मल्टीलेयर खेती करने से किसानों को मिलेंगे कई फायदे

Multilayer Farming
  • मल्टीलेयर खेती के अंतर्गत एक ही खेत में एक ही मौसम में एक साथ बहुत सी फसलें लगायी जाती है। खेती की इस तकनीक को मल्टीलेयर खेती कहते हैं।

  • मल्टीलेयर खेती के लिए किसान पहले जमीन में ऐसी फसल लगाएं, जो कि भूमि के अंदर उगती है। इसके बाद उसी भूमि में सब्जी और फलदार पौधे लगा सकते हैं।

  • इन फसलों के अलावा छायादार और फलदार वृक्ष भी लगा सकते हैं। इस तकनीक से किसान कम भूमि में भी एक से अधिक फसल की खेती कर सकता है।

  • मल्टी लेयर फार्मिंग में एक ही खेत में एक साथ चार से पांच फसल आसानी से लगाई जा सकती है।

  • मल्टीलेयर खेती में किसान कम भूमि में अधिक खेती करके अधिक लाभ कमा सकते हैं।

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कपास की बुआई से पहले सफेद लट्ट का कर दें खेत से खात्मा

What are the measures to control the white grub before sowing of cotton crop

  • सफ़ेद ग्रब सफेद रंग का कीट हैं जो खेत में सुप्तावस्था में ग्रब के रूप में रहता है।

  • आमतौर पर प्रारंभिक रूप में ये जड़ों में नुकसान पहुंचाते हैं।

  • सफेद ग्रब के प्रकोप के लक्षण कपास के पौधे पर देखे जा सकते हैं, जैसे कि कपास के पौधे का एकदम से मुरझा जाना, पौधे की बढ़वार रूक जाना और बाद में पौधे का मर जाना इसका मुख्य लक्षण है।

  • इस इस कीट का नियंत्रण जून माह में और जुलाई के शुरुआती सप्ताह में कर लेना चाहिए। इसके लिए मेट्राजियम (kalichakra) 2 किलो + 50-75 किलो FYM/कम्पोस्ट के साथ मिलाकर प्रति एकड़ की दर से खाली खेत में भुरकाव करें।

  • लेकिन यदि कपास की फसल की प्रारम्भिक अवस्था में भी इस कीट का प्रकोप दिखाई दे रहा हो तो सफेद ग्रब के नियंत्रण के लिए रासायनिक उपचार भी किया जा सकता है।

  • इसके लिए फेनप्रोप्रेथ्रिन 10% EC @ 500 मिली/एकड़, क्लोथियानिडिन 50.00% WG @ (डोन्टोटसु) 100 ग्राम/एकड़ को मिट्टी में मिला कर उपयोग करें।

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लहसुन के भंडारण में इन बातों का रखेंगे ध्यान तो उपज को नहीं होगा कोई नुकसान

storage of garlic

बहुत सारे किसान लहसुन की उपज प्राप्ति के बाद इसे बेचने के बजाय इसका भंडारण कर के रखना चाहते हैं ताकि जब लहसुन के रेट बढे तब वे इसका अच्छा दाम ले सकें। पर भंडारण करने में भी किसानों को कई बातों का ध्यान रखने की जरूरत है। अगर इन बातों का ख्याल नहीं रखा जाए तो आप लहसुन का लंबे समय तक स्वस्थ भंडारण कर पाएंगे। विस्तृत जानकारी के लिए देखें वीडियो।

वीडियो स्रोत: यूट्यूब

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मूंग की फसल में ऐन्थ्रेक्नोज धब्बा रोग की पहचान एवं बचाव के उपाय

Identification and prevention measures of Anthracnose spot in Green gram crop
  • एन्थ्रेक्नोज धब्बा रोग के संक्रमण के कारण मूंग बीज के अंकुरण के तुरंत बाद पौध झुलस जाती है।

  • पत्तियों और फलियों पर गोल, गहरे, काले केंद्र युक्त चमकीले लाल नारंगी रंग के धब्बे हो जाते हैं।

  • रोगज़नक़ बीज और पौधे के अवशेष पर जीवित रहता है।

  • रोग वायु-जनित बीजाणु के माध्यम से क्षेत्र में फैलता है।

  • प्रभावित पौधे के अवशेष को हटा दें और नष्ट कर दें।

  • खेतों को साफ रखे एवं उचित फसल चक्र अपनाकर बीमारी के फैलने से रोकें।

  • बीजों को कार्बेन्डाजिम 12% + मैनकोज़ेब 63% WP से 2.5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें।

  • इस रोग के निवारण के लिए मैनकोज़ेब 75% WP@ 500 ग्राम/एकड़ या क्लोरोथालोनिल 75% WP@ 300 ग्राम/एकड़ या हेक्साकोनाज़ोल 5% SC@ 300 मिली/एकड़ की दर से छिड़काव करें।

  • जैविक उपचार के रूप में स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस@ 250 ग्राम/एकड़ या ट्राइकोडर्मा विरिड@ 500 ग्राम /एकड़ के रूप में उपयोग करें।

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कई विशेष गुणों वाले मिर्च के इन उन्नत किस्म के बीजों की करें खेती

Advanced varieties of chilies and their properties

सीजेंटा HPH 12: इसके पौधे मजबूत होते हैं, पार्श्व शाखाओं के साथ इनके पौधों की ऊंचाई में 80-110 सेमी होती है। इसकी पहली फल परिपक्वता 50-55 दिनों में होती है। इसके फल चिकने, हरे रंग के होते हैं, जो परिपक्वता के समय आकर्षक गहरे लाल रंग के हो जाते हैं। फलों की औसत लंबाई 7-8 सेमी व मोटाई 1 सेंटीमीटर होती है। इनमे अच्छी सुगंध के साथ उच्च तीखापन होता है और ये आयात निर्यात के लिए उपयुक्त होते हैं।

स्टार फील्ड 9211 एवं स्टार फील्ड शार्क-1: इनकी पत्तियां मोटी होती हैं। इस किस्म की पहली फल परिपक्वता 60-65 दिनों में होती है, फलों का रंग गहरा हरा, परिपक्व फलों का रंग गहरा लाल होता है, फल की लम्बाई 8-9 सेंटीमीटर होती है एवं फल की मोटाई 0.8-1.0 सेंटीमीटर होती है। इस किस्म में तीखापन बहुत अधिक होता है। इस किस्म का फल सुखाकर बेचने के लिए उपयुक्त होता है। यह कवक जनित रोगों के लिए प्रतिरोधी होते हैं।

US एग्री 720: इस किस्म की पहली फल परिपक्वता 60-65 दिनों में होती है, फलों का रंग गहरा हरा, परिपक्व फलों का रंग गहरा लाल होता है, फल की लम्बाई 18-20 सेंटीमीटर व मोटाई 1-2 सेंटीमीटर होती है। इस किस्म में तीखापन बहुत अधिक होता है और फल का वजन अच्छा होता है।

नुनहेम्स इन्दु 2070: इस किस्म के पौधे उत्कृष्ट माध्यमिक शाखाओं के साथ मज़बूत होते है एवं इसकी पहली फल परिपक्वता 50-55 दिनों में हो जाती है। इसके फल का रंग चमकीला होता है वहीं फल की लम्बाई 8-10 सेंटीमीटर व मोटाई 0.8-1.0 सेंटीमीटर होती है। इस किस्म में तीखापन बहुत अधिक होता है। इस किस्म का फल सुखाकर बेचने के लिए उपयुक्त होता है।

एडवांटा AK-47: इस किस्म में पौधा आधा सीधा होता है, पहली फल परिपक्वता 60-65 दिनों में होती है, फल का रंग गहरा लाल एवं गहरा हरा होता है, लंबाई 6-8 सेंटीमीटर एवं मोटाई 1.1-1.2 सेंटीमीटर होती है। इस किस्म में तीखापन बहुत अधिक होता है, इसके फल को गिला एवं सुखाकर दोनों प्रकार से बेचा जा सकता है। यह किस्म लीफ कर्ल वायरस के लिए प्रतिरोधी होती है।

BASF आर्मर: इस किस्म में पौधा आधा सीधा व मजबूत होता है। इसकी पहली फल परिपक्वता 50-55 दिनों में होती है, फल का सतह भाग अर्द्ध झुर्रीदार होते हैं, ताज़े हरे फल की तुड़ाई 8-10 दिनों के अंतराल से होती रहती है एवं फल की मोटाई लंबाई 9X1 सेंटीमीटर होती है। इस किस्म में तीखापन बहुत अधिक होता है, यह लाल सुर्ख करके बेची जाती है। यह किस्म लीफ कर्ल वायरस के लिए प्रतिरोधी होती है।

दिव्या शक्ति (शक्ति-51): इस किस्म में पौधा मजबूत और अधिक शाखाओं वाला होता है। इस किस्म की पहली फल परिपक्वता 42-50 दिनों में हो जाती है, फल का रंग गहरा हरा होता है, लंबाई 6-8 सेंटीमीटर व मोटाई 0.7-0.8 सेंटीमीटर होती है। इस किस्म में तीखापन अधिक होता है, यह अत्यधिक गर्म और गहरे लाल रंग की होती है। इसके फल सूखने पर इसे बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। यह किस्म लीफ कर्ल वायरस के लिए 100% प्रतिरोधी होती है।

हु वाज सानिया 03: इस किस्म में पौधा सीधा एवं पहली फल परिपक्वता 50-55 दिनों में हो जाती है। इसके परिपक्व फल लाल एवं अपरिपक्व फल पीले-हरे होते हैं। फल की लम्बाई 15-17 सेंटीमीटर एवं मोटाई 0.3 MM होती है। इस किस्म में तीखापन अधिक होता है और यह किस्म सुखाने के लिए उपयुक्त होती है।

कृषि एवं कृषि उत्पादों से सम्बंधित ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए रोजाना पढ़ते रहें ग्रामोफ़ोन के लेख। उपर्युक्त बताये गए बीजों की खरीदी के लिए एप के बाजार विकल्प पर जाएँ।

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मूंग की फसल में फली छेदक की रोकथाम कैसे करें?

Control of fruit borer in green gram crop
  • फली छेदक या पोड बोरर मूंग की फसल का प्रमुख कीट है जो फसल को भारी नुकसान पहुंचाता है।

  • यह कीट मूंग की फसल की फलियों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाता है। यह मूंग की फली में छेद करके दाने को खाकर बहुत नुकसान पहुंचता है।

  • इसके नियंत्रण के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG @ 100 ग्राम/एकड़ या फ्लूबेण्डामाइड 39.35% SC @ 100 ग्राम/एकड़ या क्लोरानट्रानिलीप्रोल 18.5% SC @ 60 मिली/एकड़ की दर से छिड़काव करें।

  • जैविक उपचार के रूप में बवेरिया बेसियाना @ 250 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव करें।

अपने मूंग व अन्य फसलों के खेत को ग्रामोफ़ोन एप के मेरे खेत विकल्प से जोड़ें और पूरे फसल चक्र में पाते रहें स्मार्ट कृषि से जुड़ी सटीक सलाह व समाधान। इस लेख को नीचे दिए गए शेयर बटन से अपने मित्रों संग साझा करें।

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लवणीय मिट्टी के कारण खेत की उपज क्षमता पर पड़ता है बुरा असर

Saline soil affects the yield potential of the farm
  • जिस मिट्टी में घुलनशील लवणों की अधिकता होती है उसे लवणीय मिट्टी कहा जाता है।

  • लवणीय मिट्टी के कारण बीज का अंकुरण एवं पौधे का विकास बहुत प्रभावित होता है।

  • इस तरह की मिट्टी की सतह पर कैल्शियम, मैग्नीशियम व पोटेशियम के क्लोराइड एवं सल्फेट आयन अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में पाये जाते हैं।

  • लवणीय मिट्टी में अधिक मात्रा में जल ग्रहण की समस्या होती है।

  • सामान्य तौर पर लवणीय मिट्टी में ऊपरी सतह पर सफेद पपड़ी बन जाती है।

  • लवणीय मिट्टी के कारण पौधों के विकास एवं उपज पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

अपने खेत की मिट्टी की समस्याओं को पहचानें और पाएं निदान के उपाय, सुपर फसल प्रोग्राम से करवाएं मिट्टी परीक्षण।

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बीटी कपास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी, गुण एवं विशेषताएं

Important information properties and characteristics related to BT cotton
  • बीटी कपास (BT cotton) एक आनुवांशिक संशोधित कपास है। यह मोनसेंटो नामक कम्पनी द्वारा उत्पादित है।

  • बीटी कपास अनुवांशिक परिवर्तित कपास की फसल है जिसमें बैसिलस थुरिंजिनिसिस बैक्टीरिया के एक या दो जीन फसल के बीज में आनुवंशिकीय अभियांत्रिकी तकनीक से डाल दिये गए है, जो पौधे के अन्दर क्रिस्टल प्रोटीन उत्पन्न करते हैं जिससे विषैला पदार्थ उत्पन्न होकर कीट को नष्ट कर देता है।

  • बीटी कपास कीट प्रतिरोधी किस्मे होती है।

  • बीटी कपास की फसल किसान द्वारा लगाई जाने पर फसल की लागत बहुत कम आती है।

उन्नत कृषि उत्पादों एवं कृषि से सम्बंधित अन्य सभी जानकारियों के लिए रोजाना पढ़ते रहें ग्रामोफ़ोन के लेख। कृषि उत्पादों की खरीदी के लिए ग्राम बाजार सेक्शन में जाएँ।

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हरी खाद का इस्तेमाल आपकी खेती और खेत दोनों के लिए है लाभकारी

Use of green manure is beneficial for both your farming and field
  • मिट्टी की उर्वरता एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिए हरी खाद का प्रयोग बहुत पहले से होता आ रहा है।

  • हालांकि कृषि कार्य के लिए फसलों के अंतर्गत क्षेत्रफल बढ़ने के कारण हरी खाद के प्रयोग में निश्चय ही कमी आई है।

  • गोबर की खाद जैसे अन्य कार्बनिक स्रोतों की सीमित आपूर्ति से आज हरी खाद का महत्व और भी बढ़ गया है।

  • हरी खाद के लिए उगाई जाने वाली फसल का चुनाव भूमि जलवायु तथा उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए।

  • हरी खाद भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

  • हरी खाद ऑर्गेनिक पदार्थों का बहुत अच्छा स्रोत होती है और यह ह्यूमस से भरपूर होती है।

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सब्जियों की पौध तैयार करते समय इन बातों का रखें ध्यान

How to prepare vegetable seedlings
  • अधिकतर सब्जी वाली फसलों की बुआई से पहले नर्सरी में पौध तैयार की जाती है जैसे कि टमाटर, गोभी, प्याज, मिर्च आदि।

  • इन फसलों के बीज़ छोटे व पतले होते हैं। इनकी स्वस्थ व उन्नत पौध तैयार कर लेना ही आधी फसल उगाने के बराबर होता है।

  • नर्सरी का स्थान ऊंचाई पर होना चाहिए जहां से पानी का निकास उचित हो एवं यह खुले स्थान में होना चाहिए जहां सूर्य की पहली किरण पहुंचे।

  • इसके लिए भूमि दुमट बलुई होनी चाहिए जिसका पीएच मान लगभग 6.5 हो।

  • नर्सरी की क्यारियाँ 15-20 से. मी. ऊँची उठी होनी चाहिए | इनकी चौड़ाई लगभग 1 मीटर तथा लंबाई 3 मीटर होनी चाहिए जो कि सुविधा के अनुसार घटाई-बढ़ाई जा सकती है |

  • बीज़ की बुआई के बाद समय समय पर क्यारियों की हल्की सिंचाई करते रहनी चाहिए।

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