Critical stage of irrigation in Potato

आलू में सिचाई की क्रांतिक अवस्था:-

  • आलू की फसल में सीजन के दौरान उच्चतम मृदा नमी को बांये रखने के लिए उच्च स्तरीय प्रबंधन की आवश्यकता होता है |
  • वृद्धि के कुछ चरण जब जल प्रबंधन बहुत महत्त्वपूर्ण है-
  • 1). अंकुरण अवस्था
  • 2). कंद स्थापित अवस्था
  • 3). कंद बढ़वार अवस्था
  • 4). अंतिम फसल अवस्था
  • 5). खुदाई के पूर्व |

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Sowing time, Planting and Seed Rate of Garlic

लहसुन लगाने का समय, लगाने का तरीका एवं बीज दर:-

  • कलियों की चोपाई मध्य भारत में सितम्बर- नवम्बर तक की जाती हैं|
  • लहसुन की कलियॉं को गाँठ से अलग कर लें यह काम बुआई के समय ही करें|
  • कलियों का छिलका निकल जाने पर वह बुआई के लिए उपयुक्त नहीं होती हैं|
  • कड़क गर्दन वाली लहसुन, जिसके एक एक कली कड़क और अलग अलग हो उपयुक्त होता हैं |
  • बड़ी कलियों (1.5 ग्राम से बड़ी) का चयन करना चाहिए| छोटे, रोग ग्रस्त एवं क्षति ग्रस्त कलियों को हटा दो |
  • लहसुन की बीज दर 400-500 किलो प्रति हे.
  • चयनित कलियों को 2 सेमी. की गहराई पर 15 X 10 सेमी. की दूरी पर लगना चाहिए|

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Nursery bed preparation for Tomato

टमाटर के लिए नर्सरी बनाना:-

  • क्यारियों की लंबाई 3 मी., चौड़ाई 0.6 मी. एवं ऊंचाई 10-15 से.मी. होनी चाहिये ।
  • दो नर्सरी क्यारियों के बीच की दूरी 70 से.मी. होनी चाहिये, ताकि नर्सरी के अंदर निदाई, गुड़ाई एवं सिंचाई जैसी अंतरसस्य क्रियाएं आसानी से की जा सके ।
  • नर्सरी क्यारियों की सतह चिकनी (भुरभुरी) अच्छी तरह से समतल, ऊंची एवं उचित जल निकास वाली होनी चाहिये ।
  • नर्सरी क्यारियों को बुआई के पूर्व मैंकोजेब के द्वारा उपचारित कर लेना चाहिये ।

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Spacing and Seed Rate of Pea

मटर की दूरी एवं बीज दर:-

  • मटर को कतार से कतार में 30 से.मी. तथा बीज से बीज 10 से.मी. की दूरी पर बोना चाहिये ।
  • बीज को 2-3 से.मी. गहरी  बोना चाहिये ।
  • लगभग 100 कि.ग्रा.  बीज/हेक्टर पर्याप्त होता है ।

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Control of Jassids in Brinjal

बैंगन में जैसिड का नियंत्रण:-

  • शिशु एवं वयस्क कीट दोनों हरे रंग के एवं छोटे आकार के होते है।
  • शिशु एवं वयस्क, पत्तियों की निचली सतह से रस चूसते हैं ।
  • ग्रसित पत्तियां ऊपर की तरफ मुड़ जाती है जो बाद में पीली हो जाती है एवं उन पर जले हुये धब्बे बन जाते है ।
  • इनके द्वारा माइकोप्लाज्मा रोग जैसे लघु पर्ण एवं विषाणु रोग जैसे चितकबरापन स्थानांतरित होता है।
  • इस कीट के अत्यधिक प्रभाव देखे जाने पर पौधे में फल लगना कम  हो जाता है।

नियंत्रण:-

  • जेसिड की रोकथाम हेतु पौध रोपाई के 20 दिन बाद से  एसीटामिप्रिड 20% WP @ 80 ग्राम/एकड़ या इमिडाक्लोप्रिड 17.8%@ 80 मिली/ एकड़ दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।

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Happy Ganesh Chaturthi

गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाये|

आपकी खुशियाँ

गणेश जी की सूंड की तरह लम्बी हो

आपकी ज़िंदगी

उनके पेट की तरह बड़ी हो

और जीवन का हर

पल लडडु की तरह मीठा हो,

ग्रामोफोन टीम की और से आपको गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाये |

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Control of Late Blight in Tomato

टमाटर में पछेती झुलसा रोग का नियंत्रण:-

  • यह रोग पौधे की पत्तियों पर किसी भी अवस्था में होता है।
  • भूरे एवं काले बैगनी धब्बे पर्णवृन्त, डंढल, फल और तने के किसी भी भाग पर उत्पन्न हो सकते है।
  • आक्रमण के अंतिम अवस्था में पौधा मर जाता है।
  • यह रोग कम तापमान एवं अत्यधिक नमी होने पर पत्तियों की निचली सतह पर दिखाई देती है।

पढ़ना जारी रखें “Control of Late Blight in Tomato”

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Irrigation Management in Sponge Gourd

गिलकी में सिंचाई प्रबंधन:-

  • भूमि में बीजों के अच्छे अंकुरण के लिये पर्याप्त नमी होनी चाहिये।
  • बीजों के अच्छे अंकुरण के लिये बुवाई करने के पूर्व खेत की सिंचाई करनी चाहिये।
  • अगली सिंचाई बीजों को लगाने के बाद करना चाहिये|
  • खेत में सिंचाई मौसम या भूमि के अनुसार करनी चाहिये।
  • प्रायः गर्मी के मौसम में सिंचाई 4-5 दिनों के अंतराल में एवं ठंड के मौसम में 8-10 दिन के अंतराल से करना चाहिये।

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Suitable Climate and Soil for Brinjal

बैंगन के लिए उपयुक्त मौसम एवं मिट्टी:-

  • बैंगन गर्म जलवायु में उगाये जाने वाला एवं प्रकाश के प्रति असंवेदनशील पौधा है ।
  • यह फसल, पाला के प्रति अत्याधिक संवेदनशील है ।
  • इस फसल की अच्छी वृद्धि एवं उपज हेतु 21 से 27 °C के बीच तापमान की आवश्यकता होती है ।
  • इसे वर्षा एवं ग्रीष्म ऋतु में आसानी से उगाया जा सकता है ।

मिट्टी:-

  • बैंगन को सभी प्रकार की भूमि में आसानी से उगाया जा सकता है ।
  • बैंगन के अच्छे उत्पादन के लिये ऐसे स्थल का चयन करें जो हल्की से मध्यम श्रेणी की हो एवं जिसमें जल निकास की व्यवस्था उत्तम हो ।
  • चयनित  भूमि का पी.एच. मान 5.6 से 6.6 के मध्य होना चाहिये ।

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Suitable Climate and Soil for Cultivation of Okra

भिन्डी की खेती के लिए उपयुक्त मौसम एवं मिट्टी:-

  • भिण्डी गर्म मौसम में उगाई जाने वाली सब्जी है जिसे गर्म व आर्द्र मौसम की लम्बे समय तक आवश्यकता होती है।
  • इसे वर्षाकालीन फसल के रूप में भी उगाया जाता है।
  • यह पाले व कम तापमान के प्रति संवेदनशील है।
  • सामान्यरूप से पैदावार के लिये 24°C से 28°C तापमान उपयुक्त है।
  • 25°C से नीचे तापमान पर बीजों का अंकुरण नही होता है। अच्छे अंकुरण के लिये अनुकूल आर्द्रता व 25°C से 35°C तक का तापमान उपयुक्त है।

मिट्टी:-

  • भिण्डी विभिन्न प्रकार की भूमि में उगाई जा सकती है, परन्तु अधिकतम उत्पादन के लिये जीवांशयुक्त अधिक जल धारण क्षमता वाली दोमट भूमि अधिक उपयुक्त होती है।
  • भूमि का पी.एच. मान 6 से 6.8 होना चाहिये। क्षारीय व लवणीय भूमि एवं उचित जल निकास की व्यवस्था न होना,  फसल के लिये अच्छा नही होता है।

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