Red Pumpkin Beetle in Bitter Gourd

करेला में लाल कीट का नियंत्रण:-

  • अंडे से निकले हुये ग्रब जड़ो, भूमिगत भागो एवं जो फल भूमि के संपर्क में रहते है उन्है खाता है|
  • उसके बाद ग्रसित जड़ो एवं भूमिगत भागों पर मृतजीवी फंगस का आक्रमण हो जाता है जिसके फलस्वरूप अपरिपक्वफल व लताएँ सुख जाती है|
  • इसमें ग्रसित फल उपयोग करने हेतु अनुपयुक्त होते है|
  • बीटल पत्तियों को खाकर छेद कर देते है |
  • पौध अवस्था में बीटल का आक्रमण होने पर मुलायम पत्तियों को खाकर हानि पहुचाते है जिसके कारण पौधे मर जाते है |

नियंत्रण:-

  • गहरी जुताई करने से भूमि के अन्दर उपस्थित प्यूपा या ग्रब ऊपर आ जाते है सूर्य की किरणों में मर जाते है |
  • बीजो के अंकुरण के बाद पौध के चारों तरफ भूमि में कारटाप हाईड्रोक्लोराईड 3 G दाने डाले|
  • बीटल को इकट्ठा करके नष्ट करें|
  • साईपरमेथ्रिन (25 र्इ.सी.) 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी + डायमिथोएट 30% ईसी. 2  मि.ली. प्रति लीटर पानी की दर से घोल बना कर छिडकाव करें। या कार्बारिल 50% WP 3 ग्राम प्रति ली पानी की दर से घोल बना दो छिड़काव करें। पहला छिडकाव रोपण के 15 दिन व दूसरा इसके 7 दिन बाद करें|

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Land Preparation of Chilli

मिर्च  के लिए खेत की  तैयारी:-

  • खेत की चार-बार जुताई करने के पश्चात पाटा चलाकर भूमि को नरम,भुरभुरी एवं समतल कर लेना चाहिये |
  • भूमि को तैयार करते समय 25 टन प्रति हेक्टेयर गोबर या कम्पोस्ट की पकी हुई खाद का प्रयोग करना  चाहिये |
  • फास्फोरस  एवं  पोटाश की पुरी मात्रा  और नाइट्रोजन की 25 से 33  प्रतिशत मात्रा का प्रयोग करना चाहिये |

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Suitable Soil for Chilli Production

मिर्च उत्पादन के लिए उपयुक्त मृदा (भूमि):-

  • सभी प्रकार की मिट्टी जहां से जल  निकास की व्यवस्था अच्छी हों की जा सकती हैं |
  • रेतीली दोमट मिट्टी सर्वोत्तम हैं |
  • अधिक क्षारीय व् अम्लीय भूमि उपयुक्त नहीं  हैं |  
  • भूमि का पी.एच. मान 6- 7 होना चाहिये |
  • अधिक लवणीय भूमि अंकुरण एवं बढवार को कम करता हैं |   

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Suitable Climate for Chilli

मिर्च के लिए उपयुक्त जलवायु :-

  • गर्म आद्र जलवायु में उष्णकटिबंधीय एवं क्षेत्रो  में ऊगाई जाती हैं |
  • 15-30  डिग्री से तापमान,मिर्च की खेती के लिए उपयुक्त है |
  • जहां पर औसत वार्षिक वर्षा- 1200 मि.मि. होते हे  वहा पर यह वर्षा आधारित फसल के रूप में उगाई जाती है |
  • अधिक गर्मी में फूल एवं फल झड जाते है |
  • प्रतिदिन 9-10 घंटे की धूप रहने पर फसल उत्पादन 21-24% तक बढ़ जाती हैं |

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Nutrient Management in Brinjal

बैगन में पोषक तत्व प्रबंधन:-

  • उर्वरक की मात्रा भूमि की उर्वरकता एवं फसल को दी गई कार्बनिक खाद की मात्रा पर निर्भर करती है|
  • फसल के अच्छे उत्पादन के लिए 20-25 टन पुर्णतः पकी हुई गोबर की खाद को खेत करते समय मिला देना चाहिए|
  • प्रायः खेत को तैयार करते समय 50 किलो यूरिया 350 किलो सिंगल सुपर फास्फेट एवं 100 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश को प्रति हेक्टेयर की दर से डालना चाहिए|
  • बची हुई 100 किलो यूरिया मात्रा को एक महीने के अंतराल से रोपाई के 3-4 सप्ताह बाद डालना चाहिए|
  • संकर किस्मों के लिए 200 किलो नाईट्रोजन, 100 किलो फास्फोरस एवं 100 किलो पोटाश की मात्रा अनुमोदित की गई है|

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Land Preparation For Tomato

टमाटर  के लिए खेत की  तैयारी:-

  • खेत की चार-बार जुताई करने के पश्चात पाटा चलाकर भूमि को नरम, भुरभुरी एवं समतल कर लेना चाहिये |
  • भूमि को तैयार करते समय 25 टन प्रति हेक्टेयर गोबर या कम्पोस्ट की पकी हुई खाद का प्रयोग करना चाहिये |
  • फास्फोरस एवं  पोटाश की पुरी मात्रा  और नाइट्रोजन की 25 से 33  प्रतिशत मात्रा का प्रयोग करना चाहिये |

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Nutrient Management in Watermelon

तरबूज में पोषक तत्व प्रबंधन:-

  • खेत की तैयारी करते समय 25-30 टन गोबर की खाद में मिलना चाहिये|
  • अंतिम जुताई के समय 75 किलो यूरिया, 200 किलो SSP एवं 75 किलो पोटाश की मात्रा खेत में मिलाये|
  • शेष बचे हुए 75 किलो यूरिया की मात्रा को खेत में दो से तीन बार में बराबर भागों में बांटकर डाले|
  • फास्फोरस, पोटाश की सम्पूर्ण मात्रा नाईट्रोजन की एक तिहाई मात्रा को बनाये गए|

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Time of sowing of Bottle Gourd

लौकी की बुआई का समय:-

  • लौकी फसल को जनवरी से मार्च एवं सितम्बर एवं दिसम्बर के मध्य सफलतापूर्वक लगाया जाता है|
  • बारिश आधारित वाले क्षेत्रों में लौकी की बुआई मई से जून माह के प्रथम सप्ताह में बारिश के पहले कर देना चाहिए|

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Irrigation in Bitter Gourd

करेले में सिंचाई प्रबंधन:-

  • करेले की फसल सूखे एवं अत्यधिक पानी वाले क्षेत्रों के प्रति सहनशील नहीं होती है|
  • रोपण या बुवाई के तुरन्त बाद सिंचाई करनी चाहिये फिर तीसरे दिन एवं उसके बाद सप्ताह में एक बार भूमि में नमी के अनुसार सिंचाई करनी चाहिये|
  • भूमि की उपरी सतह (50 सेमी.तक) नमी बनाए रखना चाहिये| इस क्षेत्र में जड़ें अधिक संख्या मने होती है|

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Weed Control in Cauliflower

फुल गोभी में खरपतवार नियंत्रण:-

  • फसल की अच्छी बढ़वार के लिए खेत की निदाई बहुत आवश्यक है|
  • हाथ से निदाई 2-3 बार व 1-2 बार गुडाई करनी चाहिए| गहरी गुडाई नही करनी चाहिये|
  • रोपाई केबाद पेंडामिथेलीन 30% EC 3-3.5 लीटर प्रति हेक्टेयर का छिडकाव करना चाहिये|

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