इस फूल की खेती से सिर्फ छह महीने में होगी लाखों की कमाई
अपनी औषधीय गुणों की वजह से जादुई फूल के नाम से जाना जाने वाला कैमोमाइल वनस्पति कई प्रकार के रोगों के लिए कारगर दवा साबित होती है। इसकी खेती कर के किसान कम समय में अच्छा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं।
कैमोमाइल वनस्पति की खेती में काफी कम कृषि खर्च लगती है, इसकी खेती आप महज 10-12 हजार रुपए के खर्च में कर सकते हैं। इसकी फसल छह महीने में तैयार हो जाती है और कमाई लाखों में होती है। इसकी अच्छी कमाई को देख कर कई किसान इसकी खेती के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
कैमोमाइल के सुखे फूलों की बहुत ज्यादा मांग है। राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे कई राज्य इसके सूखे फूल को खरीदते हैं। इसका उत्पादन प्रति एकड़ पौने पांच क्विंटल तक रहता है। इस फूल का इस्तेमाल सौंदर्य उत्पादों में भी काफी होता है। इसके साथ ही कई आयुर्वेदिक और हौम्योपैथिक दवाइयों में यह उपयोग किया जाता है।
स्रोत: कृषि जागरण
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मिर्च के मुख्य खेत में रोपाई के बाद यह पहला छिड़काव है जरूरी
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मिर्च की मुख्य खेत में रोपाई के बाद मिर्च की फसल में रोगों एवं कीटों का प्रकोप होने की संभावना होती है। इन रोगों एवं कीटों से मिर्च की फसल की रक्षा करना बहुत आवश्यक होता है।
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मिर्च की रोपाई के 10-15 दिनों में, कवक रोग जैसे झुलसा रोग, पत्ती धब्बा रोग, उकठा रोग आदि के लगने की पूरी संभावना रहती है। कीट प्रकोप की बात करें, तो रस चूसक कीट जैसे थ्रिप्स, एफिड, जेसिड, सफेद मक्खी, मकड़ी इत्यादि प्रमुख हैं जो इस वक़्त लग सकते हैं।
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जब मिर्च की रोप को मुख्य खेत में लगाया जाता है तो मिर्च की पौध को अच्छे से अपनी जड़ों को भूमि में फैलाने के लिए पोषक तत्व की भी आवश्यकता होती है। इसके लिए, सूक्ष्म पोषक तत्व प्रबधन छिड़काव के रूप में करना बहुत आवश्यक है।
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इन्ही कीट, कवक एवं जीवाणु रोगों से मिर्च की फसल की रक्षा के लिए एवं फसल की अच्छी बढ़वार के लिए छिड़काव करना बहुत आवश्यक होता है।
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इसके लिए सीवीड एक्सट्रेक्ट + एमिनो एसिड + फल्विक एसिड 400 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव करें। इससे मिर्च की फसल में आवश्यक पोषक तत्व की पूर्ति एवं अच्छी बढ़वार होती है।
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थायोफिनेट मिथाइल 70% W/W @ 300 ग्राम/एकड़ की दर से कवक एवं जीवाणु जनित रोगों की रोकथाम लिए छिड़काव करें।
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थियामेंथोक्साम 25% WG @ 100 ग्राम/एकड़ या सायनट्रानिलीप्रोल 10.26% OD@ 240 मिली/एकड़ की दर से रस चूसक कीटों के नियंत्रण के लिए छिड़काव करें।
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अगले 2-3 दिन मानसून रहेगा कमजोर, जानें किस क्षेत्र में कैसा रहेगा मौसम?
पश्चिमी हवाओं के प्रभाव से मानसून के आगे बढ़ने में रुकावट आ रही है। मध्य प्रदेश में बारिश में अगले दो दिन बारिश बेहद कम होने की संभावना है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, गुजरात, राजस्थान तथा महाराष्ट्र में जारी बारिश में भी अब कमी आने की संभावना है।
वीडियो स्रोत: स्काईमेट वेदर
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21 जून को मध्य प्रदेश की मंडियों में क्या रहे अलग अलग फसलों के भाव
मंडी |
फसल |
न्यूनतम |
अधिकतम |
मॉडल |
रतलाम _(नामली मंडी) |
गेहूँ लोकवन |
1570 |
1800 |
1705 |
रतलाम _(नामली मंडी) |
डॉलर चना |
5701 |
7001 |
7001 |
रतलाम _(नामली मंडी) |
यलो सोयाबीन |
5800 |
7140 |
6050 |
रतलाम |
गेहूँ शरबती |
2345 |
3288 |
2660 |
रतलाम |
गेहूँ लोकवन |
1725 |
2120 |
1830 |
रतलाम |
गेहूँ मिल |
1610 |
1710 |
1665 |
रतलाम |
विशाल चना |
4100 |
4751 |
4400 |
रतलाम |
इटालियन चना |
4500 |
5051 |
4876 |
रतलाम |
डॉलर चना |
4300 |
8541 |
7100 |
रतलाम |
गेहूँ शरबती |
5900 |
7940 |
6750 |
रतलाम |
मटर |
3351 |
6400 |
4400 |
रतलाम _(नामली मंडी) |
लहसुन |
1000 |
10555 |
5000 |
रतलाम_एपीएमसी |
प्याज |
650 |
2425 |
1515 |
रतलाम_एपीएमसी |
लहसुन |
1600 |
9700 |
4600 |
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इंदौर मंडी में 21 जून को क्या रहे प्याज लहसुन और आलू के भाव?
वीडियो के माध्यम से जानें आज यानी 21 जून के दिन इंदौर के मंडी में क्या रहे प्याज, लहसुन और आलू जैसे फसलों के मंडी भाव?
वीडियो स्रोत: यूट्यूब
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मिर्च के पौध की अच्छी वृद्धि के लिए इन उपायों को जरूर अपनाएं
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मिर्च की फसल की अच्छी वृद्धि के लिए कुल 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इनमें से किसी एक पोषक तत्व की कमी होने पर पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और भरपूर फसल नहीं मिलती।
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पौधों को विकास के लिए सूरज की पर्याप्त रोशनी की जरूरत होती है। अगर मिर्च की नर्सरी किसी ऐसी जगह पर हो, जहां धूप कम आती है या नहीं आती है तो मिर्च की फसल की वृद्धि बहुत प्रभावित होती है क्योंकि पेड़-पौधों को अपना भोजन बनाने के लिए सूरज की रोशनी की जरूरत होती है।
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मिट्टी एवं बीज़ उपचार करने के बाद ही मिर्ची की नर्सरी में बीजों की बुआई करें। मिट्टी एवं बीज़ उपचार के माधयम से मिर्च की फसल स्वस्थ रहती है साथ ही फसल का विकास बहुत अच्छा होता है।
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मिर्च की रोप के प्रत्यारोपण के समय ही आवश्यक उर्वरकों का मिट्टी में उपयोग करने से, मिर्च की फसल के विकास के लिए आवश्यक तत्वों की उपलब्धता सुनिश्चित हो जाती है।
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इसी प्रकार डीएपी, यूरिया, पोटाश, जिंक, मेग्नेशियम, सल्फर जैसे उर्वरको की पूर्ति मिर्च की फसल में समय से करने से अच्छी फसल वृद्धि होती है एवं फसल स्वस्थ, रोगरोधी होती है साथ ही अच्छी उपज देती है।
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मिर्च की नर्सरी में ट्राइकोडर्मा से ड्रेंचिंग करने से मिलेंगे कई लाभ
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मिर्च की नर्सरी की 10-15 दिनों की अवस्था में ट्राइकोडर्मा से ड्रेंचिंग करने से पौध को बहुत लाभ होता है। दरअसल ट्राइकोडर्मा एक जैविक कवकनाशी है जो पौध के रोग प्रबंधन के लिए एक बहुत ही प्रभावी जैविक साधन साबित होता है।
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यह एक शक्तिशाली बायोकंट्रोल एजेंट है। इसका उपयोग मिट्टी जनित बीमारियों जैसे फ्यूजेरियम, फाइटोपथोरा, स्क्लेरोशियम आदि के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है।
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ट्राइकोडर्मा वृद्धि नियामकों की तरह भी कार्य करता है। यह सुरक्षात्मक रूप में डाला जाये तो निमेटोड का भी नियंत्रण करता है।
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ट्राइकोडर्मा का उपयोग जड़ गलन, तना गलन, उकठा रोग आदि के प्रभावी नियंत्रक के रूप में किया जाता है।
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मिर्च की नर्सरी में ट्राइकोडर्मा विरिडी @ 5-10 ग्राम/लीटर की दर से ड्रेंचिंग करने के लिए उपयोग करें।
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मिर्च की नर्सरी में ट्राइकोडर्मा से ड्रेंचिंग के लाभ: ट्राइकोडर्मा, ज़मीन में मौजूद फॉस्फोरस को सरल रूप में परिवर्तित कर मिर्च की फसल को प्रदान करने में मदद करता है। इसकी वजह से पौधे की जड़ों का विकास बहुत अच्छा होता है। यह मृदाजनित रोग उकठा, आद्र्गलन और जडग़लन आदि को नियंत्रित करने में एक महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह फसलों में रोग उत्पन्न करने वाले फफूंद को रोकता है। यह पौधों के इम्यून सिस्टम को बढ़ा कर पौधे की रोग प्रतिरोधी क्षमता को सुधारता है।
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कल से मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां थमने की है संभावना, जानें मौसम पूर्वानुमान
मध्य प्रदेश के पूर्वी जिलों में आज बारिश की संभावना हैं पर कल से मध्य प्रदेश के ज्यादातर इलाके शुष्क हो जाएंगे और यहाँ बारिश थम जायेगी। अगले 24 घंटों तक पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर राज्यों सहित कोकन और गोवा तथा तटीय कर्नाटक में तेज बारिश जारी रहेगी। 24 घंटे बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान तथा गुजरात सहित महाराष्ट्र में जारी बारिश में कमी आएगी। दिल्ली सहित पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा उत्तरी राजस्थान का मौसम शुष्क रहेगा।
वीडियो स्रोत: स्काईमेट वेदर
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अगले हफ्ते किस फसल के भाव में है तेजी की संभावना, जानें मंडी विशेषज्ञ की राय
वीडियो के माध्यम से जानें अगले हफ्ते किस फसल के भाव में आ सकती है तेजी।
वीडियो स्रोत: मार्केट टाइम्स टीवी
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