देश के विभिन्न शहरों में फलों और फसलों की कीमतें क्या हैं? |
|||
मंडी |
फसल |
न्यूनतम मूल्य (किलोग्राम में) |
अधिकतम मूल्य (किलोग्राम में) |
रतलाम |
अदरक |
22 |
24 |
रतलाम |
आलू |
21 |
22 |
रतलाम |
टमाटर |
28 |
32 |
रतलाम |
हरी मिर्च |
44 |
48 |
रतलाम |
कद्दू |
15 |
18 |
रतलाम |
भिन्डी |
25 |
28 |
रतलाम |
नींबू |
35 |
42 |
रतलाम |
फूलगोभी |
15 |
16 |
रतलाम |
बैंगन |
13 |
16 |
रतलाम |
आम |
40 |
45 |
रतलाम |
पपीता |
14 |
16 |
रतलाम |
खीरा |
12 |
14 |
रतलाम |
शिमला मिर्च |
28 |
30 |
रतलाम |
केला |
30 |
– |
लखनऊ |
प्याज़ |
10 |
11 |
लखनऊ |
प्याज़ |
12 |
13 |
लखनऊ |
प्याज़ |
14 |
– |
लखनऊ |
प्याज़ |
15 |
16 |
लखनऊ |
प्याज़ |
10 |
– |
लखनऊ |
प्याज़ |
12 |
– |
लखनऊ |
प्याज़ |
15 |
– |
लखनऊ |
प्याज़ |
17 |
– |
लखनऊ |
लहसुन |
25 |
– |
लखनऊ |
लहसुन |
30 |
– |
लखनऊ |
लहसुन |
30 |
38 |
लखनऊ |
लहसुन |
45 |
50 |
लखनऊ |
आलू |
17 |
18 |
लखनऊ |
आम |
30 |
32 |
लखनऊ |
अनन्नास |
20 |
25 |
लखनऊ |
हरा नारियल |
43 |
46 |
लखनऊ |
मोसंबी |
28 |
32 |
लखनऊ |
शिमला मिर्च |
50 |
60 |
लखनऊ |
हरी मिर्च |
40 |
45 |
लखनऊ |
नींबू |
40 |
45 |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
14 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
16 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
18 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
19 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
13 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
17 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
18 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
19 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
15 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
20 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
21 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
22 |
– |
गुवाहाटी |
लहसुन |
22 |
27 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
28 |
35 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
35 |
40 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
40 |
42 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
23 |
26 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
27 |
35 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
35 |
40 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
40 |
42 |
रतलाम |
प्याज़ |
3 |
6 |
रतलाम |
प्याज़ |
6 |
9 |
रतलाम |
प्याज़ |
9 |
12 |
रतलाम |
प्याज़ |
12 |
14 |
रतलाम |
लहसुन |
7 |
12 |
रतलाम |
लहसुन |
13 |
22 |
रतलाम |
लहसुन |
22 |
32 |
रतलाम |
लहसुन |
32 |
43 |
शाजापुर |
प्याज़ |
3 |
5 |
शाजापुर |
प्याज़ |
6 |
8 |
शाजापुर |
प्याज़ |
9 |
13 |
भीषण बारिश की बन रही है संभावना, देखें मौसम पूर्वानुमान
मानसून अब मध्य भारत में सक्रिय हो जाएगा तथा मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ सहित गुजरात और पूर्वी राजस्थान में कई स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। पंजाब हरियाणा उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी तथा कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। दिल्ली में हल्की बारिश और बौछारें संभव है।
स्रोत: स्काइमेट वेदर
Shareमौसम सम्बंधित पूर्वानुमानों की जानकारियों के लिए रोजाना ग्रामोफ़ोन एप पर जरूर आएं। आज की जानकारी पसंद आई हो तो लाइक और शेयर जरूर करें।
मध्यप्रदेश की चुनिंदा मंडियों में क्या चल रहे सोयाबीन के भाव ?
मध्य प्रदेश के अलग अलग मंडियों जैसे मन्दसौर, मनावर, खरगोन, रतलाम, कालापीपल और खातेगांव आदि में क्या चल रहे हैं सोयाबीन के भाव? आइये देखते हैं पूरी सूची।
विभिन्न मंडियों में सोयाबीन के ताजा मंडी भाव |
||
कृषि उपज मंडी |
न्यूनतम मूल्य (प्रति क्विंटल) |
अधिकतम मूल्य (प्रति क्विंटल) |
आगर |
2500 |
6008 |
अशोकनगर |
3000 |
6114 |
बड़नगर |
4280 |
6087 |
बदनावर |
4025 |
6450 |
बाणपुरा |
4500 |
5977 |
बैतूल |
5700 |
6001 |
भीकनगांव |
5450 |
6271 |
बीन |
5500 |
6205 |
छिंदवाड़ा |
5300 |
6037 |
गोरखपुर |
5800 |
5800 |
इछावर |
4000 |
6090 |
ईसागढ़ |
5400 |
6100 |
इटारसी |
4500 |
5750 |
झाबुआ |
5650 |
5700 |
जोबात |
5900 |
5900 |
कालापीपाल |
4420 |
6250 |
खाचरोडी |
5451 |
5981 |
खंडवा |
4000 |
6080 |
खरगोन |
5736 |
6159 |
खातेगांव |
3120 |
6161 |
खातेगांव |
3400 |
6195 |
खिरकिया |
4000 |
6065 |
कोलारास |
4400 |
5985 |
लटेरी |
5855 |
5855 |
मक्सी |
4500 |
6200 |
मनावर |
6140 |
6245 |
मन्दसौर |
4700 |
6051 |
महू |
3400 |
3400 |
मोमान बडोडिया |
5900 |
6050 |
नागदा |
5426 |
6026 |
नसरुल्लागंज |
5500 |
5980 |
पचौरी |
5550 |
6040 |
पथरिया |
5175 |
6150 |
पिपल्या |
3000 |
6100 |
रतलाम |
2740 |
6131 |
सनावद |
5600 |
5800 |
सांवेर |
5600 |
6200 |
सतना |
5681 |
5780 |
श्योपुरकलां |
5760 |
5865 |
शुजालपुर |
5000 |
6001 |
टिमरनी |
3011 |
6050 |
उज्जैन |
2302 |
6090 |
स्रोत: एगमार्कनेट
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प्याज़ की फसल में खरपतवार प्रबंधन कैसे करें
-
प्याज़ के अच्छे उत्पादन के लिए, फसल में पहली निराई बुवाई के 25-30 दिन बाद और दूसरी निराई बुवाई के 60-65 दिनों बाद करनी जरूरी हो जाता है। ये अवस्था क्रांतिक अवस्था कहलाती है।
-
मृदा में प्राकृतिक रूप से, बहुत से मुख्य एवं सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो अधिक खरपतवारों के प्रकोप के कारण प्याज़ की फसल को पूरी तरह नहीं मिल पाते हैं |
-
इसके कारण फसलों में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और फसल की कुल उपज पर भी बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है |
-
प्याज़ की अच्छी फसल उत्पादन के लिए खरपतवार प्रबंधन समय – समय पर करना बहुत आवश्यक होता है। इसके लिए निम्र प्रकार से खरपतवार प्रबंधन करना बहुत आवश्यक है। ध्यान रहे कि खरपतवार प्रबंधन बुवाई के ठीक 20-25 दिन पूरे होने पर और खरपतवार निकलने के तुरंत बाद करना चाहिए।
डेकेल (चौड़ी व सकरी पत्ती के लिए)
-
डेकेल (प्रोपाक्विज़ाफोप 5% + ऑक्सीफ्लुरोफेन 12% ईसी) @ 350 मिली/एकड़, 150 से 200 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें। फ्लैट फैन नोज़ल का प्रयोग करें एवं खेतो में नमी बनाये रखें। खरपतवार की 2-4 पत्ती के अवस्था में छिड़काव करने पर सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त होता है।
टरगा सुपर (सकरी पत्ती के लिए)
-
टरगा सुपर (क्विज़ालोफॉप एथिल 5% ईसी) @ 300 मिली, प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें। यह एक चयनात्मक शाकनाशी है। फ्लैट फैन नोज़ल का प्रयोग करें एवं खेतो में नमी बनाये रखें। साथ ही 2-4 पत्ती के चरण में छिड़काव करने पर सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त होता है। इसका उपयोग चौड़ी पत्ती वाली फसलों में संकरी पत्ती वाले खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
एजिल (सकरी पत्ती के लिए)
-
प्रोपाक्विज़ाफॉप 10% ईसी @ (एजिल) 250 मिली, प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें। यह एक चयनात्मक खरपतवारनाशी है। इसका उपयोग वार्षिक और बारहमासी घास को नियंत्रण के लिए किया जाता है। फ्लैट फैन नोज़ल का प्रयोग करें एवं खेतो में नमी बनाये रखे। खरपतवार की 2-4 पत्ती के अवस्था में छिड़काव करने पर सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त होता है।
Shareमहत्वपूर्ण जानकारियों के लिए रोजाना पढ़ते रहें ग्रामोफ़ोन के लेख। आज की जानकारी पसंद आई हो तो लाइक और शेयर करना ना भूलें।
इस फसल सुरक्षा यंत्र से किसानों को मिल रहा बहुत फायदा, जानें कृषि यंत्र के बारे में
किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से हर साल काफी नुकसान पहुंचता है। इस मुश्किल का हल निकालते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने कई नए यंत्र और तकनीके विकसित की हैं। इन यंत्रों की मदद से किसानों को भविष्य की आपदाओं के बारे में जानकारी मिल जाती है, ताकि किसान पहले से ही तैयारी करके फसलों में होने वाले नुकसान से बच सकें।
फसल सुरक्षा यंत्र और इसके फायदे
इसी क्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने एक ऐसा फसल सुरक्षा यंत्र तैयार किया है, जो किसानों के लिए बहुत उपयोगी और कारगर साबित हो रहा है। इस यंत्र द्वारा पहले से ही मौसम की जानकारी जैसे हवा, पानी, आंधी, तूफान का अलर्ट मिल जाता है। वहीं मौसम पूर्वानुमान के साथ ही कीट बीमारी का प्रकोप, भू-जलस्तर एवं मिट्टी में उपस्थित पोषक तत्वों की जानकारी भी किसान के मोबाईल पर ऑटोमेटिक प्राप्त हो जाती है। इसके अनुसार किसान समय रहते अपनी फसलों की सुरक्षा कर सकते हैं।
किसान भाई का यंत्र को लेकर अनुभव
छत्तीसगढ़ के डोंगरगांव विकासखंड के निवासी किसान गुलाब वर्मा ने फसल सुरक्षा यंत्र को बहुत फायदेमंद बताया है। यह यंत्र उन्होंने उद्यानिकी विभाग से 50 हजार रूपए की लागत में प्राप्त किया है। जिसके माध्यम से उन्हें मोबाइल पर सही समय पर खेत और मौसम से जुड़ी सभी जानकारी मिल रही हैं। हाल ही में उन्हें फसल में होने वाली फफूंदीजनक रोग से सुरक्षा के लिए अलर्ट प्राप्त हुआ, जिसके तहत गुलाब वर्मा ने जागरूकत के साथ फसल सुरक्षा के लिए व्यवस्था की और भविष्य में होने वाले नुकसान से खुद को बचा लिया।
स्रोत : कृषि समाधान
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देश के विभिन्न मंडियों में 22 जुलाई को क्या रहे फलों और फसलों के भाव?
देश के विभिन्न शहरों में फलों और फसलों की कीमतें क्या हैं? |
|||
मंडी |
फसल |
न्यूनतम मूल्य (किलोग्राम में) |
अधिकतम मूल्य (किलोग्राम में) |
लखनऊ |
प्याज़ |
10 |
11 |
लखनऊ |
प्याज़ |
12 |
13 |
लखनऊ |
प्याज़ |
14 |
– |
लखनऊ |
प्याज़ |
15 |
16 |
लखनऊ |
प्याज़ |
10 |
– |
लखनऊ |
प्याज़ |
12 |
– |
लखनऊ |
प्याज़ |
15 |
– |
लखनऊ |
प्याज़ |
17 |
– |
लखनऊ |
लहसुन |
25 |
– |
लखनऊ |
लहसुन |
30 |
– |
लखनऊ |
लहसुन |
30 |
38 |
लखनऊ |
लहसुन |
45 |
50 |
लखनऊ |
आलू |
18 |
19 |
लखनऊ |
आम |
30 |
– |
लखनऊ |
अनन्नास |
20 |
25 |
लखनऊ |
नारियल हरा |
46 |
50 |
लखनऊ |
मोसंबी |
28 |
32 |
लखनऊ |
शिमला मिर्च |
50 |
60 |
लखनऊ |
हरी मिर्च |
40 |
45 |
लखनऊ |
नींबू |
40 |
45 |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
14 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
16 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
18 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
19 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
13 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
17 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
18 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
19 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
15 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
20 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
21 |
– |
गुवाहाटी |
प्याज़ |
22 |
– |
गुवाहाटी |
लहसुन |
22 |
27 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
28 |
35 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
35 |
40 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
40 |
42 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
23 |
26 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
27 |
35 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
35 |
40 |
गुवाहाटी |
लहसुन |
40 |
42 |
शाजापुर |
प्याज़ |
4 |
5 |
शाजापुर |
प्याज़ |
5 |
7 |
शाजापुर |
प्याज़ |
10 |
14 |
जयपुर |
प्याज़ |
13 |
14 |
जयपुर |
प्याज़ |
16 |
– |
जयपुर |
प्याज़ |
19 |
20 |
जयपुर |
प्याज़ |
5 |
6 |
जयपुर |
प्याज़ |
8 |
– |
जयपुर |
प्याज़ |
9 |
– |
जयपुर |
प्याज़ |
12 |
– |
जयपुर |
लहसुन |
8 |
10 |
जयपुर |
लहसुन |
15 |
18 |
जयपुर |
लहसुन |
22 |
25 |
जयपुर |
लहसुन |
30 |
35 |
रतलाम |
प्याज़ |
3 |
6 |
रतलाम |
प्याज़ |
6 |
9 |
रतलाम |
प्याज़ |
9 |
12 |
रतलाम |
प्याज़ |
12 |
13 |
रतलाम |
लहसुन |
7 |
12 |
रतलाम |
लहसुन |
13 |
22 |
रतलाम |
लहसुन |
22 |
32 |
रतलाम |
लहसुन |
32 |
45 |
एमपी, राजस्थान समेत कई राज्यों में फिर होगी तेज बारिश, देखें मौसम पूर्वानुमान
मानसून की रेखा अब उत्तर भारत से होकर गुजर रही है जिससे पंजाब हरियाणा दिल्ली उत्तर प्रदेश तथा पूर्वी भारत में हल्की से मध्यम बारिश होगी। 24 घंटे बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा गुजरात के उत्तरी जिलों में फिर बारिश की गतिविधियां बढ़ जाएंगी तथा कई स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। पहाड़ों पर मूसलाधार वर्षा संभव है। पूर्वोत्तर राज्यों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। केरल तथा कर्नाटका के तटीय भागों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी।
स्रोत: स्काइमेट वेदर
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मध्यप्रदेश की चुनिंदा मंडियों में क्या चल रहे प्याज़ के ताजा भाव ?
मध्य प्रदेश के अलग अलग मंडियों जैसे बदनावर, बड़वाह, इछावर, देवास, हरदा, खरगोन, जबलपुर, खंड़वा, मन्दसौर और मनावर आदि में क्या चल रहे हैं प्याज़ के भाव? आइये देखते हैं पूरी सूची।
विभिन्न मंडियों में प्याज़ के ताजा मंडी भाव |
||
कृषि उपज मंडी |
न्यूनतम मूल्य (प्रति क्विंटल) |
अधिकतम मूल्य (प्रति क्विंटल) |
अलीराजपुर |
1000 |
2000 |
बदनावर |
500 |
1500 |
बड़वाह |
1000 |
2000 |
भोपाल |
300 |
1400 |
ब्यावरा |
400 |
1000 |
छिंदवाड़ा |
800 |
1200 |
देवास |
400 |
1200 |
देवास |
400 |
1200 |
गौतमपुरा |
300 |
500 |
हरदा |
700 |
800 |
इछावर |
525 |
1170 |
जबलपुर |
1100 |
1500 |
जावरा |
350 |
1180 |
कालापीपाल |
100 |
1250 |
कालापीपाल |
100 |
1200 |
खंडवा |
300 |
1200 |
खरगोन |
500 |
1500 |
खरगोन |
500 |
1500 |
मनावर |
900 |
1100 |
मन्दसौर |
200 |
1000 |
पिपरिया |
350 |
1200 |
सबलगढ़ |
1000 |
1000 |
सैलाना |
100 |
1281 |
शामगढ़ |
520 |
720 |
थांदला |
900 |
1000 |
स्रोत: एगमार्कनेट
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एक लाख की लागत से करें गुलाब की खेती, सालाना कमाएं लाखों रूपए
किसान अच्छी आमदनी के लिए अनाज की खेती के अलावा बागवानी भी कर रहे हैं। जिनमें कई किसान तो एक ही जमीन पर पारंपरिक फसलों के साथ-साथ फल, फूल, सब्जियों और औषधी की खेती कर रहे हैं। इसी क्रम में सरकार अरोमा मिशन की तरह कई योजनाओं के माध्यम से फूलों की खेती को बढ़ावा दे रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान बागवानी के जरिए भी बढ़िया कमाई कर सकें।
अगर आप भी बागवानी करने की सोच रहे हैं, तो गुलाब की खेती एक बेहतर विकल्प है। एक बार इसके पौधों की बुवाई करने के बाद अगले 10 सालों तक फूलों का उत्पादन मिलता रहता है। फूलों के अलावा गुलाब की कलम की भी बाजार में खूब मांग है। एक्सपर्ट की मानें तो एक लाख की लागत लगाकर सालभर में 6 से 7 लाख का लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
ऐसे करें गुलाब की खेती
गुलाब की बागवानी के लिए नर्सरी में इसकी पौध तैयारी की जाती है। हालांकि कलम विधि से किसानों को ज्यादा मुनाफा मिलता है। इसकी खेती के लिए हर तरह की मिट्टी अनुकूल रहती है, हालांकि दोमट मिट्टी में इसके पौध का विकास तेजी से होता है और अच्छी गुणवत्ता वाले फूल प्राप्त होते हैं। वहीं बरसात के मौसम में जल निकासी वाली दोमट मिट्टी बढ़िया मानी गई है।
बता दें कि फूलों के बेहतरीन विकास के लिए खुली हवा और तेज धूप की जरूरत होती है, इसलिए ध्यान रखें कि गुलाब की खेती खुले खेत में की जाए। अगर खेत में कीड़े या बीमारियों का प्रकोप देखने को मिले तो जैविक कीट नाशकों के प्रयोग से छुटकारा पाया जा सकता है।
स्रोत: एबीपी
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जानिए धान की खेती में नील हरित शैवाल का उपयोग कैसे करें
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यह एक नाइट्रोज़न स्थिरीकरण जीवाणु नील हरित शैवाल है, जो प्रकाश संश्लेषी सूक्ष्म जीव होते है।
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जो नाइट्रोजन के स्थिरीकरण में सहायक है। नील-हरित शैवाल को ‘सायनोबैक्टीरिया’ भी कहा जाता है|
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यह सूक्ष्म जीव गुणात्मक रूप से बाकी जीवाणु वर्ग से अधिक लाभकारी होता है| इसलिए ये सायनोबैक्टीरिया कहलाते है।
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सभी नील-हरित शैवाल नाइट्रोजन के स्थिरीकरण में सहायक नहीं होते हैं। नील-हरित शैवाल की कुछ प्रजातियाँ एनाबीना अजोला, एनाबीना फर्टिलिसिया, एनाबिना लेवेन्छरी, नॉस्टॉक फॉरमीडियम, आसिलेटोरिया, ट्राइकोडेसियम, इत्यादि नाइट्रोजन के स्थिरीकरण में सहायक होते हैं|
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नील-हरित शैवाल की उन प्रजातियों में हिटरोसिस्ट युक्त व हिटरोसिस्ट रहित दोनों प्रजातियां शामिल हैं, नील-हरित शैवाल धान की फसल के लिए बहुत उपयोगी हैं।
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