सोयाबीन की फसल में पत्ती खाने वाली इल्ली का प्रबंधन

leaf-eating caterpillar in soybean
  • सोयाबीन की फसल में पत्तियों को खाकर नुकसान पहुंचाने वाली इल्लियों का बहुत प्रकोप होता है।
  • यह इल्लियाँ सोयाबीन की फसल को बहुत प्रभावित करती हैं।
  • नवजात इल्लियाँ झुंड में रहती हैं एवं ये सभी एक साथ मिलकर पत्तियों पर आक्रमण करती हैं।
  • पत्तियों के हरे भाग को खुरच कर ये खा जाती है एवं बाद में पूरे पौधे पर फैल जाती हैं।
  • यह पूरे पौधे की पत्तियों को नुकसान पहुँचाती हैं। इल्लियों के द्वारा खायी गयी पत्तियों पर सिर्फ जाली ही रह जाती है।
  • इन इल्लियों का नियंत्रण समय पर करना बहुत आवश्यक होता है।
  • इनके नियंत्रण के लिए जैविक उपचार के रूप में गर्मियो के समय खाली खेत में गहरी जुताई करें।
  • उचित समय पर यानि मानसून के शुरूआती समय पर ही बुआई करें।
  • बवेरिया बेसियाना @500 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव करें।

रासायनिक प्रबंधन:

  • प्रोफेनोफोस 40% + सायपरमेथ्रिन 4% EC @ 400 मिली/एकड़ या इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG @100 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
  • फ्लूबेण्डामाइड 20% WG@ 100 ग्राम/एकड़ या क्लोरानट्रानिलीप्रोल 18.5% SC@ 60 मिली/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
Share

मिर्च की फसल में सफेद मक्खी के प्रकोप के लक्षण एवं नियंत्रण

white fly in chilli
  • यह कीट अपने शिशु एवं वयस्क दोनों ही अवस्था में मिर्च की फसल को बहुत अधिक नुकसान पहुँचाते हैं।
  • यह पत्तियों का रस चूसकर पौधे के विकास को बाधित कर देते हैं।
  • यह कीट पौधे पर उत्पन्न होने वाली काली कवक नामक हानिकारक कवक के संक्रमण का कारण भी बनती है।
  • इसके अधिक प्रकोप की स्थिति में मिर्च की फसल पूर्णतः सक्रमित हो जाती है।
  • फसल के पूर्ण विकसित हो जाने पर भी इस कीट का प्रकोप होता है। इसके कारण से मिर्च के पौधे की पत्तियां सूख कर गिर जाती हैं।
  • प्रबंधन: इस कीट के नियंत्रण के लिए डायफैनथीयुरॉन 50%WP @250 ग्राम/एकड़ या फ्लोनिकामिड 50% WG @ 60 मिली/एकड़ या एसिडामिप्रीड 20% SP @ 100 ग्राम/एकड़ या पायरीप्रोक्सीफैन 10% + बॉयफैनथ्रिन 10% EC 250 मिली/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
Share

कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना, जारी किया गया ऑरेंज अलर्ट

Possibility of heavy rains in many states, Orange alert issued

पूरे देश में मौसम बदल रहा है, कई राज्यों में बारिश हो रही है तो कहीं कहीं बारिश का अभी भी इंतजार है। ऐसे में मौसम विभाग संभावना जता रहा है की अगले कुछ दिन देश के कई क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश, सिक्किम, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में अगले कुछ दिन मॉनसून सक्रिय रहेगा और हल्की बारिश होगी।

इसके अलावा मौसम विभाग के अनुसार पूर्वी राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, तेलंगाना और आंतरिक कर्नाटक में भी हल्की बारिश हो सकती है वहीं, अंडमान, नीकोबार द्वीपसमूह और तमिलनाडु में भारी बारिश की संभावना है।

ग़ौरतलब है की पिछले 24 घंटों में केरल के कई क्षेत्रों में मूसलाधार वर्षा हुई है और साथ ही हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दक्षिण-पश्चिमी और उत्तरी मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ हिस्सों में भारी बारिश हुई।

स्रोत: कृषि जागरण

Share

सोयाबीन मोज़ेक वायरस की ऐसे करें रोकथाम

How to prevent soybean mosaic virus
  • सोयाबीन मोज़ेक वायरस का वाहक है होता है रस चूसक कीट सफेद मक्खी।
  • इस वायरस से संक्रमित पौधों में लक्षण पूरी तरह स्पष्ट नहीं होते हैं।
  • इसके लक्षण सोयाबीन की फसल की किस्मों के अनुसार भिन्न – भिन्न हो सकते हैं।
  • इसके प्रकोप के कारण पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं एवं पत्तियों पर पीले- हरे रंग के धब्बे बन जाते है।
  • पत्तियों के अपूर्ण विकास के कारण पत्तियाँ विकृत हो जाती हैं एवं फल अच्छे से नहीं बन पाते हैं।
  • इसके प्रकोप के कारण सोयाबीन के पौधे का विकास सही से नहीं हो पता है एवं उत्पादन पर भी इसका प्रभाव पड़ता है।
  • इसके नियंत्रण लिए एसिटामिप्रीड 20% SP@ 100 ग्राम/एकड़ या बायफैनथ्रिन 10% EC @ 300 मिली/एकड़ या डायफैनथीयुरॉन 50% WP@ 250 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
  • मेट्राजियम @ 1 किलो/एकड़ या बवेरिया बेसियाना 250 ग्राम प्रति एकड़ की दर से उपयोग करें।
Share

सोयाबीन की फसल में रस्ट के लक्षण एवं बचाव

Rust in soybean crop
  • सोयाबीन की फसल में इस रोग के कारण बहुत अधिक नुकसान होता है।
  • इसके प्रकोप के लक्षण पौधे के सभी ऊपरी हिस्सों पर सबसे पहले दिखाई देते हैं।
  • इसके बाद पत्तियों की ऊपरी सतह पर बड़ी संख्या में हल्के भूरे रंग या नारंगी रंग के धब्बे दिखाई देते हैं, जो बाद में भूरे रंग या लाल भूरे रंग के धब्बों में बदल जाते हैं।
  • प्रबंधन: थियोफिनेट मिथाइल 70% WP@ 300 ग्राम/एकड़ या हेक्साकोनाजोल 5% SC@ 400 मिली/एकड़ या प्रोपीकोनाज़ोल 25% EC@ 200 मिली/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
  • जैविक उपचार हेतु ट्रायकोडर्मा विरिडी@ 500 ग्राम/एकड़ या सुडोमोनास फ्लोरोसेंस @ 250 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
Share

मध्य प्रदेश के बीहड़ इलाके में तीन लाख हेक्टेयर से ज्यादा ज़मीन को खेती योग्य बनाया जायेगा, विश्व बैंक करेगी मदद

More than three lakh hectares of land will be made cultivable in the rugged region of MP

मध्य प्रदेश के चंबल की वीरान धरती को उपजाऊ और खेती योग्य बनाने की कोशिश की जा रही है। अगर सब कुछ सही रहा तो इस क्षेत्र में भी अब हरियाली आएगी और फसलें लहलहाएंगी। इस कार्य में सहयोग के लिए विश्व बैंक एक व्यापक योजना पर विचार कर रहा है।

ग़ौरतलब है की चबल का बीहड़ मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश तीनों क्षेत्रों में फैला है और इसी इलाके को खेती योग्य बनाने को लेकर विश्व बैंक कार्य करने वाला है। विश्व बैंक के अधिकारी आदर्श कुमार ने मध्यप्रदेश में बीहड़ क्षेत्र के विकास की परियोजना पर काम करने के लिए अपनी सहमति जताई है। इस क्षेत्र में तीन लाख हेक्टेयर से ज्यादा ज़मीन खेती योग्य नहीं है। अगर यह विशाल क्षेत्र खेती योग्य बनेगा तो इलाके के लोगों को आजीविका का साधन मिलेगा और पर्यावरण की दृष्टि से भी यह समुचित कदम होगा। बीहड़ की वीरान भूमि में हरियाली लाने के साथ-साथ इलाके के समग्र विकास के लिए ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में कृषि बाजार, गोदाम, कोल्ड स्टोरेज लगाने की योजना है।

स्रोत: टीवी 9 भारतवर्ष

Share

सोयाबीन की फसल में गर्डल बीटल प्रबंधन

  • इस कीट की मादा पौधे के तने के अंदर अंडे देती है और जब अंडे से शिशु निकलते हैं तो वे तने को खाकर कमजोर कर देते हैं।
  • इससे तना बीच में से खोखला हो जाता है जिसके कारण खनिज तत्व पत्तियों तक नहीं पहुंच पाते एवं पत्तियां सुख जाती हैं।
  • इस कारण फसल के उत्पादन में भी काफी कमी आ जाती है।

यांत्रिक प्रबंधन:

  • गर्मियो के समय खाली खेत में गहरी जुताई करें। अधिक घनी फसल की बुआई ना करें।
  • अधिक नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का उपयोग ना करें, यदि संक्रमण बहुत अधिक हो तो उचित रसायनों का उपयोग करें।

रासायनिक प्रबंधन:

  • लेमड़ा सहेलोथ्रिन 4.9% EC@ 200 मिली/एकड़ या प्रोफेनोफोस 40 % + साइपरमेथ्रिन 4 % EC@400 मिली/एकड़ का उपयोग करें।
  • क्युँनालफॉस 25% EC 25% EC@400 मिली/एकड़ या बायफेनथ्रिन 10% EC@300 मिली/एकड़ का उपयोग करें।

जैविक प्रबंधन:

  • बवेरिया बेसियाना @500 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
Share

सोयाबीन की फसल में ऐसे करें फली छेदक कीट का नियंत्रण

Control of pod borer in soybean crop
  • इस कीट का आक्रमण सोयाबीन की फसल की शुरूआती अवस्था में ही हो जाता है।
  • पहले यह कीट पौधे के नरम भागों को नुकसान पहुँचाती है और बाद में यह सोयाबीन की फली एवं बीजों को नुकसान पहुँचाती है।
  • यह फली एवं फल छेदक इल्ली सोयाबीन की फली को बहुत अधिक को नुकसान पहुँचाती है।
  • इसके प्रबधन के लिए प्रोफेनोफोस 40% + साइपरमेथ्रिन 4% EC @ 400 मिली/एकड़ या इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG @100 ग्राम/एकड़ या फ्लूबेण्डामाइड 20% WG @100 ग्राम/एकड़ या लैम्डा साइहेलोथ्रिन 4.6% + क्लोरानिट्रानिलीप्रोल 9.3% ZC @ 80 मिली/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
  • इसके जैविक प्रबंधन के लिए बवेरिया बेसियाना @ 500 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
Share

आने वाले 3 से 4 दिनों में मध्यप्रदेश के इन जिलों में हो सकती है भारी बारिश

Take precautions related to agriculture during the weather changes

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगस्त महीने में एक नया सिस्टम सक्रिय होने वाला है और ऐसा होने के बाद नए सिरे से बारिश का सिलसिला शुरू हो जाएगा। ग़ौरतलब है की पिछले चौबीस घंटे में मध्यप्रदेश के कई जिलों में इसका दिखा है। मौसम विभाग की तरफ से कई जिलों में बारिश होने की संभावना जताई है।

मौसम विभाग के मुताबिक अनूपपूर, उमरिया, डिंडौरी, दमोह, छतरपुर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड आदि जिलों में कही कही भारी बारिश की संभावना है। इसके साथ ही रीवा, शहडोल, ग्वालियर, चंबल आदि क्षेत्रों में गरज के साथ बारिश की संभावना जताई गई है।

बात करें देश के अन्य राज्यों की तो मौसम विभाग के अनुसार उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों में आने वाले 3 से 4 दिनों में भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश में 29 से 31 जुलाई के बीच बारिश हो सकती है।

स्रोत: एमपी ब्रेकिंग न्यूज़

Share

मिर्च की फसल में 45 से 60 दिनों में उर्वरक प्रबंधन

  • मिर्च की फसल में जिस प्रकार रोपाई के समय या रोपाई के बाद पोषण/उर्वरक प्रबंधन बहुत आवश्यक होता है ठीक उसी प्रकार मिर्च की फसल जब 40 दिनों की हो जाती है तो उसके बाद 45 से 60 दिनों में भी पोषण/उर्वरक प्रबंधन करना बहुत आवश्यक होता है।
  • इस समय पोषण/उर्वरक प्रबंधन करने से मिर्च की फसल में फूल अच्छे बनते हैं एवं फूल गिरने की समस्या भी फसल में नहीं होती है।
  • इस समय जो पोषण/उर्वरक प्रबधन किया जाता है वह मिट्टी उपचार के रूप में किया जाता है।

इसके लिए निम्न उत्पादों का उपयोग किया जाता है

  • यूरिया @ 45 किलो/एकड़ + DAP@ 50 किलो/एकड़ + मैगनेशियम सल्फेट @ 10 किलो/एकड़ + सूक्ष्म पोषक तत्व @ 10 किलो/एकड़ की दर से मिट्टी उपचार के रूप में उपयोग करें।
Share