संपूर्ण देश में तेज बारिश की है संभावना, देखें मौसम पूर्वानुमान

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मुंबई में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है इसके साथ ही गुजरात के दक्षिण जिलों में भी मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है। मध्य प्रदेश के दक्षिणी भागों सहित दक्षिणी राजस्थान विदर्भ मराठवाड़ा कर्नाटक तथा पहाड़ों पर भी भारी बारिश संभव है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिमी जिलों सहित तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा में तेज बारिश। दिल्ली तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हल्की बारिश होगी।

स्रोत: स्काइमेट वेदर

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मध्य प्रदेश की प्रमुख मंडियों में गेहूँ भाव में दिखी कितनी तेजी?

wheat mandi rates

मध्य प्रदेश के अलग अलग मंडियों जैसे खातेगांव, खटोरा, कालापीपल, गोरखपुर, लटेरी और रतलाम आदि में क्या चल रहे हैं गेहूँ के भाव? आइये देखते हैं पूरी सूची।

विभिन्न मंडियों में गेहूं के ताजा मंडी भाव

कृषि उपज मंडी

न्यूनतम मूल्य (प्रति क्विंटल)

अधिकतम मूल्य (प्रति क्विंटल)

अमरपाटन

1900

2100

भीकनगांव

2104

2203

धामनोद

2032

2208

गोहद

2035

2070

गोरखपुर

1800

1950

कालापीपाल

1870

2015

कालापीपाल

1750

1900

कालापीपाल

1855

2230

करही

2010

2040

खातेगांव

1980

2174

खटोरा

2176

2255

लटेरी

1855

1985

लटेरी

2700

2700

लटेरी

2020

2200

पचौर

1800

2111

पिपल्या

2000

2240

रतलाम

2030

2530

सेमरी हरचंद

1900

1960

शाहगढ़

1940

2000

श्योपुरकलां

2000

2000

सिमरिया

1810

1880

उदयपुरा

1860

1940

उमरिया

1800

1950

स्रोत: एगमार्कनेट

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खेत की मेड़ पर करें ये खेती, लाखों की कमाई के साथ पाएं दोहरा लाभ

ग्रामीण इलाकों में बांस की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। एक बार बांस की फसल लगाने के बाद इससे 30 से 40 साल तक मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है। बांस का प्रयोग बल्ली, सीढ़ी, टोकरी, चटाई, फर्नीचर, खिलौने और सजावट के सामान से लेकर घर बनाने तक में भी किया जाता है। इस कारण बाजार में भी बांस की खूब मांग है। ऐसे में किसानों की आय बढ़ाने का यह एक बढ़िया स्रोत है। भारत सरकार भी देश में बांस की खेती करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है।

इस दिशा में केंद्र सरकार द्वारा बांस की खेती को लेकर ‘राष्ट्रीय बांस मिशन’ चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से बांस की खेती के लिए किसानों की आर्थिक मदद की जाती है। बता दें कि बांस की खेती करना बहुत ही आसान और फायदेमंद है। इस लेख में हम आपको बांस की खेती के फायदे के बारे में बताएंगे।

खेतों की मेड़ का ऐसे करें इस्तेमाल

आपके पास अगर बांस के पेड़ लगाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है तो, आप इसकी फसल के लिए मेड़ का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। ऐसा करने से खेत में लगी दूसरी फसलों को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। इसके साथ ही खेत में लगी फसलों की आवारा पशुओं से सुरक्षा भी होगी। इस तरह बांस की खेती से किसानों को दोहरा लाभ प्राप्त होगा।

सहफसली तकनीक से कमाएं दोहरा लाभ

सहफसली तकनीक से खेती करने के लिए बांस की फसल एक बढ़िया विकल्प है। बांस के हर पौधे की बीच में ठीक-ठाक जगह छोड़कर इसमें अदरक, हल्दी, लहसुन एवं अलसी की पौध लगाई जा सकती है। इस तरह खेती करने से किसान भाई बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं।

बांस को आप बीज, कटिंग या फिर राइजो़म तरीके से भी लगा सकते हैं। बता दें कि बांस के पेड़ की आयु लगभग 40 साल तक होती है, ऐसे में 150 से 250 बांस के पेड़ लगाकर किसान 40 सालों तक लाखों की कमाई कर सकते हैं।  

स्रोत: आज तक

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सब्जी वर्गीय फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्व क्यों है जरूरी ?

भूमि में  मुख्य पोषक तत्वों के लगातार इस्तेमाल से सूक्ष्‍म पोषक तत्वों की कमी दिनों दिन बढ़ती जा रही है। किसान मुख्य पोषक तत्वों का उपयोग फसलों में ज्यादा करते है एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे – तांबा, जिंक, लोहा, मोलिब्डेनम, बोरॉन, मैंगनीज आदि का लगभग नगण्य उपयोग करते हैं। पौधों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होने पर उसके लक्षण पौधों में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने लगता है। फसल में इन पोषक तत्वों की कमी  इन्हीं तत्वों की पूर्ति के माध्यम से की जा सकती है।  

  • मॉलिब्डेनम कार्य:- पौधों में नाइट्रेट के अवशोषण के बाद मोलिब्डेनम नाइट्रेट को तोड़ने का काम करता है, जिससे नाइट्रेट पौधों के विभिन्न भागो में चला जाता है। इस कारण पौधे में नाइट्रोजन की कमी नहीं होती है और पौधे का विकास अच्छी तरह से होता है। मोलिब्डेनम जड़ ग्रंथि जीवाणुओं द्वारा वायुमंडलीय नाइट्रोजन के निर्धारण में मदद करता है। इसकी कमी से फूलगोभी में व्हिपटेल रोग होता है।

  • आयरन / लोहा:- आयरन क्लोरोफिल निर्माण में सहायक होता है। पौधों में श्वसन तथा प्रकाश-संश्लेषण के लिए आवश्यक है, इसकी कमी से पौधों में  हरिमाहीनता हो जाता है।

  • जिंक / जस्ता:- ज़िंक पौधों में एंजाइम क्रिया को उत्तेजित करता है। यह हार्मोन्स बनाने में सहायक होता है। साथ ही यह पौधे में रोग रोधक क्षमता को बढ़ाता है एवं नाइट्रोजन और फास्फोरस के उपयोग में सहायक होता है। 

  • तांबा/कॉपर:- तांबा एंजाइम में इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण का काम करता है। ये एंजाइम पौधों में ऑक्सीडेशन और रिडेक्शन क्रिया में सहयोग करता है। इसी क्रिया के द्वारा पौधों का विकास एवं प्रजनन होता है। 

  • बोरॉन:- फूलों में परागण, परागनली का निर्माण, फल व दाना बनाना, पादप हार्मोन के उपापचय एवं पौधे के सभी अंगों तक पहुंचाने का कार्य बोरान तत्व का है।

  • मैंगनीज:- यह क्लोरोफिल निर्माण में सहायक होता है। विभिन्न क्रियाओं में यह उत्प्रेरक का कार्य करता है। पौधों में मैंगनीज की कमी से पत्तियों में छोटे-छोटे भूरे धब्बे बन जाते हैं। इनकी कमी के लक्षण दिखाई देने पर, सूक्ष्म पोशाक तत्व, मिक्सॉल (लौह, मैंगनीज, जस्ता, तांबा, बोरॉन, मोलिब्डेनम) @ 250 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें।

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देश के विभिन्न मंडियों में 7 जुलाई को क्या रहे फलों और फसलों के भाव?

Todays Mandi Rates

देश के विभिन्न शहरों में फलों और फसलों की कीमतें क्या हैं?

मंडी

फसल

न्यूनतम मूल्य (किलोग्राम में)

अधिकतम मूल्य (किलोग्राम में)

विजयवाड़ा

गाजर

32

35

विजयवाड़ा

शिमला मिर्च

55

विजयवाड़ा

खीरा

25

विजयवाड़ा

पत्ता गोभी

20

विजयवाड़ा

अदरक

60

विजयवाड़ा

लहसुन

65

विजयवाड़ा

करेला

25

विजयवाड़ा

हरी मिर्च

30

विजयवाड़ा

आलू

23

विजयवाड़ा

बैंगन

15

गुवाहाटी

प्याज़

11

गुवाहाटी

प्याज़

15

गुवाहाटी

प्याज़

16

गुवाहाटी

प्याज़

17

गुवाहाटी

प्याज़

11

गुवाहाटी

प्याज़

15

गुवाहाटी

प्याज़

16

गुवाहाटी

प्याज़

17

गुवाहाटी

प्याज़

16

गुवाहाटी

प्याज़

22

गुवाहाटी

प्याज़

24

गुवाहाटी

प्याज़

25

गुवाहाटी

लहसुन

22

27

गुवाहाटी

लहसुन

28

35

गुवाहाटी

लहसुन

35

40

गुवाहाटी

लहसुन

40

42

गुवाहाटी

लहसुन

23

26

गुवाहाटी

लहसुन

27

35

गुवाहाटी

लहसुन

35

40

गुवाहाटी

लहसुन

40

42

वाराणसी

प्याज़

10

11

वाराणसी

प्याज़

12

14

वाराणसी

प्याज़

14

15

वाराणसी

प्याज़

15

16

वाराणसी

प्याज़

10

11

वाराणसी

प्याज़

13

14

वाराणसी

प्याज़

14

15

वाराणसी

प्याज़

16

17

वाराणसी

लहसुन

12

18

वाराणसी

लहसुन

17

25

वाराणसी

लहसुन

25

30

वाराणसी

लहसुन

30

35

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स्वर्ण शक्ति धान लगाने से किसानों को होगा दोहरा फायदा

खरीफ सीजन में अधिकतर किसान भाई धान की खेती करते हैं। हालांकि दूसरी फसलों के मुकाबले धान की फसल में ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है। वहीं परम्परागत तरीके से एक किग्रा चावल उत्पादन प्राप्त करने में लगभग 3 हजार से 5 हजार लीटर पानी का इस्तेमाल होता है। यह भी भूमिगत जलस्तर के नीचे जाने का एक मुख्य कारण है। 

ऐसे में पानी की बचत को लेकर राज्य सरकारें धान की सीधी बुवाई पर जोर दे रही हैं। अगर आप भी सरकार की इस मुहिम में जुड़कर पानी की बढ़ती कमी को रोकना चाहते हैं तो, धान की खेती के लिए इसकी सीधी बुवाई एक अच्छा विकल्प है। इसके लिए आपको विशेष बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

धान की सीधी बुवाई के लिए ध्यान रखने योग्य बातें

सीधी बुवाई के लिए धान की सही किस्म का चयन करना बहुत जरूरी है। इसके लिए धान की ऐसी किस्म का चयन करें जिससे सूखे की स्थिति या कम पानी में भी बढ़िया पैदावार प्राप्त हो सके। कृषि विशेषज्ञों ने एक ऐसी ही ‘स्वर्ण शक्ति धान’ की किस्म तैयार की है, जो धान के किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। 

जानें स्वर्ण शक्ति धान की विशेषताएं

  • स्वर्ण शक्ति धान की खेती कम पानी या फिर अंसिचित क्षेत्र में भी बढ़िया तरीके से की जा सकती है।

  • इसकी सीधी बुवाई बिना कीचड़ एवं बिना जल जमाव वाली वायवीय मिट्टी में कर सकते हैं।

  • इस धान की किस्म की फसल अवधि मात्र 115 से 200 दिन की होती है, जिससे प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 4 से 5 टन चावल का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

  • यह एक उच्च गुणवत्ता वाली धान की किस्म है, जिसमें सूक्ष्म पोषक तत्व के रूप में मुख्यत: जिंक और लोहा प्रचुर मात्रा में जाए जाते हैं।

स्रोत: किसान समाधान

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मध्यप्रदेश की चुनिंदा मंडियों में क्या चल रहे लहसुन के भाव?

Indore garlic Mandi bhaw

मध्य प्रदेश के अलग अलग मंडियों जैसे देवास, जावरा, भोपाल और मनावर आदि में क्या चल रहे हैं लहसुन के भाव? आइये देखते हैं पूरी सूची।

विभिन्न मंडियों में लहसुन के ताजा मंडी भाव

कृषि उपज मंडी

न्यूनतम मूल्य (प्रति क्विंटल)

अधिकतम मूल्य (प्रति क्विंटल)

भोपाल

600

1800

देवास

200

800

जावरा

982

11000

कुक्षी

1400

2200

मनावर

2300

2500

मनावर

2400

2600

स्रोत: एगमार्कनेट

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मध्यप्रदेश मंडियों में क्या चल रहे टमाटर के भाव?

आज मध्य प्रदेश के अलग अलग मंडियों जैसे भोपाल, खरगोन, देवास, धार और हाटपिपलिया आदि में क्या चल रहे हैं टमाटर के भाव? आइये देखते हैं पूरी सूची।

विभिन्न मंडियों में टमाटर के ताजा मंडी भाव

कृषि उपज मंडी

न्यूनतम मूल्य (प्रति क्विंटल)

अधिकतम मूल्य (प्रति क्विंटल)

बड़वानी

1500

1500

भोपाल

1000

1800

देवास

500

1500

धार

950

1300

धार

1950

2500

हाटपिपलिया

1800

2800

खरगोन

800

2500

खरगोन

500

2000

कुक्षी

1500

2200

मनावर

2267

2467

मनावर

2400

2600

पंधाना

800

860

पोरसा

2000

2000

शिवपुरी

1200

1200

सिंगरोली

2000

2000

स्रोत: एगमार्कनेट प्रोजेक्ट

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जानिए, सोयाबीन की फसल में सल्फर क्यों है जरूरी?

👉🏻गत वर्षों से संतुलित उर्वरकों के अन्तर्गत केवल नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश के उपयोग पर ही बल दिया जा रहा था। सल्फर के उपयोग पर विशेष ध्यान न दिये जाने के कारण मृदा परीक्षण के दौरान मिट्टी में गंधक (सल्फर) की कमी पाई गई। आज उपयोग में आ रहे सल्फर रहित उर्वरकों जैसे यूरिया, डीएपी, एनपीके तथा म्यूरेट आफ पोटाश के उपयोग से सल्फर की कमी निरंतर बढ रही है। इस नतीजे को ध्यान में रखते हुए सल्फर का खेत में डालना बहुत जरूरी है। 

👉🏻पौधों के उचित वृद्धि तथा विकास के लिये आवश्यक 18 तत्वों में से गंधक एक महत्वपूर्ण तत्व है। यह तिलहनी फसलों में तेल की मात्रा को बढ़ाने के लिए बहुत आवश्यक है। सल्फर द्वितीयक पोषक तत्व है इसकी बड़ी मात्रा में पौधों को आवश्यकता होती है। 

👉🏻सोयाबीन की उच्च पैदावार के लिए उचित पोषण प्रबंधन बहुत ही आवश्यक है सोयाबीन में सल्फर की मांग बीज भराव के दौरान अधिकतम होती है, क्योंकि सोयाबीन के बीज में प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसलिए बीज बनने के दौरान सोयाबीन में समुचित प्रोटीन निर्माण के लिए सल्फर और नाइट्रोजन पोषण में संतुलन बहुत ही महत्वपूर्ण है।

👉🏻सोयाबीन की फसल में सल्फर आपूर्ति के लिए मुख्यतः – बेंटोनाइट सल्फर और परंपरागत सल्फर युक्त उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है, सोयाबीन जैसी कम दिनों की फसलों में सल्फर की तुरंत और लगातार आपूर्ति के लिए, ग्रोमर सल्फर 90% जीआर या ग्रोमर सल्फा मैक्स 90% जीआर @ 5 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से उपयोग कर सकते है।

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ज्यादातर राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, देखें मौसम पूर्वानुमान

know the weather forecast,

मुंबई और उसके आसपास के जिलों में भारी बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त हो रहा है। अगले 3 दिनों के दौरान दक्षिणी गुजरात मुंबई तथा कर्नाटक के तटीय भागों में भारी बारिश होगी। गुजरात दक्षिण पश्चिमी मध्य प्रदेश तथा दक्षिणी राजस्थान में भी मूसलाधार बारिश से कई जगहों पर पानी भरने की आशंका है। दिल्ली पंजाब और हरियाणा में हल्की बारिश। उत्तर प्रदेश और बिहार के इलाके अभी शुष्क बने रहेंगे।

स्रोत: स्काइमेट वेदर

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