहूँ भाव में कितनी तेजी या मंदी देखने को मिल रही है? वीडियो के माध्यम से देखें अलग अलग मंडियों में क्या चल रहा है गेहूँ का भाव !
स्रोत: आज का सोयाबीन भाव
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सोयाबीन में बीज उपचार कर स्वस्थ फसल पाएं
👉🏻किसान भाइयों, सोयाबीन की फसल में बुवाई से पहले बीजों का उपचार करना बहुत आवश्यक होता है।
👉🏻सोयाबीन की फसल में बीज उपचार जैविक एवं रसायनिक दोनों विधियों से किया जा सकता है।
👉🏻सोयाबीन में बीज उपचार फफूंदनाशी एवं कीटनाशी दोनों से किया जाता है।
👉🏻फफूंदनाशी से बीज उपचार करने के लिए करमानोवा (कार्बेन्डाजिम 12% + मैनकोज़ेब 63% डब्ल्यूपी) @ 2.5 ग्राम/किलो बीज या वीटा वैक्स अल्ट्रा (कार्बोक्सिन 17.5%+ थायरम 17.5% एफएफ) @ 2.5 मिली/किलो बीज या कॉम्बैट (ट्रायकोडर्मा विरिडी) @ 5-10 ग्राम/किलो बीज की दर से उपचारित करें।
👉🏻कीटनाशी से बीज उपचार करने के लिए थायो नोवा सुपर (थायोमिथोक्साम 30% एफएस) @ 4 मिली/किलो बीज या गौचो (इमिडाक्लोरोप्रिड 48% एफएस) @ 1.25 मिली/किलो बीज से बीज उपचार करें।
👉🏻सोयाबीन फसल में नाइट्रोज़न स्थिरीकरण को बढ़ाने के लिए राइजोबियम [जैव वाटिका -आर सोया] @ 5 ग्राम किलो बीज से उपचारित करें।
👉🏻फफूंदनाशी से बीज उपचार करने से सोयाबीन उकठा रोग, जड़ सड़न रोग से सुरक्षित रहती है।
बीज का अंकुरण सही ढंग से होता है अंकुरण प्रतिशत बढ़ता है, फसल का प्रारंभिक विकास समान रूप से होता है।
👉🏻राइज़ोबियम से बीज़ उपचार सोयाबीन की फसल की जड़ो में गाठो (नॉड्यूलेशन) को बढ़ाता है एवं अधिक नाइट्रोज़न का स्थिरीकरण करती है।
👉🏻कीटनाशकों से बीज उपचार करने से मिट्टी जनित कीटो जैसे-सफ़ेद ग्रब, चींटी, दीमक आदि से सोयाबीन की फसल की रक्षा होती है।
👉🏻प्रतिकूल परिस्थितियों (कम/उच्च नमी) में भी अच्छी फसल प्राप्त होती है।
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कुछ क्षेत्रों में बारिश तो कुछ में है बारिश का इंतजार, देखें मौसम पूर्वानुमान
दक्षिण भारत में मानसून की गतिविधियां अभी भी कमजोर बनी हुई है। दक्षिण कर्नाटक सहित उत्तरी तमिलनाडु में तेज बारिश हो सकती है। शेष दक्षिण भारत में अगले 1 सप्ताह तक भारी बारिश का अनुमान कम है। पूर्वोत्तर राज्यों में मानसून एक्टिव बना रहेगा तथा अच्छी बारिश जारी रहेगी। उत्तर पश्चिम और मध्य भारत के अधिकांश भागों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी रह सकता है।
स्रोत: स्काइमेट वेदर
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अगले हफ्ते किन फसलों के भाव में आएगी तेजी, देखें विशेषज्ञ समीक्षा
वीडियो के माध्यम से जानें आने वाले दिनों में किस फसल के भाव में आ सकती है तेजी।
वीडियो स्रोत: मार्केट टाइम्स टीवी
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ग्रीष्मकालीन मूंग की कटाई एंव गहाई
👉🏻मूंग की फसल 65-70 दिन में पक जाती है। अर्थात मार्च- अप्रैल माह में बोई गई फसल मई-जून माह में कटाई के लिए तैयार हो जाती है।
👉🏻फलियाँ पक कर, हल्के भूरे रंग की अथवा काली होने पर कटाई योग्य हो जाती है।
👉🏻पौधें में फलियाँ असमान रूप से पकती हैं, यदि पौधे की सभी फलियों के पकने की प्रतीक्षा की जाये तो ज्यादा पकी हुई फलियाँ चटकने लगती है। अतः फलियों की तुड़ाई हरे रंग से काला रंग होते ही 2-3 बार में कर लें और बाद में फसल को पौधें के साथ काट लें।
👉🏻अपरिपक्वास्था में फलियों की कटाई करने से दानों की उपज एवं गुणवत्ता दोनों खराब हो जाते हैं।
👉🏻हॅंसिए से फसल काटकर खेत में एक दिन सुखाने के उपरान्त खलियान में लाकर सुखाते है। सुखाने के उपरान्त डंडे से पीट कर या थ्रेसर का उपयोग कर गहाई कार्य किया जा सकता है।
👉🏻फसल अवशेष को रोटावेटर चलाकर भूमि में मिला दें ताकि यह हरी खाद का काम करें। इससे मृदा में लगभग 10 से 12 किलो प्रति एकड़ नाइट्रोजन की पूर्ति आगामी फसल के लिए हो जाती है।
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खीरे में पर्ण सुरंगक (लीफ माइनर) कीट के रोकथाम के उपाय
👉🏻किसान भाइयों लीफ माइनर कीट के शिशु कीट बहुत छोटे, पैर विहीन, पीले रंग के व प्रौढ़ कीट हल्के पीले रंग के होते है।
👉🏻इसकी क्षति के लक्षण सबसे पहले पत्तियों पर दिखाई देते है।
👉🏻इस कीट का इल्ली पत्तियों के अंदर प्रवेश कर हरित पदार्थ को खाकर सुरंग बनाते हैं। जिसके कारण पत्तियों पर सफेद लकीरें दिखाई देती है।
👉🏻प्रभावित पौधे पर फल कम लगते है और पत्तियां समय से पहले गिर जाती है। पौधों की बढ़वार रुक जाती है एवं पौधे छोटे रह जाते है।
👉🏻इस कीट के आक्रमण के कारण पौधों की प्रकाश संश्लेषण क्रिया भी प्रभावित होती है।
👉🏻इस कीट के नियंत्रण के लिए अबासीन (एबामेक्टिन 1.9 % ईसी) @ 150 मिली या ट्रेसर (स्पिनोसेड 45% एससी) @ 60 मिली या बेनेविया (सायनट्रानिलीप्रोल 10.26% ओडी) @ 250 मिली प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
👉🏻जैविक उपचार के लिए बवे कर्ब (बवेरिया बेसियाना) @ 500 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
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