उत्तर भारत के राज्यों में होगी बारिश, कश्मीर सहित पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू

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जम्मू कश्मीर, पाकिस्तान के उत्तरी भागों के साथ-साथ अफगानिस्तान और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू हो गई है। कश्मीर के कुछ इलाकों में भारी बारिश और बर्फबारी दर्ज की गई है। अब जल्दी ही बरसने वाले बादल पंजाब, हरियाणा और उत्तरी राजस्थान की तरफ आगे बढ़ेंगे। दिल्ली और उत्तर प्रदेश के भी कुछ इलाकों में बारिश की संभावना बन रही है। 26 फरवरी को दिल्ली ने इस सीजन का सबसे अधिक तापमान 32.4 डिग्री दर्ज किया है। मुंबई सहित महाराष्ट्र और कर्नाटक के तट पर लू का प्रकोप जारी है। कल से दिल्ली सहित उत्तर भारत में अधिकतम तापमान में कुछ गिरावट दर्ज होने लगेगी। तमिलनाडु के दक्षिणी भागों में बारिश शुरू होगी, जो धीरे-धीरे पूरे तमिलनाडु में फैल जाएगी।

स्रोत: स्काइमेट वेदर

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तरबूज की फसल में माहू कीट के लक्षण एवं नियंत्रण के उपाय

Symptoms and control of aphids in watermelon crop

यह कीट पत्तियों को एवं कोमल टहनियों को प्रभावित करते हैं, जिसके कारण पत्तियां मुड़कर मुरझाने लगती है। पौधों का विकास रुक जाता है साथ ही कीट से मधुरस उत्सर्जन के कारण पत्तियों पर काली फफूंद का विकास होता है।

नियंत्रण: इस कीट के नियंत्रण के लिए प्रकोप दिखाई देते ही नोवासेटा (एसिटामिप्रिड 20% एसपी) @ 30 ग्राम प्रति एकड़ या मीडिया (इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एस एल) @ 40-50 मिली प्रति एकड़ + नोवामैक्स (जिबरेलिक ऍसिड 0.001%) @ 300 मिली के दर से 150-200 लीटर पानी में छिड़काव करें। 

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जानिए लौकी की फसल में छोटे फल गिरने के कारण एवं बचाव के उपाय

Know the reasons and prevention measure for small fruits dropping in gourd crop

लौकी की खेती करने वाले किसानों के सामने अक्सर लौकी की फसल छोटे फल पीले होने की एवं सूख कर गिरने की समस्या आती है, और इससे उपज में भारी नुकसान होता है। 

क्यों गिरते हैं लौकी के छोटे फल?

  • पौधों में फफूंद जनित रोग होने पर फल गिरने लगते हैं।

  • फसल में कीटों का प्रकोप होने पर भी यह समस्या हो सकती है।

  • फसल में अनियमित सिंचाई या सिंचाई की कमी होने पर भी लौकी के छोटे फल गिरने लगते हैं।

  • असंतुलित मात्रा में, उर्वरकों का प्रयोग होने के कारण से भी फल गिरते हैं।

  • परागण सही नहीं होने की वजह से भी छोटे फल गिरने लगते हैं।

छोटे फलों के गिरने के शुरूआती लक्षण:

शुरूआती अवस्था में छोटे फलों के साथ लगे फूल सूखने लगते हैं और धीरे-धीरे छोटे फल पीले एवं भूरे रंग के होने लगते हैं। बाद में फल पूरी तरह सूख कर गिरने लगते हैं।

रोकथाम:

  • समय-समय पर फसल का निरीक्षण करें।

  • खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था करें।

  • आवश्यकता से अधिक सिंचाई एवं उर्वरकों का प्रयोग न करें।

  • यदि फफूंद जनित रोग या फल मक्खी एवं रस चूसक कीटों के लक्षण दिखाई दे तो नियंत्रण के लिए उचित छिड़काव करें।

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बैंगन की फसल में रस चूसक कीटों के लक्षण एवं नियंत्रण के उपाय

Symptoms and control measures of sucking pests in brinjal crop
  • रस चूसक कीट ‘मकड़ी’ बैंगन की फसल में पत्तों के नीचे जाल फ़ैलाते हैं और पत्तों का रस चूसते हैं। इससे पत्ते लाल रंग के दिखने लगते हैं। 

  • इससे बचाव के लिए तुस्क (मॅलॅथिऑन 50.00% ईसी) @ 600 मिली/एकड़ या मेओथ्रिन  (फेनप्रोपॅथ्रीन 30 % ईसी) @ 100 – 136 मिली प्रति एकड़ के दर से 150 -200 लीटर पानी में मिलकर छिड़काव करें। 

  • रस चूसक कीट जैसिड’ पत्तियों की निचली सतह से रस चूसते हैं, जिसके प्रभाव से पत्तियां पीली होकर कमजोर पड़ जाती हैं।  

  • सोलोमन (बीटा-सायफ्लुथ्रिन 08.49% + इमिडाक्लोप्रिड 19.81 % w/w ओडी) @ 70 -80 मिली प्रति एकड़ या टफगोर (डायमेथोएट 30% ईसी) @ 792 मिली प्रति एकड़ के दर के 150 – 200 लीटर पानी में छिड़काव करें।  

  • रस चूसक कीट सफ़ेद मक्खी’ पत्तियों से रस चूसती हैं, जिससे पत्तियां सिकुड़ जाती हैं। इसके अलावा यह कीट विषाणु जन्य रोगों को एक पौधे से दूसरे पौधों में फैलाने का काम भी करते हैं।

  • पेजर (डायफेंथियूरॉन 50% डब्लूपी) @ 240 ग्राम/एकड़ और अरेवा (थायोमिथाक्साम 25% डब्लूजी) @ 80 ग्राम प्रति एकड़ के दर से 150 – 200 लीटर पानी में छिड़काव करें। 

  • रस चूसक कीट माहू’ छोटे एवं हरे रंग के होते हैं, ये पत्तियों की निचली सतह पर रहते हैं और रस चूसते हैं  जिसके कारण पत्तिया पीली पड़ती है| 

  • सोलोमन (बीटा-सायफ्लुथ्रिन 08.49% + इमिडाक्लोप्रिड 19.81% w/w ओडी) @ 70 -80 मिली प्रति एकड़ के दर से 150 से 200 लीटर पानी में मिलकर छिड़काव करें। 

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27 फरवरी से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और यूपी तक बारिश के आसार

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वेस्टर्न डिस्टरबेंस अब उत्तरी पाकिस्तान तक पहुंच चुका है। उत्तरी पाकिस्तान सहित भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में आज शाम से बारिश और बर्फबारी शुरू हो जाएगी। कल 25 फरवरी से बारिश और बर्फबारी की गतिविधियां जोर पकड़ेंगी। 26 फरवरी को उत्तर भारत के तराई वाले इलाकों में बारिश होगी, लेकिन 27 फरवरी से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित उत्तरी राजस्थान में भी बारिश होगी। दक्षिण भारत सहित पूर्वोत्तर राज्यों में भी बारिश की गतिविधियां दिखाई देगी। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भारी बारिश की संभावना है।

स्रोत: स्काइमेट वेदर

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तरबूज में पाउडरी मिल्ड्यू रोग के लक्षण एवं नियंत्रण के उपाय

Symptoms and control of powdery mildew disease in watermelon

इस रोग से पौधों के ऊपरी पत्ते, तने और नए बढ़ते भागों पर सफेद चूर्ण का विकास होता है, और जैसे ही संक्रमण बढ़ता है संपूर्ण पत्ते कवक के ढक जाते हैं। ग्रासित पौधों की पत्तियां समय से पहले झड़ने लगती हैं। अगर संक्रमण फल अवस्था के समय हो तो फल अविकसित रह जाते हैं एवं विकृत हो जाते हैं।

नियंत्रण: इस रोग के नियंत्रण के लिए रोग के लक्षण दिखाई देते ही नोवाकोन (हेक्साकोनाज़ोल 5% एससी) @ 400 मिली प्रति एकड़ के दर से 150-200 लीटर पानी में छिड़काव करें। साथ हीं अच्छे फूल एवं फल विकास के लिए न्युट्रीफुल मैक्स (फुलविक एसिड + एमिनो एसिड+ ट्रेस घटक) @ 250 मिली प्रति एकड़ से छिड़काव करें।

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प्याज़ में बेसल रॉट की समस्या के लक्षण एवं निवारण के उपाय

Symptoms and prevention of basal rot problem in onions

इस रोग के प्रारंभिक लक्षण में पीली पड़ती पत्तियां नजर आती हैं एवं पौधों की वृद्धि रुक जाती है, और बाद में पत्तियां सिरे से नीचे की ओर सूख जाती हैं। संक्रमण की शुरूआती अवस्था में पौधों की जड़ गुलाबी रंग की हो जाती है और बाद में सड़ने लगती है। जैसे ही संक्रमण बढ़ता है, कंद निचले सिरे से सड़ने लगता है और अंत में पूरा पौधा मर जाता है।

निवारण: इसके नियंत्रण के लिए, रोग के लक्षण दिखाई देते ही धानुकॉप (कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% डब्ल्यूपी) @ 500 ग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी के दर से ड्रेंचिंग करें।

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पीएम किसान योजना: किसानों को अब मिलेंगे ₹9,000!

PM Kisan Sampada Yojana

भारत सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के तहत किसानों को वित्तीय सहायता मिलती है। अब राजस्थान सरकार ने इस राशि को बढ़ाकर ₹9,000 प्रति वर्ष कर दिया है, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिलेगा।

राजस्थान बजट 2025-26 में किसानों के लिए खास प्रावधान:

✅ गोबर गैस प्लांट पर सब्सिडी – किसानों को गोबर गैस प्लांट लगाने पर सरकारी अनुदान मिलेगा।
✅ महिलाओं के लिए लाभ – राजीविका मिशन के तहत 20 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य।
✅ वेयरहाउस को इंडस्ट्री का दर्जा – किसानों को फसल भंडारण की सुविधा मिलेगी।
✅ 150 यूनिट तक फ्री बिजली – हर महीने 150 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी।
✅ मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक योजना – 1,000 नए दूध संग्रहण केंद्र खुलेंगे, गौशाला अनुदान बढ़ाया गया।
✅ गेहूं पर एमएसपी बोनस – किसानों को प्रति क्विंटल ₹150 का अतिरिक्त बोनस मिलेगा।
✅ इजराइल यात्रा – 100 किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक सीखने भेजा जाएगा।
✅ भूमिहीन कृषि श्रमिकों के लिए सहायता – कृषि उपकरण खरीदने के लिए ₹5,000 तक का अनुदान।

स्रोत: कृषि जागरण

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टमाटर की फसल में फल छेदक से होने वाले नुकसान एवं नियंत्रण के उपाय

Damage and control of fruit borer in tomato crop

फल छेदक कीट की इल्ली या सुंडी सबसे ज्यादा हानिकारक होती है। शुरुआई अवस्था में यह इल्ली पत्तियों को खाती है, और बाद में फल में छेद करके फलों को नुकसान भी पहुँचाती है। इल्ली द्वारा किए गए छेद गोलाकार होते हैं। इस कीट की एक इल्ली 2-8 फल को नुकसान पहुंचा सकती है, और इसके कारण फसल की गुणवत्ता तथा उपज भी घटती है।

नियंत्रण: फली छेदक के नियंत्रण एवं निगरानी के लिए, हेलिको-ओ-लूर @ 10 फनेल ट्रैप प्रति एकड़ के दर से खेत में लगाएं। प्रकोप दिखाई देने पर कोस्को (क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.50% एससी) @ 60 मिली प्रति एकड़ या लैमनोवा (लैम्ब्डा सायहॅलोथ्रिन 04.90% सी एस) @ 120 मिली प्रति एकड़ 150 -200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। 

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किसानों के लिए सुनहरा मौका, सिंचाई पाइप लाइन पर 60% तक की सब्सिडी

Lay irrigation pipelines on 50 percent super subsidy

राजस्थान सरकार ने किसानों के लिए सिंचाई पाइप लाइन पर अनुदान योजना शुरू की है, जिससे जल संरक्षण और सिंचाई प्रणाली को बेहतर बनाया जा सके। इस योजना के तहत, किसान ट्यूबवेल या कुएं से खेतों तक पाइप लाइन के माध्यम से पानी पहुंचा सकते हैं, जिससे 20-25% तक जल की बचत होगी और उत्पादन लागत भी कम होगी।

योजना के लाभ:

✅ लघु एवं सीमांत किसानों को 60% अनुदान (अधिकतम ₹18,000)
✅ अन्य किसानों को 50% अनुदान (अधिकतम ₹15,000)
✅ अधिक भूमि की सिंचाई और जल की बचत
✅ सरकार द्वारा सब्सिडी सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर
पात्रता और आवेदन प्रक्रिया:

✔ किसान के पास कृषि योग्य भूमि हो
✔ “राज किसान साथी” पोर्टल या ई-मित्र केंद्र से आवेदन करें
✔ आधार/जनाधार कार्ड और जमाबंदी की प्रति आवश्यक

📢 इस योजना का लाभ उठाएं और अपने खेत की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाएं!

स्रोत: कृषि जागरण

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