कन्सोर्टिया पीके बॅक्टेरियांचे महत्त्व

Importance of consortia PK bacteria
  • यात दोन प्रकारच्या बॅक्टेरियाचे मिश्रण आहे. फॉस्फरस सोल्युबिलीझिंग (पी.एस.बी.) आणि पोटॅश मोबिलिझिंग बॅक्टेरिया (के.एम.बी).

  • माती आणि पिकांचे दोन प्रमुख घटक असलेल्या पोटॅश आणि फॉस्फरसच्या पुरवठ्यात मदत करते, डाळींमध्ये त्याचा जास्त  वापर केला जातो.

  • हे जीवाणू जमिनीत विरघळणारे पोटॅश आणि फॉस्फरस रूपांतरित करते जे वनस्पती प्रदान करतात.

  • यामुळे वेळेवर झाडाला आवश्यक घटक मिळतात आणि पीक चांगले वाढते.

  • पिकांचे उत्पादन वाढते तसेच मातीत पोषक तत्त्वांची उपलब्धता देखील होते.

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पेरणीच्या 1 ते 5 दिवसांत बटाटा पिकांमध्ये तण व्यवस्थापन

Weed Management in Potato Crop 1-5 Days of Sowing
  • बटाट्याचे पीक हे मुख्य रब्बी पीक आहे, पावसाळ्यानंतर उर्वरित जमिनीत जास्त ओलावा असल्याने बटाटा पिकांची पेरणी झाल्यावर तण मोठ्या प्रमाणात वाढू लागते.

  • वेळेवर आणि योग्य तणनाशकाचा वापर करून सर्व प्रकारच्या तणांवर नियंत्रण ठेवता येते.

  • रासायनिक पध्दत: – या पद्धतीत रसायनांचा वापर करून तणनियंत्रण केले जाते. वेळोवेळी या रसायनांचा वापर करून तण खूप चांगल्या प्रकारे नियंत्रित केले जाऊ शकते.

  • पेरणीनंतर 1 ते 3 दिवसानंतर: – तणनियंत्रणाच्या रासायनिक नियंत्रणासाठी पेरणीच्या 1 ते 3 दिवसानंतर पेंडमीथेलिन 38.7% सी.एस. 700 मिली / एकरी दराने फवारणी करावी.

  • अशा प्रकारे फवारणीमुळे पेरणीच्या सुरुवातीच्या काळात उगवलेल्या तणांवर नियंत्रण ठेवता येते.

  • पेरणीनंतर दुसरी फवारणी: – मेट्रीबुझिन 70 % डब्ल्यू.पी. 100 ग्रॅम प्रति एकरी 3 ते 4 दिवसानंतर किंवा बटाटा रोप 5 सें.मी.तयार होण्यापूर्वी फवारणी करावी.

  • तणनाशकांची फवारणी करताना पुरेसा ओलावा असणे फार महत्वाचे आहे.

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शेतीत घरगुती शेण खतांंचे महत्त्व काय आहे?

Importance of cow dung in agriculture
  • शेणखतामुळे जमिनीची भौतिक रचना सुधारते आणि जमिनीत हवेची हालचाल वाढते.

  • जमिनीची पाणी धारण क्षमता वाढवून जमिनीतील पाण्याची पातळी सुधारते.

  • त्याच्या वापराने झाडांच्या मुळांचा विकास चांगला होतो आणि झाडे जास्त प्रमाणात पोषकद्रव्ये शोषून घेतात.

  • हे जमिनीतील सेंद्रिय पदार्थ वाढवण्यास मदत करते. त्याचा वापर जमिनीत सेंद्रिय कार्बनचे प्रमाण सुधारतो.

  • जमिनीची क्षार विनिमय क्षमता वाढते.

  • जमिनीत फायदेशीर जीवाणूंची संख्या वाढते, ज्यामुळे पिकाचे उत्पादन खूप चांगले होते.

  • गाईचे शेण जटिल संयुगांचे साध्या संयुगांमध्ये रूपांतर करण्यास मदत करते.

  • मातीचे कण एकत्र चिकटवून जमिनीची धूप रोखते.

  • यामध्ये नाइट्रोजन 0.5 %, फास्फोरस 0.25 % आणि पोटाश 0.5 % वापरले जाते.

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मातीचे उपचार आणि त्याचे फायदे जैविक कीटकनाशक मेटारिझियम अ‍ॅनिसॉप्लियाइ

Soil treatment and its benefits with the biological insecticide METARHIZIUM ANISOPLIAE
  • मेट्राझियम अनीसोप्लिया एक अतिशय उपयुक्त जैविक नियंत्रण आहे.

  • हुमणी, वाळवी, नाकतोडे, हॉपर्स, लोकरी मावा, भुंगे आणि बीटल इत्यादीं सुमारे 300 प्रजाती विरूद्ध कीटकनाशक म्हणून याचा वापर केला जातो.

  • 1 किलो मेटारिझियम निसोप्लिआ / एकरी घ्या आणि हे 50 ते 100 किलो चांगले विघटित करुन एफवायएममध्ये मिसळा आणि ते एका मोकळ्या शेतात प्रसारित करा.

  • या बुरशीचे काही बीज पुरेसा ओलावा असलेल्या किडीच्या शरीरावर अंकुरतात.

  • ही बुरशी यजमान कीटकांचे (होस्ट सेलचे) शरीर खातो.

  • हे उभ्या पिकांमध्ये फवारणी म्हणूनदेखील वापरले जाऊ शकते.

  • त्याचा वापर करण्यापूर्वी शेतात आवश्यक आर्द्रता असणे फार महत्वाचे आहे.

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टमाटर के खेत में कैल्शियम की कमी दूर करने के लिए मिट्टी उपचार

Soil treatment to overcome calcium deficiency in tomato field
  • कैल्शियम की कमी के कारण टमाटर की फसल को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए बुआई के पहले ही प्रबंधन के उपाय किये जाने चाहिए। 

  • इसके लिए रोपाई के 15 दिन पहले मुख्य खेत में अच्छे से पकी हुई या सड़ी हुई गोबर की खाद का उपयोग करें।

  • इसके पश्चात रोपाई के पहले कैल्शियम नाइट्रेट @ 10 किलो/एकड़ की दर से खेत में मिलाएँ।

  • कैल्शियम की कमी के लक्षण दिखाई देने पर कैल्शियम EDTA @ 150 ग्राम/एकड़ की दर से दो बार छिड़काव करें।

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बेमिसाल मजबूती वाले HyTarp तिरपाल की विशेषताएं

Features of Gramophone HyTarp Tarpaulin
  • यह तिरपाल पूरी तरह से वर्जिन प्लास्टिक से बनी है और इसमें मिट्टी या फिलर का कंटेंट नहीं है।

  • इस तिरपाल की मोटाई 200 GSM होने के साथ ये 3 लेयर बनी की है जिसकी वजह से तिरपाल काफी मजबूत और टिकाऊ है।

  • ये तिरपाल UV ट्रीटेड भी है जीसकी वजह से कड़ी धूप, ठंढ और बारीश में भी ये तिरपाल लंबे समय तक चलती है।

  • ये तिरपाल एक साईड से आर्मी ग्रीन और दूसरे साईड से ब्लैक कलर की है।

  • इस तिरपाल मे चारों बाजू में विशिष्ट अंतर छोड के अल्युमिनियम के आय लेट्स दिये गए हैं जो तिरपाल को रस्सी से बाँधने मे काम आयेंगे।

  • यह तिरपाल सभी रेग्युलर साईज 11×15, 15×18, 21×30, 24×36, 30×30 में उपलब्ध है।

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कांद्याच्या रोपवाटिकेत बुरशीजन्य आजाराचे नियंत्रण

Fungus-borne disease control in onion nursery
  • खरीप हंगामात पावसामुळे जास्त आर्द्रता आणि मध्यम तापमान हे बुरशीजन्य आजाराच्या विकासाचे मुख्य घटक आहेत.

  • कांद्याची रोपवाटिकेत मर रोग, मूळकूज, स्टेम रॉट, पाने पिवळी पडणे इत्यादी रोगांचा प्रादुर्भाव दिसून येतो.

  • या रोगांमध्ये रोगजनक प्रथम वनस्पतीच्या कॉलर भागांंवर हल्ला करतो.

  • शेवटी, कॉलर भाग आणि मुळे कलंकित होतात, ज्यामुळे झाडे कोसळतात आणि मरतात.

  • बुरशीजन्य रोग रोखण्यासाठी पेरणीच्या वेळी निरोगी बियाणे निवडावे.

  • कार्बेन्डाझिम 12% + मॅन्कोझेब 63% 30 ग्रॅम / पंप किंवा थायोफिनेट मेथाईल 70% डब्ल्यू / डब्ल्यू, 50 ग्रॅम / पंप किंवा मॅन्कोझेब 64% + मेटॅलॅक्साइल 8% डब्ल्यू.पी. 60 ग्रॅम / पंप दराने फवारणी करावी.

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सरसों की बुआई करते समय इन बातों का रखें ध्यान

Keep these things in mind while sowing mustard
  • सरसों की बुआई का सबसे अच्छा समय 5 से 25 अक्टूबर के बीच होता है।

  • इस समय सरसों की बुआई करने से अच्छा उत्पादन मिलता है, इसलिए किसानों को 25 अक्टूबर तक सरसों की बुआई कर देनी चाहिए।

  • सरसों की बुआई के लिए किसानों को एक एकड़ खेत में 1 किलो बीज का प्रयोग करना चाहिए।

  • सरसों को कतारों में बोना चाहिए ताकि निराई करने में आसानी हो।

  • सरसों की बुआई देसी हल या सीड ड्रिल से करनी चाहिए।

  • इसमें पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेमी तथा पौधे से पौधे की दूरी 10-12 सेमी रखा जाना चाहिए।

  • सरसों की बुआई करते समय इस बात का ध्यान रखें कि बीज 2-3 सेमी की गहराई में लगाई गई हो।

  • 100 सेमी से अधिक गहराई पर बीज नहीं बोना चाहिए क्योंकि अधिक गहराई पर बीज बोने से बीज के अंकुरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

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मटर की बुवाई के 15 दिनों में जरूर करें ये पोषण प्रबंधन

How to manage nutrition in 15 days of sowing in Peas
  • जिस प्रकार मटर की बुआई के समय पोषण प्रबंधन किया जाता है ठीक उसी प्रकार बुआई के 15 दिनों में भी पोषण प्रबंधन किया जाना बहुत आवश्यक होता है।

  • बुआई के 15 दिनों में पोषण प्रबंधन करने से मटर की फसल को बहुत अच्छी शुरुआत मिलती है।

  • यह पोषण प्रबंधन मटर की फसल को कवक व कीट जनित रोगों एवं पोषण की कमी के प्रति प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करने में सहायता प्रदान करता है।

  • इस समय पोषण प्रबंधन करने के लिए सल्फर 90% @ 5 किलो/एकड़ + जिंक सल्फ़ेट @ 5 किलो/एकड़ की दर से मिट्टी उपचार के रूप में उपयोग करें।

  • यह भी ध्यान रखें की पोषण प्रबंधन के समय खेत में पर्याप्त नमी जरूर होनी चाहिए।

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प्याज की नर्सरी के लिए जरूरी छिड़काव प्रबंधन

This spraying management is necessary for onion nursery
  • प्याज़ की नर्सरी की बुआई के सात दिनों के अंदर छिड़काव प्रबंधन करना बहुत आवश्यक होता है।

  • यह छिड़काव कवक जनित बीमारियों एवं कीटों के नियंत्रण एवं पोषण प्रबंधन लिए किया जाता है।

  • इस समय छिड़काव करने से प्याज़ की नर्सरी को अच्छी शुरुआत मिलती है।

  • कवक जनित रोगो लिए करमानोवा (कार्बेन्डाजिम 12% + मैन्कोजेब 63% WP) @ 30 ग्राम/पंप की दर से छिड़काव करें।

  • कीट प्रबंधन के लिए थियानोवा (थियामेथोक्साम 25% WG) @10 ग्राम/पंप की दर से छिड़काव करें।

  • पोषण प्रबंधन के लिए (मैक्सरूट) ह्यूमिक एसिड @ 10 ग्राम/पंप की दर से छिड़काव करें।

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