मूंग की फसल में खरपतवार प्रबंधन कैसे करें?

How to manage weed in moong crop?
  • मूंग प्रमुख दलहनी फसलों में शामिल है एवं कम समय में अच्छा उत्पादन देने वाली फसल है।
  • मध्य प्रदेश के कई जिले में मूंग की खेती बहुत बड़े पैमाने पर की जाती है।
  • मूंग की बुआई के बाद लगभग 20 से 30 दिन तक किसान को खरपतवारों पर खास ध्यान देना चाहिए।
  • ऐसा इसलिए क्योंकि शुरुआती दौर में खरपतवार फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं।
  • मूंग की फसल में किसान पेन्डीमिथालीन 38.7 CS@ 700 मिली/एकड़ की दर से पूर्व उद्भव खरपतवारनाशी के रूप में उपयोग करें।
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आने वाले 3-4 दिनों में इन राज्यों में हो सकती है बारिश, जानें अपने क्षेत्र का मौसम पूर्वानुमान

weather forecast

पिछले कुछ दिन चले बारिश के दौर के खत्म होने के बाद अब मध्य प्रदेश समेत मध्य भारत के ज्यादातर क्षेत्र में गर्मी फिर से बढ़ने लगी है और आने वाले दिनों में भी इन क्षेत्रों में मौसम के शुष्क बने रहने की संभावना है। 

इसके अलावा बात करें राजधानी दिल्ली की तो यहाँ के मौसम में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। यहाँ तापमान कभी कम तो कभी ज्यादा हो रही है। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के साथ साथ रुक-रुक कर बारिश हो रही है। इस बर्फबारी का असर देश के अन्य क्षेत्रों में भी दिख रहा है। इसी असर के कारण देश के उत्तर पूर्वी राज्यों में आने वाले 3-4 दिनों में तेज बारिश होने की संभावना है। 

स्रोत: कृषि जागरण

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इस योजना से किसानों को हर महीने मिलेगा 3 हजार रुपए का पेंशन

Pradhan Mantri Kisan Maandhan Yojana

भारत सरकार द्वारा किसानों के समृद्धि के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। ऐसी ही एक योजना है प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना जो सितंबर 2019 में शुरू हुई थी। इस योजना के माध्यम से वित्त वर्ष 2021-22 तक लगभग 5 करोड़ लाभार्थियों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के तहत पात्र किसान भाइयों को हर महीने 3 हजार रुपए की पेंशन दी जाती है। अगर किसी किसान की उम्र 60 साल की है तो उन्हें पीएम किसान योजना के तहत हर साल 6 हजार रुपए तो मिलेंगे हीं और इसके अलावा हर महीना 3 हजार रुपए की पेंशन भी दी मिलेगी।

बता दें की किसान मानधन योजना के अंतर्गत छोटे और सीमांत किसान भाइयों को लाभ दिया जाएगा। वैसे किसान जो 18 से 40 साल की उम्र के बीच के हैं वे इस योजना में पंजीकरण करवाने के लिए पात्र होंगे। पीएम किसान मानधन योजना के तहत अब तक कुल 21,20,310 किसान भाइयों ने अपना पंजीकरण करवाया है।

स्रोत: कृषि जागरण

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तरबूज की फसल में 30-35 दिनों में ये छिड़काव जरूर करें

Do these spray in 30-35 days in watermelon crop
  • तरबूज की फसल में 30-35 दिनों की अवस्था में फूल बनने की शुरुआत होती है।
  • इस अवस्था में कीट प्रकोप के रूप में थ्रिप्स, एफिड, लीफ माइनर जैसे रस चूसक कीटों का प्रकोप बहुत अधिक होता है।
  • कवक एवं जीवाणु जनित रोगों के रूप में पत्ती झुलसा रोग, जड़ गलन, तना गलन जैसे रोगों का प्रकोप बहुत अधिक होता है।
  • लीफमाइनर के नियंत्रण के लिए एबामेक्टिन 1.9% EC@ 150 मिली/एकड़ उपयोग करें।
  • एसिटामिप्रिड 20% SP @ 100 ग्राम/एकड़ रस चूसक कीटों के नियंत्रण के लिए उपयोग करें।
  • इन दोनों प्रकार के कीटों के जैविक नियंत्रण के रूप में बवेरिया बेसियाना @ 250 ग्राम/एकड़ की दर से उपयोग करें।
  • थायोफिनेट मिथाइल 70% W/W@ 500 ग्राम/एकड़ सभी प्रकार के कवक रोगों के नियंत्रण के लिए उपयोग करें।
  • कवक जनित रोगों के जैविक नियंत्रण के रूप में स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस @ 250 ग्राम/एकड़ की दर से उपयोग करें।
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फैट और कोलेस्ट्रॉल-फ्री कड़कनाथ मुर्गे मध्यप्रदेश के झाबुआ की हैं पहचान

Fat and cholesterol-free Kadkanath chicken are the identity Jhabua of MP
  • ज्ञात हो कि कड़कनाथ मुर्गा मध्यप्रदेश के झाबुआ की पहचान है।
  • इन मुर्गों को कालीमासी के नाम से भी जाना जाता है।
  • भारत सरकार से कड़कनाथ को जीआई टैग भी मिल चुका है।
  • यह मुर्गा काले रंग, काले खून, काले हड्डी और काले मांस के साथ लजीज स्वाद के लिए पहचाना जाता है।
  • यह मुर्गा फैट और कोलेस्ट्रॉल-फ्री भी होता है।
  • कड़कनाथ में आयरन एवं प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है, जबकि कॉलेस्ट्राल और फैट की मात्रा अन्य प्रजाति के मुर्गों से काफी कम पाई जाती है।
  • बाजार में इसका रेट अन्य प्रजातियों के मुर्गों से काफी अधिक होता है।
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मूंग में ना होने दें मॉलीब्लेडिनम कमी, इससे फसल को मिलते हैं कई फायदे

Use of molybdenum in green germ
  • मॉलीब्लेडिनम एक सूक्ष्म पोषक तत्व है जिसकी मूंग की फसल को वैसे तो बहुत कम मात्रा में आवश्यकता होती है पर ये कम मात्रा भी इसके लिए काफी जरूरी होती है।
  • मॉलीब्लेडिनम की बहुत कम मात्रा भी मूंग की फसल की अच्छी बढ़वार देने में मदद करती है।
  • मॉलीब्लेडिनम मूंग की फसल में नाइट्रोजन के रासायनिक परिवर्तन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • मॉलीब्लेडिनम की कमी से ग्रस्त मूंग की फसल का विकास सही से नहीं हो पाता है।
  • इसकी कमी के कारण पत्तियों के किनारे पीले हो जाते हैं साथ ही इसकी कमी के लक्षण नाइट्रोज़न की कमी के समान ही होते हैं।
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इस योजना से महिलाएं 10 लाख रुपए का लोन लेकर शुरू कर सकती हैं अपना बिजनेस

PNB Mahila Udyami Nidhi Yojana

महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। ऐसी ही एक योजना है पीएनबी महिला उद्यमी निधि योजना जो महिलाओं को अपना बिजनेस शुरू करने के लिए प्रेरित करता है।

इस योजना के अंतर्गत कम ब्याज दर एवं कम शर्तों पर ऋण दिए जाते हैं। इससे 10 लाख रुपए तक का ऋण लिया जा सकता है। इस ऋण का उपयोग नया बिजनेस शुरू करने के लिए और साथ ही साथ पहले से मौजूद किसी बिजनेस को बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है।

इस योजना से लिए गए ऋण को 5 से 10 साल बाद वापिस किया जाना होता है। इसमें सिर्फ महिलाएं ही आवेदन कर सकती हैं और हितग्राही महिला का बिजनेस में 51% मालिकाना हक होना जरूरी होता है।

स्रोत: कृषि जागरण

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आज से बदल जाएगा मध्य प्रदेश का मौसम, जानें मौसम पूर्वानुमान

Weather Forecast

मध्य प्रदेश समेत मध्य भारत के कई क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश की गतिविधियां आज से थम जायेगी। दरअसल आज से वेदर सिस्टम उत्तर एवं मध्य भारत से आगे बढ़ते हुए अब उत्तर पूर्वी क्षेत्रों में पहुंचेगा और बारिश का दौर भी मध्य और उत्तरी भारत से खत्म हो जाएगा।

वीडियो स्रोत: स्काईमेट वेदर

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अगर जानवरों में आ रहे हों ये लक्षण तो यह TB रोग का हो सकता है प्रकोप

Symptoms of TB in animals
  • जिस प्रकार मनुष्य में TB रोग होता है ठीक उसी प्रकार जानवरों में भी यह रोग होता है।
  • इस रोग के कारण पशु कमजोर और सुस्त हो जाते हैं। कभी-कभी तो इसके कारण पशुओं के नाक से खून निकलने लगता है और सूखी खांसी भी हो सकती है।
  • इसके कारण पशुओं में खाने के रूचि भी काफी कम हो जाती है तथा फेफड़ों में सूजन भी हो जाती है।
  • इस रोग से ग्रसित पशुओं को बाकी स्वस्थ पशुओं से दूर रखना चाहिए।
  • पशुओं में इसके लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएँ।
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तरबूज की उपज के लिए राजस्थान के दो रियासतों में क्यों छिड़ गई थी युद्ध?

When the war broke out in two princely states of Rajasthan for the production of watermelon

तरबूज की खेती आजकल कई किसान करते हैं और इससे अच्छा लाभ भी उन्हें मिलता है। पर क्या आप जानते हैं की तरबूज की खेती की वजह से इतिहास में एक बार दो रियासतों के बीच युद्ध छिड़ गई थी? जी हाँ ये वाक्या दरअसल राजस्थान में सन 1644 ईस्वी में पेश आया था जब तरबूज की फसल के लिए बीकानेर और नागौर रियासतों के बीच युद्ध छिड़ गई और इसमें हजारों सैनिकों की जान भी चली गई थी।

बीकानेर और नागौर रियासत की सीमा पर उगे तरबूज की फसल के लिए दो खेत मालिकों के बीच हुई कहासुनी इस युद्ध के शुरुआत का कारण बनी। दरअसल बीकानेर रियासत के आखिरी गांव में तरबूज की फसल लगाई गई। इस तरबूज की बेल फैलते-फैलते दूसरी रियासत के गांव में चली गई। जब तरबूज के फल उगने लगे तब इसी फल पर दावेदारी के लिए यह युद्ध हुई। इस युद्ध में जीत बीकानेर रियासत की हुई और नागौर के सैनिक बुरी तरह हार गए थे।

स्रोत: न्यूज़ 18

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