कम खर्च में ज्यादा उपज से समृद्ध होंगे किसान, जानें सरकार की योजनाएं

Farmers will be rich with more produce in less expenditure

देश में खेती-किसानी को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार आधुनिक तकनीक को अपनाने की सलाह दे रही है। ऐसी तकनीक, जहां खेती में कम पानी और कम खाद का उपयोग हो। जैसा कि सभी जानते हैं, जलवायु परिवर्तन के कारण फसलों को काफी नुकसान पहुंचता है। ऐसे में आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर इस नुकसान से बचा जा सकता है।

सरकार कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। जहां ड्रिप इरीगेशन और पॉलीहाउस जैसे प्रोजेक्ट पर भारी सब्सिडी दी जा रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान भाई इस तकनीक को अपना सके। इस तकनीक के जरिए बहुत कम पानी का प्रयोग करके बढ़िया फसल प्राप्त की जा सकती है।

इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में फसल की ऐसी किस्मों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जो कम समय और बिना रोग के तैयार हो जाए। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से किसान भाईयों को 35 ऐसी किस्मों का तोहफा दिया गया है, जो कि पोषण से भरपूर होने के साथ ही रोगरोधी हैं। आप भी सरकार की इन योजनाओं से जुड़कर उन्नत खेती के जरिए भारी मुनाफा कमा सकते हैं।

स्रोत: टीवी 9

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इंदौर मंडी में 30 मार्च को क्या रहे प्याज भाव?

Indore onion Mandi Bhaw

वीडियो के माध्यम से जानें आज यानी 30 मार्च के दिन इंदौर के मंडी में क्या रहे प्याज के मंडी भाव?

वीडियो स्रोत: यूट्यूब

अब ग्रामोफ़ोन के ग्राम व्यापार से घर बैठे, सही रेट पर करें अपनी लहसुन-प्याज जैसी फसलों की बिक्री। भरोसेमंद खरीददारों से खुद भी जुड़ें और अपने किसान मित्रों को भी जोड़ें।

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तरबूज की फसल में लगने वाले रोगों का ऐसे करें प्रबंधन

Management of diseases affecting watermelon crop

  • किसान भाइयों तरबूज की फसल से अच्छा उत्पादन लेने के लिए फसल बुवाई से फसल कटाई तक पौध संरक्षण पर ध्यान रखना चाहिए। तरबूज की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कुछ प्रमुख रोगों की पहचान व प्रबंधन निम्नलिखित प्रकार से कर सकते हैं।  

  • डाउनी मिल्ड्यू रोग में पत्तियों की ऊपरी सतह पर पीला धब्बा एवं निचली सतह पर भूरा चूर्ण जमा हो जाता है एवं पाउडरी मिल्ड्यू रोग में पत्तियों की ऊपरी एवं निचली सतह पर सफेद रंग का चूर्ण दिखाई देता है। इन दोनों रोगों के प्रबंधन के लिए कस्टोडिया (एज़ोक्सिस्ट्रोबिन 11%+ टेबुकोनाजोल 18.3% एससी) @ 300 मिली प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।

  • गमी स्टेम ब्लाइट रोग जिसे गमोसिस ब्लाइट के नाम से भी जानते हैं। इस रोग का एक मुख्य लक्षण यह है कि इस रोग से ग्रसित तने से गोंद जैसा चिपचिपा पदार्थ निकलता है l इसके प्रबंधन के लिए जटायु (क्लोरोथालोनिल 75% डब्ल्यूपी) @ 300 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।

  • एन्थ्रेक्नोज रोग में फल बिना पके ही गिरने लगते हैं जिससे उपज में भारी नुकसान होता है। इसके प्रबंधन के लिए कोनिका (कासुगामायसिन 5% + कॉपर आक्सीक्लोराइड 45% डब्ल्यूपी) @ 300 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।

अपने खेत को ग्रामोफ़ोन एप के मेरे खेत विकल्प से जोड़ें और पूरे फसल चक्र में पाते रहें स्मार्ट कृषि से जुड़ी सटीक सलाह व समाधान। इस लेख को नीचे दिए गए शेयर बटन से अपने मित्रों संग साझा करें।

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ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल में शून्य जुताई से मिलेंगे कई लाभ

Advantages of zero tillage in summer green gram crop
  • किसान भाइयों शून्य जुताई या नो टिल फार्मिंग, खेती करने का वह तरीका है जिसमें भूमि को बिना जोते ही बार-बार कई वर्षों तक फसलें उगाई जाती है। 

  • शून्य जुताई द्वारा पूरे फसल चक्र में लगभग 50 -60 दिन की बचत होती है इस समय किसान खेत में मूंग जैसी फसलें लगाकर अतिरिक्त आय ले सकते हैं।

  • इस समय किसान भाई गेहूँ की कटाई के बाद फसल अवशेष हटाए बिना हल्की सिंचाई कर हैप्पी सीडर, पंच प्लांटर, जीरो टिलेज सीड ड्रिल आदि मशीनों द्वारा मूंग की बुवाई कर निम्न लाभ उठा सकते हैं – 

  • शून्य जुताई प्रक्रिया अपनाने से जुताई की लागत, सिंचाई जल एवं समय की बचत होती है। 

  • इसके साथ ही ऊर्जा, इंधन व बिजली की लागत में भी कमी आती है।

  • उर्वरक, कीटनाशक एवं अन्य रसायनों के उपयोग में बचत होती है।

  • मिट्टी की भौतिक, जैविक संरचना एवं रासायनिक स्थिति में सुधार होता है।

  • उपज एवं गुणवत्ता में भी वृद्धि होती है। 

स्मार्ट कृषि एवं उन्नत कृषि उत्पादों से सम्बंधित ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए रोजाना पढ़ते रहें ग्रामोफ़ोन के लेख। उन्नत कृषि उत्पादों व यंत्रों की खरीदी के लिए ग्रामोफ़ोन के बाजार विकल्प पर जाना ना भूलें।

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भीषण गर्मी से फसलों को नुकसान की आशंका, 10 अप्रैल तक नहीं मिलेगी राहत

know the weather forecast,

इस समय उत्तर पश्चिम, मध्य तथा पूर्वी भारत में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है जिससे रवि सीजन की फसलों को नुकसान होने की आशंका है। कम से कम 10 अप्रैल तक उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में बारिश की संभावना नजर नहीं आ रही है। बारिश ना होने के कारण गर्मी से राहत भी संभव नहीं है। उत्तर पूर्वी भारत में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं केरल तथा कर्नाटक सहित लक्षद्वीप में तेज बारिश संभव है।

स्रोत: स्काइमेट वेदर

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रतलाम मंडी में 29 मार्च को क्या रहे नए गेहूँ के भाव?

Ratlam Mandi wheat Rate

नए गेहूँ भाव में आज कितनी तेजी या मंदी देखने को मिली? वीडियो के माध्यम से देखें की आज मंडी में कैसा चल रहा है गेहूँ का भाव !

स्रोत: यूट्यूब

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इस योजना से मध्यप्रदेश के किसान विदेश जाकर सीख सकते हैं आधुनिक कृषि तकनीक

Mukhyamantri Kisan Videsh Adhyayn Yatra Yojana

मध्य प्रदेश के किसानों को विकसित देशों में आधुनिक कृषि तकनीकों से रूबरू करवाने और इसकी प्रायोगिक जानकारी दिलवाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा एक योजना चलाई जाती है जिसका लाभ किसान भाई प्राप्त कर सकते हैं। इस योजना का नाम है मुख्यमंत्री किसान विदेश अध्ययन यात्रा योजना।

इस योजना का लाभ मध्यप्रदेश के सभी वर्ग के लघु तथा सीमांत किसान उठा सकते हैं। इस योजना के अंतर्गत चयनित होने पर कुल व्यय का 90%, अजजा एवं अजा वर्ग के किसानों को 75% तथा अन्य किसानों को 50% तक का अनुदान सरकार प्रदान करती है।

पिछले कुछ वर्षों में इस योजना के अंतर्गत किसानों के विभिन्न दल विदेश यात्रा पर गए। इस दौरान उन्होंने उन्नत कृषि, उद्धनिकी कृषि अभियांत्रिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन से जुड़ी आधुनिक तकनीकें ब्राजील – आर्जेन्टीना, फिलिपिन्स – ताईवान जैसे देशों में सीखी।

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएँ http://mpkrishi.mp.gov.in/hindisite_New/pdfs//Videsh_Yatra.pdf

स्रोत: किसान समाधान

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कपास भाव रिकॉर्ड हाई पर, देखें क्यों आ रही है इतनी तेजी?

Cotton price at record high

कपास किसानों के लिए अच्छी खबर आ रही है। कपास के भाव में तेजी देखने को मिल सकती है। वीडियो के माध्यम से देखें कपास के भाव में कौन कौन से कारकों के कारण तेजी देखने को मिल रही है?

वीडियो स्रोत: मार्केट टाइम्स टीवी

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इंदौर मंडी में 29 मार्च को क्या रहे प्याज भाव?

Indore onion Mandi Bhaw

वीडियो के माध्यम से जानें आज यानी 29 मार्च के दिन इंदौर के मंडी में क्या रहे प्याज के मंडी भाव?

वीडियो स्रोत: यूट्यूब

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मिलेगी मूंग की उच्च पैदावार, उचित समय पर करें बुवाई का कार्य

Right time of sowing of green gram for high yield
  • किसान भाइयों ग्रीष्मकालीन मूंग की बुवाई फरवरी से 10 अप्रैल तक कर सकते हैं। वहीं खरीफ के मौसम में जून जुलाई माह इसकी बुवाई के लिए उपयुक्त रहता है।

  • बुवाई में देरी होने से उच्च तापमान एवं गर्म हवाएं मूंग के फूल एवं फली अवस्था पर विपरीत प्रभाव डालती है, फलस्वरूप पैदावार कम होती है। 

  • इसी प्रकार देर से बोई गई फसल के परिपक्व होने के साथ ही समय से पूर्व आ जाने वाली मानसूनी  वर्षा पत्तों से संबंधित अनेक बीमारियों का कारण बनती है। 

  • ग्रीष्मकालीन मूंग गेहूँ कटाई के बाद बिना जुताई के फसल अवशेषों की उपस्थिति में भी हैप्पी सीडर द्वारा बोई जा सकती है। 

  • यदि खेत में गेहूँ के अवशेष ना हो तो जीरो टिल ड्रिल से बुवाई की जा सकती है।

  • जीरो टिलेज द्वारा समय, धन, ऊर्जा तीनों की बचत होती है।

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