अदरक की फसल में 20 से 30 दिनों बाद उर्वरक प्रबंधन

  • जिस प्रकार अदरक की बुआई के समय उर्वरक प्रबंधन आवश्यक होता है ठीक उसी प्रकार बुआई के 20 से 30 दिनों बाद भी उर्वरक प्रबंधन करना बहुत आवश्यक होता है  
  • यह प्रबंधन अदरक की फसल की अच्छी बढ़वार एवं रोगों के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है 
  • इस समय अदरक की फसल की गाठे जमींन में फैलती हैं और इसी दौरान गाठों की अच्छी बढ़वार की लिए उर्वरक प्रबंधन बहुत आवश्यक है  
  • इस समय उर्वरक प्रबंधन के लिए MOP @ 30 किलो/एकड़ SSP @ 50 किलो/एकड़, जिंक सल्फेट @ 5 किलो/एकड़ या NPK का कॉन्सोर्टिया 3 किलो/एकड़, ज़िंक बेक्टेरिया @ 4 किलो/एकड़ मायकोराइज़ा @ 4 किलो/एकड़  की दर से खेत में भुरकाव करें। 
  • इस बात का भी ध्यान रखें की उर्वरको के उपयोग के समय खेत में नमी जरूर हो।
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सोयाबीन की फसल में एन्थ्रेक्नोज का प्रबंधन

  • सोयाबीन की फसल में एन्थ्रेक्नोज के लक्षण सबसे पहले प्रजनन वृद्धि चरणों के दौरान देखे जाते हैं। 
  • पत्ते या फली पर इसके लक्षण आमतौर पर गहरे, अनियमित घावों के रूप में दिखाई देते हैं।  
  • जब फली संक्रमित होती है, तो कवक पूरी तरह से फली में भर सकता है और कोई बीज पैदा नहीं होता है, या कम, छोटे बीज बन सकते हैं।  
  • इसके नियंत्रण के लिए टेबुकोनाजोल 10% + सल्फर 65% WG@  500 ग्राम/एकड़ या 
  • कार्बेन्डाजिम 12% + मैनकोज़ब 63% WP@ 300 ग्राम /एकड़ या  
  • थियोफैनेट मिथाइल 70% WP@ 300 मिली/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
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सोयाबीन की फसल में 20 से 30 दिनों की अवस्था में छिड़काव प्रबंधन

  • सोयाबीन की फसल की बढ़वार, पुष्प और फली विकास तथा अन्य अवस्थाओं में भिन्न-भिन्न किस्म के कीट खास तौर पर गर्डल बीटल, ब्लू बीटल आदि एवं कई प्रकार की बीमारियाँ भी सक्रिय रहते हैं।
  • इन कीटों एवं बीमारियों के नियंत्रण लिए बुआई के बाद 20 से 30 दिनों में छिड़काव  प्रबंधन करना बहुत आवश्यक है। इसके लिए निम्न छिड़काव किये जा सकते हैं। 
  • लैंबडा-साइफलोथ्रिन 4.9% CS@ 200 मिली/एकड़ या प्रोफेनोफॉस 50% SC@500 मिली/एकड़ या कार्बेन्डाजिम 12% + मैनकोज़ब 63% WP@300 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
  • बेवेरिया बेसियाना @ 500 ग्राम/एकड़ का छिड़काव कीट के प्रकोप को खत्म करने के लिए आवश्यक है।
  • सीवीड 400 मिली/एकड़ या एमिनो एसिड @ 300 मिली/एकड़ या G A 0.001% @ 300 मिली/एकड़ का छिड़काव फसल के अच्छे विकास के लिए करना बहुत आवश्यक है।
  • छिड़काव के 24 घंटे के अंदर वर्षा हो जाये तो पुनः छिड़काव करें।
  • पत्तियों की निचली सतह पर पूरी तरह से छिड़काव किया जाना चाहिए क्योंकि कीट इसी सतह पर रहते हैं।
  • एक ही कीटनाशक रसायन का छिड़काव पुनः दोहराया नहीं जाना चाहिए।
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मक्का की फसल में बोरर का प्रबंधन

  • मक्का की फसल में बहुत अधिक मात्रा में कीटों एवं इल्लियों का प्रकोप होता है। 
  • ये कीट और इल्ली मक्का की फसल को बहुत अधिक नुकसान पहुँचाते हैं।
  • इन बोरर के अंतर्गत गुलाबी तना इल्ली, तना मक्खी, कट वर्म, ईयर हेड बग, सैनिक कीट आदि आते हैं। 
  • ये कीट मक्का की फसल को फल फूल वृद्धि तीनों अवस्था में बहुत अधिक नुकसान पहुँचाते हैं।
  • इन कीटों के निवारण के लिए साइंट्रानिलिप्रोएल 19.8% + थियामेथोक्साम 19.8% FS @ 6 मिली/किलो बीज की दर से बीज उपचार करें।  
  • फ्लूबेनडामाईड 20% WG @ 100 ग्राम/एकड़ या क्लोरेंट्रानिलिप्रोएल 9.3% + लैम्ब्डा साइहलोथ्रिन 4.6% ZC @ 100 मिली/एकड़ या थियामेथोक्सम 12.6% + लैंबडा साइहलोथ्रिन 9.5% ZC@  80 ग्राम/एकड़ या फिप्रोनिल 40% + इमिडाक्लोरोप्रिड 40% WG @ 40 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
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मध्य प्रदेश के किसानों को अगले तीन साल में सब्सिडी पर दिए जाएंगे 2 लाख सोलर पंप

2 lakh solar pumps to be given on subsidy to farmers of MP in next three years

बिजली के वैकल्पिक स्रोत को सरकार खूब बढ़ावा दे रही है। इसी कड़ी में किसानों को बिजली के लिए सौर उर्जा का इस्तेमाल करने हेतु कुसुम योजना की शुरुआत की गई है। इसके साथ साथ राज्य सरकार सब्सिडी पर सोलर पंप मुहैया करवाने सम्बन्धी योजनाओं को भी शुरू कर रही है।

बात मध्य प्रदेश की करें तो यहाँ आने वाले तीन सालों में 2 लाख सोलर पंप किसानों को देने का लक्ष्य रखा गया है। ग़ौरतलब है की सोलर पंप लगाए जाने से राज्य के किसान भाइयों को बेहतर सिंचाई का लाभ मिलेगा। प्रदेश के किसानों की सोलर पंप लगाने के लिए प्रोत्साहित भी किया जा रहा है। राज्य में मुख्यमंत्री सोलर पंप योजना के अंतर्गत किसानों के लिए वर्तमान समय तक 14 हजार 250 सोलर पंप लगाए भी जा चुके हैं। आने वाले समय में यह संख्या और ज्यादा बढ़ेगी और 2 लाख सोलर पंप स्थापित किये जाएंगे।

स्रोत: किसान समाधान

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मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग मिलेगा? किसानों को होगा लाभ

Basmati rice of Madhya Pradesh will get a GI tag

मध्यप्रदेश के 13 जिलों के लगभग 80,000 किसानों द्वारा उगाये जाने वाली बासमती चावल को मध्यप्रदेश सरकार जीआई टैग दिलाने की कोशिश में। इसके लिए प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से सोमवार को मुलाकात की है। इस मुलाक़ात में उन्होंने राज्य में कई बासमती चावल के लिए जीआई टैग देने में केंद्रीय कृषि मंत्री को सहयोग करने को कहा है।

क्या होता है जीआई टैग?
जीआई टैग दरअसल एक विशिष्ट भौगोलिक संकेत है जो किसी भी उत्पाद के विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति स्थान को इंगित करता है।

राज्य के 13 जिले जिनमें बासमती चावल की खेती की जाती है वे हैं आलंद, ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर, दतिया, गुना, विदिशा, शिवपुरी, रायसेन, सीहोर, जबलपुर, होशंगाबाद और नरसिंहपुर। मुख्यमंत्री ने कृषि मंत्री के साथ हुई बैठक में कहा, ‘‘इन 13 जिलों में उत्पादित चावल को जीआई टैग से इनकार करना राज्य के किसानों और उनकी आजीविका के साथ अन्याय होगा।’’

स्रोत: नवभारत टाइम्स

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बुआई के 25 से 30 दिनों बाद कपास की फसल में करें छिड़काव प्रबंधन

Spray Management in cotton crops during ball formation
  • कपास की फसल की बढ़वार, पुष्प और गूलर का विकास तथा अन्य अवस्थाओं में भिन्न-भिन्न किस्म के कीट एवं बीमारियाँ सक्रिय रहते हैं।  
  • इन कीटों एवं बीमारियों के नियंत्रण लिए 20 से 30 दिनों में छिड़काव प्रबंधन करना बहुत आवश्यक है और इसे आप निम्न प्रकार से कर सकते हैं। 
  • एसिटामिप्रिड 20% SP@ 100 ग्राम/एकड़ या प्रोफेनोफॉस 40% + साइपरमेथ्रिन 4% EC@ 400 मिली/एकड़ या बेवेरिया बेसियाना @ 500 ग्राम/एकड़ का छिड़काव करें। यह छिड़काव कपास की फसल में कीट के प्रकोप को खत्म करने के लिए आवश्यक है।
  • 12:32:16 @ 1 किलो/एकड़ या होमोब्रेसिनोलाइड 0.04 W/W @100 मिली/एकड़ का छिड़काव करें। अच्छे फसल विकास के लिए यह छिड़काव करना बहुत आवश्यक है।
  • छिड़काव के 24 घण्टे के अंदर वर्षा हो जाये तो पुनः छिड़काव करें।
  • पत्तियों की निचली सतह पर पूरी तरह से छिड़काव किया जाना चाहिए क्योंकि कीट इसी सतह पर रहते हैं।
  • एक ही कीटनाशक रसायन का छिड़काव पुनः न दोहराया जाए।
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मिर्च की फसल में पत्तों के मुड़ने की समस्या (लीफ कर्ल)

leaf curl in chilli
  • मिर्च में सबसे अधिक नुकसान पत्तियों के मुड़ने से होती है, जिसे विभिन्न स्थानों में कुकड़ा या चुरड़ा-मुरड़ा रोग के नाम से जाना जाता है।
  • यह थ्रिप्स नमक कीट के प्रकोप के कारण होता है जिससे मिर्च की पत्तियां ऊपर की ओर मुड़ कर नाव का आकार धारण कर लेती है।
  • इसके कारण पत्तियां सिकुड़ जाती हैं, पौधा झाड़ीनुमा दिखने लगता है और इससे रोग से प्रभावित पौधों में फल भी नहीं लग पाते हैं।
  • इस रोग का लक्षण देखते ही पीड़ित पौधे को उखाड़ कर फेंक दें और खेत को खरपतवार से मुक्त रखें।
  • इस रोग के प्रबंधन के लिए प्रिवेंटल @ 100 ग्राम/एकड़ या फिप्रोनिल 5% SC @ 400 मिली/एकड़ या एसीफेट 50% + इमिडाक्लोप्रिड 1.8% SP@ 400 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
  • फसल में किसी प्रकार के कीट का प्रकोप ना होने दें क्योंकि पत्ते मुड़ने की समस्या वाला यह रोग कीटों के प्रकोप के कारण ही होता है।
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अभी और हो सकते हैं टिड्डी दल के हमले, खाद्य एवं कृषि संगठन ने एक महीने सतर्क रहने को कहा

After 27 years in MP, large locust attack, Threat on Moong crop of 8000 crores

खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने टिड्डी दल के हमले से संबंधित अलर्ट जारी किया है। इस अलर्ट में कहा गया है की “देश को अगले एक महीने तक सतर्क रहने की जरुरत है।” एफएओ की तरफ से यह अलर्ट ऐसे समय जारी किया गया है, जब देश पिछले 26 साल के सबसे बड़े टिड्डियों के हमले झेल रहा है। इस बड़े हमले से बचाव के लिए सरकार की तरफ से कई प्रयास किये जा रहे हैं जिसमे ड्रोन और हेलीकॉप्टर जैसे आधुनिक उपकरणों व प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल भी शामिल है।

ग़ौरतलब है की टिड्डियों के हमले से पश्चिमी सीमा पर अवस्थित राज्य राजस्थान सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। राजस्थान के अलावा मध्यप्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, हरियाणा और बिहार जैसे राज्य भी इससे प्रभावित हुए हैं। एफएओ की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि मानसून की बारिश के बाद भारत-पाकिस्तान सीमा से उत्तरी राज्यों की ओर गया टिड्डियों का दल फिर से राजस्थान की तरफ लौट सकता है।

स्रोत: नवभारत टाइम्स

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मिर्च की फसल में 20-30 दिनों बाद उर्वरक प्रबंधन

Fertilizer Management in Chilli Crop after 20-30 days
  • जिस प्रकार मिर्च की रोपाई के समय उर्वरक प्रबंधन आवश्यक होता है ठीक उसी प्रकार रोपाई के 20 से 30 दिनों के बाद भी उर्वरक प्रबंधन करना बहुत आवश्यक होता है। 
  • यह प्रबंधन मिर्च की फसल की अच्छी बढ़वार एवं रोगों के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है। 
  • रोपाई के बाद इस समय में ही पौधे की जड़ ज़मीन में फैलती है और इसीलिए इस समय जड़ों की अच्छी बढ़वार सुनिश्चित करने के लिए उर्वरक प्रबंधन बहुत आवश्यक होता है।  
  • इस समय उर्वरक प्रबंधन के लिए यूरिया @ 45 किलो/एकड़ DAP @ 50 किलो/एकड़, मैग्नेशियम सल्फेट @15 किलो/एकड़, सल्फर@ 5 किलो/एकड़,  जिंक सल्फेट @ 5 किलो/एकड़ की दर से खेत में भुरकाव करें। 
  • इस बात का भी ध्यान रखें की उर्वरकों के उपयोग के समय खेत में नमी जरूर हो।
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