रबी धान की नर्सरी तैयार करते समय इन बातों का रखें ध्यान

How to prepare rabi paddy nursery
  • अगर आप रबी सीजन में धान की खेती करने जा रहे हैं और इसकी नर्सरी तैयार कर रहे हैं तो इसके लिए एक एकड़ खेत में रोपाई हेतु जल स्रोत के पास 400 वर्ग मीटर क्षेत्र का चयन करें।

  • इसके बाद मिट्टी पलटने वाले हल से 2-3 सूखी जुताई करें और 400 वर्ग मीटर नर्सरी क्षेत्र में 4 क्विंटल गोबर की खाद या कम्पोस्ट खाद डालें एवं सिंचित करके 2 दिन के लिए छोड़ दें।

  • इसके बाद इसमें दो बार कल्टीवेटर का उपयोग करें और खेत तैयार करें साथ हीं डीएपी 16 किग्रा को समान रूप से मिलाएं।

  • इसके बाद खेत को पलेवा करें, पलेवा लगाने के बाद, छोटी छोटी क्यारियां बना लें। इन क्यारी की लंबाई 8-10 मीटर एवं चौड़ाई 2.5 मीटर रखें।

  • दो क्यारियों के बीच में 30-50 सेमी का चैनल छोड़ दें और बीजों को क्यारियों में समान रूप से बोयें।

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मैक्सरूट हे पिकाचे फायदे जाणून घेऊन अधिक चांगले पोषण देण्यास उपयुक्त आहे

MaxxRoot

  • हे पिकांचे उगवण वाढवते.

  • त्यामुळे मुळे खूप चांगल्या प्रकारे वाढतात.

  • वनस्पतीद्वारे प्रमुख आणि सूक्ष्म पोषक घटकांची शोषण क्षमता सुधारते.

  • हे पीक उत्पादन वाढविण्यात मदत करते.

  • हे उत्पादित पिकांची गुणवत्ता सुधारते.

  • गहू, धान, बटाटा, मिरची, आले, कांदा, तंबाखू, पुदीना, टोमॅटो, मोहरी, शेंगदाणे, ऊस, वांगी आणि इतर सर्व भाज्यांसह मेक्सरूटचा वापर केला जाऊ शकतो.

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गेहूँ की फसल में पोषक तत्व प्रबंधन एवं जड़ माहू का नियंत्रण

Nutrient management and control measure of root aphid in wheat crops

पोषक तत्व प्रबंधन: गेहूँ की फसल में 20-25 दिन की अवस्था में, अच्छे पौध विकास के लिए, यूरिया 40 किलोग्राम + जिंक सल्फेट @ 5 किलोग्राम + कोसावेट (सल्फर 90% डब्ल्यूजी) @ 5 किलोग्राम + मेजरसोल (फास्फोरस 15% + पोटेशियम 15% + मैंगनीज 15% + जिंक 2.5% + सल्फर 12%) @ 5 किलोग्राम, को आपस में मिलाकर एक एकड़ क्षेत्र के हिसाब से समान रूप से भुरकाव करें एवं भुरकाव के बाद हल्की सिंचाई करें।  

जड़ माहू के क्षति के लक्षण: यह कीट नवंबर से फरवरी माह तक अधिक मिलता है। ये पारदर्शी कीट हैं जो बहुत छोटे और कोमल शरीर वाले पीले भूरे रंग के होते हैं। यह पौधों के आधार के पास या पौधों की जड़ों पर मौजूद होते है एवं पौधों का रस चूसते है। रस चूसने के कारण पत्तियां पीली हो जाती हैं या समय से पहले परिपक्व हो जाती हैं एवं पौधे मर जाते हैं। 

नियंत्रण के उपाय: इस कीट के नियंत्रण के लिए, सिंचाई से पहले उर्वरक, रेत या मिट्टी में भारतीय गेहूँ एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल के अनुसार  थियानोवा 25 (थियामेथोक्सम 25 % डब्ल्यूजी) @ 100 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से भुरकाव करें एवं मीडिया (इमिडाक्लोप्रिड 17.80% एसएल) @ 60 से 70 मिली + सिलिकोमैक्स गोल्ड @ 50 मिली + मैक्सरुट (ह्यूमिक एसिड + पोटेशियम + फुलविक एसिड) @ 100 ग्राम, प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें। 

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मटर की फसल में अधिक फूल धारण के लिए जरूरी छिड़काव!

Necessary spraying for more flowers in the pea crop!

मटर की फसल में अच्छे फूल धारण के लिए न्यूट्रीफुल मैक्स (फुलविक एसिड का अर्क– 20% + कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम ट्रेस मात्रा में 5% + अमीनो एसिड) @ 250 मिली या डबल (होमोब्रासिनोलाइड 0.04% डब्ल्यू/डब्ल्यू) @ 100 मिली + बोरोन @ 150 ग्राम प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें। 

छिड़काव के फायदे 

  • इससे फूल अधिक लगते है एवं फलो की रंग एवं गुणवत्ता को बढ़ाता है। 

  • सूखे, पाले आदि के खिलाफ पौधो की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

  • जड़ से पोषक तत्वों के परिवहन को भी बढ़ाता है। 

  • डबल एक हार्मोन है जो फूल के साथ साथ पौधो की भी वृद्धि करता है। 

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गेहूँ में ट्राई कोट मैक्स के उपयोग से तेज होगी फसल ग्रोथ की रफ़्तार

The use of Tri-Coat Maxx in wheat will speed up the growth of the crop
  • ट्राई-कोट मैक्स में जैविक कार्बन 3%, ह्यूमिक, फुलविक, कार्बनिक पोषक तत्वों का एक मिश्रण है।

  • यह अच्छे बीज अंकुरण के लिए प्रभावी है।

  • इससे उर्वरक दक्षता बढ़ती है और तीव्र जड़ विकास भी मिलता है। 

  • यह फसल में विभिन्न पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाता है।

  • यह पौधों की वानस्पतिक विकास एवं प्रजनन क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। 

  • इससे फसल हरी भरी एवं स्वस्थ रहती है।

  • यह एक जैविक उत्पाद है इसलिए यह मिट्टी की संरचना में सुधार करता है।

ह्यूमिक एसिड: ह्यूमिक एसिड बीज के अंकुरण एवं जड़ विकास को बढ़ाता है। मिट्टी में पहले से मौजूद पोषक तत्वों की उपलब्धता को बढ़ाता है एवं सूखा के प्रति सहनशील बनाता है। मिट्टी में उपलब्ध सूक्ष्म जीवों की गतिविधि को बढ़ाता है। जिससे यह एक उत्कृष्ट जड़ उत्तेजक बन जाता है।

फुलविक एसिड: फुलविक एसिड से प्रकाश संश्लेषण की क्रिया तीव्र होती है। मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व को अवशोषित करने में मदद करता है।

मात्रा: ट्राई-कोट मैक्स @ 4 किग्रा प्रति एकड़ के हिसाब से भूमि की तैयारी या खाद के साथ जमीन में भुरकाव करें एवं बुवाई के 21 से 35 दिन बाद ट्राई-कोट मैक्स 4 किग्रा प्रति एकड़ के हिसाब से एक बार फिर से भुरकाव कर सिंचाई करें और पाएं बेहतरीन उत्पादन।

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मक्के की फसल में फॉल आर्मी वर्म के लक्षण एवं नियंत्रण के उपाय!

Measures for the problem of fall armyworm pest in maize crop

यह कीट मक्के की फसल की सभी अवस्थाओं में आक्रमण करते हैं। सामान्यतः यह मक्के की पत्तियों पर आक्रमण करते हैं परंतु अधिक प्रकोप होने पर यह भुट्टे को भी नुकसान पहुंचाने लगते हैं। इल्ली पौधे के ऊपरी भाग या कोमल पत्तियों पर अधिक आक्रमण करते हैं। ग्रसित पौधे की पत्तियों पर छोटे – छोटे छेद दिखाई देते हैं। नवजात इल्ली पौधे की पत्तियों को खुरच कर खाते हैं, जिससे पत्तियों पर सफेद धारियां दिखाई देते हैं। जैसे-जैसे इल्लियां बड़ी होती हैं, पौधे की ऊपरी पत्तियों को पूर्ण रूप से खाती जाती हैं। अंत में भुट्टे पर हमला करते है जिससे  गुणवत्ता और उपज दोनों में कमी आती है।

नियंत्रण के उपाय

भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान के अनुसार इसके नियंत्रण के लिए इमानोवा (इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी) @ 80 ग्राम या कोस्को (क्लोरोट्रानिलिप्रोले 18.5% एससी) 80 मिली + सिलिकोमैक्स गोल्ड  @ 50 मिली प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।

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आलू में मिट्टी चढ़ाने के पहले कंद विकास के लिए पोषण प्रबंधन

Nutrient management for tuber development in potato crop

आलू की बुवाई के 20-25 दिन बाद एवं मिट्टी चढ़ाने के पहले, यूरिया 45 किलोग्राम + एमओपी 50 किलोग्राम + कोसावेट (सल्फर 90% डब्ल्यूडीजी) @ 6 किलोग्राम + जिंक सल्फेट @ 5 किलोग्राम + मैग्नीशियम सल्फेट @ 5 किलोग्राम + कैलबोर (बोरॉन 4 + कैल्शियम 11 + मैग्नीशियम 1 + पोटैशियम 1.7 + सल्फर 12 %) @ 5 किलोग्राम, इन सभी को आपस में मिलाकर एक एकड़ के हिसाब से भुरकाव करें।

उपयोग के फायदे 

  • इससे पौधों को आवश्यक पोषक तत्व, सूक्ष्म एवं मुख्य पोषक तत्व मिलता है जो पौध वृद्धि के साथ साथ कंद विकास में भी मदद करता है। 

  • साथ ही प्रकाश संश्लेषण, शर्करा के परिवहन में और कोशिका भित्ति के निर्माण में सहायक होता है।

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भेंडीच्या या सुधारित वाणांची लागवड करुन शेतकऱ्यांना चांगला नफा मिळू शकेल.

Advanced varieties of Okra whose cultivation will give good yield
  • आज आपण भेंडीच्या काही मुख्य प्रकारांबद्दल चर्चा करीत आहोत, त्या द्वारे शेतकऱ्यांना चांगले उत्पन्न मिळू शकते.

  • स्वर्ण |  राधिका, महिको NO-10, नुनहेम्स सिंघम 7000 सीड्स वापरा.

  • या जातींची रोपे मध्यम आकाराची असतात आणि पाने छोटी असतात. 

  • या वाणांना 2 ते 4 शाखा आहेत आणि फळांची पहिली तोडणी 45 ते 51 दिवसांत घेता येते.

  • त्यांचे फळ 12 ते 14 सेमी किंवा 12 ते 16 सेमी लांबीचे आणि 1.5 ते 1.8 सेमी व्यासाचे आहे.

  • या जातींमध्ये चांगले शेल्फ लाइफसह गडद हिरवी मऊ फळे असतात ज्याचे वजन 12 ते 15 ग्रॅम असते.

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ऐसी फसल ग्रोथ और कहाँ, आ गया थर्ड जेनरेशन ग्रोथ बूस्टर जीवा मैक्स

Accelerate crop growth with the third generation growth booster Jiva Maxx
  • जीवा मैक्स थर्ड जेनरेशन यानी तीसरी पीढ़ी का फसलों का ग्रोथ बूस्टर (पौध वृद्धि कारक) है। यह हाइड्रोलाइज्ड प्रोटीन कॉम्प्लेक्स का एक अच्छी तरह से संतुलित उत्तेजित क्लोरोफिल उत्पाद है।

  • जीवा मैक्स का उपयोग फसलों के वानस्पतिक विकास, सफेद जड़ विकास, उपज की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसकी मदद से फसल अच्छी उपज की भी प्राप्ति होती है।

  • यह फसलों में पोषक तत्वों की मात्रा और चयापचय गतिविधि को बढ़ाने के लिए भी काम करता है।

  • फसलों में इसका उपयोग 2 मिली प्रति लीटर पानी के साथ छिड़काव के रूप में करें। अगर फसल में ड्रिप सिंचाई सिस्टम हो तो ड्रिप के माध्यम से 500 मिली प्रति एकड़ का उपयोग करें। 

  • आप जीवा मैक्स का उपयोग बीज उपचार के रूप में भी कर सकते हैं इसके लिए आप 2 मिली प्रति किग्रा बीज का उपयोग करें। 

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रबी धान के लिए मुख्य खेत की तैयारी एवं पोषण प्रबंधन

Main field preparation and nutrition management for rabi paddy crop
  • रबी धान की रोपाई के लिए, मुख्य खेत की तैयारी करते समय, जुताई से 1 या 2 दिन पूर्व गोबर की खाद @ 4 टन + स्पीड कम्पोस्ट @ 4 किग्रा + + कॉम्बैट – ट्राईकोडर्मा विरिडी 1.0% डब्ल्यूपी @ 2 किग्रा, प्रति एकड़ के हिसाब से समान रूप से भुरकाव करें, एवं खेत में पानी भर दें और मिट्टी को पानी सोखने दें। 

  • जुताई के समय पानी की गहराई 2.5 सेमी रखें। धान की फसल के लिए पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें तथा 2-3 जुताई कल्टीवेटर से करें। इसके बाद, खेत को मचाकर एक समान कर ले, इससे समान खेत में पानी की सामान्य गहराई बनी रहती है।

  • पोषण प्रबंधन: रोपाई के दिन कीचड़ में, यूरिया- 20 किग्रा + एसएसपी- 50 किग्रा + डीएपी- 25 किग्रा + एमओपी- 20 किलो + धान समृद्धि किट – 11 किग्रा, किट में शामिल तत्व (ट्राई-कोट मैक्स @ 4 किलोग्राम + टीबी 3 @ 3 किलोग्राम + ताबा जी, @ 4 किलोग्राम) इन सभी को आपस में मिलाकर एक एकड़ क्षेत्र के हिसाब से समान रूप से भुरकाव करें। पौध रोपण के लिए कतार से कतार एवं पौध से पौध की दूरी 20×15 सेमी रखें।  

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