मिर्च में मोजेक वायरस की पहचान

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  • इस वायरस के संपर्क में आने से पत्तियों पर गहरे हरे और पीले रंग के धब्बे निकलते हैं।
  • इसके कारण हलके गड्ढे और फफोले भी दिखाई पड़ते हैं।
  • कभी-कभी पत्ती का आकार अति सुक्ष्म सूत्रकार हो जाता है।
  • यह सफ़ेद मक्खी के माध्यम से फैलता है।
  • इस वायरस से ग्रषित पौधों में फूल और फल कम लगते हैं।
  • इसके कारण फल भी विकृत और खुरदुरे हो जाते हैं।
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ऐसे करें सब्जियों के लिए रोग मुक्त नर्सरी का निर्माण

  • बुआई के लिए स्वस्थ बीज का चयन करें
  • बुआई के पूर्व बीजों का उपचार अनुशासित फफूंदनाशक से करना चाहिए
  • एक ही प्लॉट में बार-बार नर्सरी नहीं बनाना चाहिए 
  • नर्सरी की ऊपरी मिट्टी को कार्बेन्डाजिम 5 ग्राम/वर्ग मी. से उपचारित करना चाहिए तथा इसी रसायन का 2 ग्राम/लीटर पानी का घोल बनाकर नर्सरी में प्रत्येक 15 दिन में ड्रेंचिंग करना चाहिए
  • मृदा सौर्यीकरण करना चाहिए जिसके अंतर्गत गर्मियों में फसल बुआई के पहले नर्सरी बेड को 250 गेज के पोलीथीन शीट से 30 दिन के लिए ढक दिया जाता है
  • आद्रगलन रोग के नियंत्रण के लिए जैव नियंत्रण एजेंट ट्राइकोडर्मा विरिडी 500 ग्राम/एकड़ के अनुसार देना चाहिए।
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गिलकी एवं तुरई की फसल के लिए खेत की तैयारी के समय पोषक तत्व प्रबंधन:

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  • खेत की तैयारी के समय 8-10 टन प्रति एकड़ की दर से गोबर की खाद का प्रयोग करें
  • 30 किलोग्राम यूरिया 70 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट एवं 35 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ़ पोटाश को अंतिम जुताई के समय डालें
  • अन्य बचे हुये 30 किलोग्राम यूरिया की आधी मात्रा को 8-10 पत्ती वाली अवस्था में तथा आधी मात्रा को फूल आने के समय डालें
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मिश्रित खेती के अंतर्गत लगायी जाने वाली फसलें

 

क्र. मुख्य फसल         अंतरसस्य फसले 
1. सोयाबीन  मक्का, अरहर
  • इंटरकल्चरल या मिश्रित फसलों के लिए, सब्जियों की वृद्धि दर, जड़ों का वितरण, पौष्टिक प्रकृति, कीटों के प्रकोप और बीमारी, बाजार की मांग आदि पर विचार किया जाना चाहिए।
  • फसल प्रणाली स्थायी नहीं होनी चाहिए और यह मौसम, कीट और बीमारियों के प्रकोप, बाजार मूल्य और मांग तथा उत्पादक के अनुसार बदलना चाहिए।
2. भिड़ी    धनियाँ, पालक 
3. कपास  मूँगफली, उड़द, हरी मूंग, मक्का
4. मिर्ची  मूली, गाजर 
5. आम  हल्दी, प्याज 

 

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प्याज की फसल में कंद फटने की समस्या की रोकथाम कैसे करें?

  • एक समान सिंचाई और उर्वरकों की मात्रा उपयोग करने से कंदों को फटने से रोका जा सकता है।
  • धीमी वृद्धि करने वाले प्याज की किस्मों का उपयोग करने से इस विकार को कम कर सकते हैं।
  • इसकी रोकथाम के लिए एक किलो 00:00: 50 प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करें।
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प्याज की फसल में कंद फटने की समस्या के कारणों की करें पहचान

  • प्याज़ के खेत में अनियमित सिंचाई के कारण इस विकार में वृद्धि होती है।
  • खेत में ज्यादा सिंचाई, के बाद में पुरी तरह से सूखने देने एवं अधिक सिंचाई दोबारा करने के कारण कंद फटने लगते हैं।
  • कंद के फटने के कारण कंदों में मकड़ी (राईज़ोफ़ाइगस प्रजाति) चिपक जाती है।
  • प्रथम लक्षण कंद के फटने के बाद आधार पर दिखाई देते हैं।
  • प्रभावित कंद फटे उभार के रूप में आधार वाले भाग में दिखाई देते हैं।
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सिंचाई के अच्छे प्रबंधन से तरबूज की पैदावार में सुधार कैसे करें

  • तरबूज अधिक पानी चाहने वाली फसल है लेकिन पानी का भराव इस फसल के लिए हानिकारक होता है|
  • तरबूज की खेती खासकर गर्म मौसम में होती हैं इसलिए इसमें सिंचाई का अंतराल बहुत महत्तवपूर्ण होता हैं|
  • तरबूज में 3-5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करना चाहिए|
  • फूल आने के पहले, फूल आने के समय एवं फल की वृद्धि के समय पानी की कमी से उत्पादन में बहुत कमी आ जाती है|
  • फल पकने के समय सिंचाई रोक देना चाहिए ऐसा करने से फल की गुणवत्ता बढ़ती है और साथ ही फल फटने की समस्या भी नहीं आती है|
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तरबूज की महत्वपूर्ण किस्मे

 

क्र. किस्म का नाम  फल का आकार  फल का भार 

(किलोग्राम )

फसल अवधि 

    (दिन )

फल का रंग 
1.  सागर किंग  अंडाकार  3-5  60 – 70 फल का रंग काला  तथा गुदा लाल रंग का दिखाई देता है 
2.  सागर किंग प्लस   अंडाकार  3-5  60 – 70 फल का रंग काला  तथा गुदा लाल रंग का दिखाई देता है 
3.  काजल  अंडाकार  3- 3.5 60 – 70 फल का रंग काला  तथा गुदा गुलाबी रंग का दिखाई देता है 
4.  2208  अंडाकार  2-4 70 – 80 फल का रंग काला  तथा गुदा लाल रंग का दिखाई देता है 
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तरबूज की खेती के लिए खेत की तैयारी

  • तरबूज की खेती सभी प्रकार की मृदा मे की जा सकती है लेकिन हल्की, रेतीली एवं उर्वर दोमट मृदा उत्तम होती है|
  • मृदा में कार्बनिक पदार्थों की उपस्थिति महत्वपूर्ण होती है इसकी पूर्ति के लिए हरी खाद, कम्पोस्ट, केंचुआ की खाद इत्यादि को जुताई के समय मिला देना चाहिये |
  • खेत की अच्छी तैयारी के लिए पहले गहरी जुताई करे फिर हैरो चलाये जिससे जमीन भुरभुरी हो जाए|
  • हल्का ढाल दक्षिण दिशा की और रखना हैं|
  • खेत में से घास फुस साफ़ करें|
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तरबूज की बुवाई का समय

  • तरबूजे की बुवाई का समय नवम्बर से मार्च तक है।
  • नवम्बर-दिसम्बर की बुवाई के बाद पौधों को पाले से बचाना चाहिए तथा अधिकतर बुवाई जनवरी-मार्च तक की जाती है।
  • पहाड़ी क्षेत्रों में मार्च-अप्रैल के महीनों में बोया जाता है।
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