टरबूज आणि खरबूज पिकांमध्ये पिंचिंग काय आहे?

Pinching in watermelon and muskmelon crop
  • शेतकरी बंधूंनो, टरबूज आणि खरबूज पिकांमध्ये चांगल्या दर्जाचे उत्पादन मिळविण्यासाठी पिंचिंग ही एक महत्त्वाची प्रक्रिया आहे.

  • वेलींची अतिवृद्धी रोखण्यासाठी आणि फळांच्या चांगल्या विकासासाठी वेलींमध्ये चिमटे काढण्याची प्रक्रिया केली जाते.

  • या प्रक्रियेमध्ये जेव्हा वेलीला पुरेशी फळे येतात तेव्हा वेलींचा शेंडा उपटला जातो त्यामुळे वेलांची वाढ थांबते.

  • वेलीच्या वाढीस प्रतिबंध केल्याने फळांचा आकार आणि गुणवत्ता सुधारते.

  • एका वेलीवर जास्त फळ असल्यास लहान व कमकुवत फळे काढून टाकावी म्हणजे मुख्य फळ चांगली वाढू शकेल.

  • अनावश्यक फांद्या काढून टाकल्याने टरबूज आणि खरबूज फळांना पूर्ण पोषण मिळते आणि ते लवकर वाढतात.

Share

मध्य प्रदेश समेत कुछ राज्यों में होगी बारिश, उत्तर भारत में बढ़ेगी गर्मी

know the weather forecast,

अब उत्तर भारत के साथ-साथ मध्य और पश्चिमी भारत में फिर से भीषण गर्मी दस्तक देगी। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिम मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में तापमान तेजी से बढ़ेगा और लू जैसी स्थिति बन सकती है। पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 19 मार्च से हल्की बारिश शुरू होगी। 20 से 23 मार्च के बीच पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तरी तेलंगाना, विदर्भ और पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश होने की संभावना है। साथ ही, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में भी बादल बरस सकते हैं। देश के एक हिस्से में तापमान तेजी से बढ़ेगा, जबकि दूसरे हिस्से में बारिश मौसम को ठंडा बनाएगी।

स्रोत: स्काइमेट वेदर

मौसम सम्बंधित पूर्वानुमानों की जानकारियों के लिए रोजाना ग्रामोफ़ोन ऐप पर जरूर आएं। नीचे दिए गए शेयर बटन को क्लिक कर इस लेख को अपने मित्रों के साथ भी साझा करें।

Share

भिंडी की फसल में हरा तेला कीट के लक्षण एवं नियंत्रण के उपाय

Symptoms and control of jassids in okra crop

यह कीट हरे पीले रंग के होते हैं। इसके शिशु व प्रौढ़ पत्तियों की निचली सतह पर रहकर रस चूसते हैं। इसका प्रकोप मार्च से सितंबर माह तक होता है। रस चूसने की वजह से पत्तियां पीली पड़ जाती हैं, और किनारों के ऊपर की ओर मुड़ कर कप का आकार बना लेती हैं। अधिक संक्रमण पर पत्तियां जल जाती हैं एवं मुरझा कर सूख जाती हैं।

ऐसे करें नियंत्रण: 

  • बीज की बुआई के पूर्व, थियानोवा सुपर (थियामेथॉक्सम 30% एफएस) @ 5 मिली, प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करें।

  • खड़ी फसल में समस्या दिखाई देने पर, थियानोवा -25 ( थियामेथोक्सम 25% डब्ल्यूजी) @ 80 ग्राम, 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।

कृषि क्षेत्र एवं किसानों से सम्बंधित ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए ग्रामोफ़ोन के लेख प्रतिदिन जरूर पढ़ें और शेयर करना ना भूलें।

Share

टमाटर की फसल में लीफ माइनर के लक्षण एवं नियंत्रण के उपाय

Symptoms and control of leaf miner in tomato crop

वयस्क कीट हलके पीले रंग का एवं मैगट बहुत छोटी पैरविहीन व पीले रंग की होती है वहीं सुरंग में प्युपा बनता है। 

लक्षण: इस कीट के शिशु पत्तियों के हरे भाग को खाकर इनमें टेढ़ी मेढ़ी सफ़ेद सुरंग बना देते हैं और प्रभावित पत्तियों पर सफ़ेद सर्पिलाकार धारियां दिखाई देती हैं। इससे पौधों में प्रकाश संश्लेषण कम हो जाता है। अधिक प्रकोप पर पत्तियां सूखकर गिर जाती हैं। 

नियंत्रण: ग्रसित पत्तियों को निकालकर नष्ट करे दें तथा नियंत्रण के लिए टफगोर (डायमिथोएट 30 ईसी)@ 396 मिली/एकड़ या मीडिया (इमिडाक्लोप्रिड 17.80% एस एल) @ 60 मिली /एकड़, इसके 2 दिन बाद, नोवामैक्स  (जिबरेलिक ऍसिड 0.001% एल) @ 30 मिली प्रति एकड़ के दर से छिड़काव करें।

कृषि क्षेत्र एवं किसानों से सम्बंधित ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए ग्रामोफ़ोन के लेख प्रतिदिन जरूर पढ़ें और शेयर करना ना भूलें।

Share

राजस्थान में गर्मी से राहत, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में आंधी बारिश के आसार

know the weather forecast,

उत्तरी ठंडी हवाओं का प्रभाव पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिम मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, और उत्तरी महाराष्ट्र पर अगले 24 घंटे तक जारी रहेगा तथा तापमान में कुछ और गिरावट होगी। 19 मार्च से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ, तेलंगाना, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, झारखंड सहित भारत के पूर्वी तट पर बारिश की गतिविधियां बढ़ जाएंगी। कई राज्यों में तेज बारिश के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं।

स्रोत: स्काइमेट वेदर

मौसम सम्बंधित पूर्वानुमानों की जानकारियों के लिए रोजाना ग्रामोफ़ोन ऐप पर जरूर आएं। नीचे दिए गए शेयर बटन को क्लिक कर इस लेख को अपने मित्रों के साथ भी साझा करें।

Share

माहू, थ्रिप्स, जैसिड सबको ख़त्म करेगा ये जैविक कीटनाशक

This organic insecticide will kill aphids thrips jassids

वर्टिसिलियम लेकानी फफूंद पर आधारित जैविक कीटनाशक है। यह 1 प्रतिशत डब्लू पी, एवं 1.15 प्रतिशत डब्लू पी के फार्मुलेशन में उपलब्ध है। इस फफूंद का उपयोग विभिन्न प्रकार के फसलों में रस चूसने वाले कीट जैसे माहू, थ्रिप्स, जैसिड, मिलीबग इत्यादि के रोकथाम के लिए लाभकारी होता है। वर्टिसिलियम लेकानी सफेद रुई के समान दिखने वाली फफूद है। इससे संक्रमित कीटों के किनारों पर सफेद फफूंद की वृद्धि दिखाई देती है। इस फफूंद के बीजाणु (स्पोर्स) कुछ चिपचिपे प्रवृत्ति के होते हैं जिससे ये कीटों के ऊपरी आवरण पर चिपक जाते हैं। इसके प्रयोग से 15 दिन पहले एवं बाद में रासायनिक फफूंदनाशक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। वर्टिसिलियम लेकानी की सेल्फ लाइफ एक वर्ष है। 

उपयोग की विधी

इसके छिड़काव की मात्रा फसल घनत्व और पेड़ पर निर्भर करती है। यदि किसी भी फसल में चूसक कीटों का प्रकोप बार-बार हो रहा हो तो वर्टिसिलियम लेकानी का प्रयोग 15 से 20 दिनों के अन्तराल से करते रहना चाहिए, और ग्रीन हाउस फसलों में इसका प्रयोग 10 से 15 दिनों के अन्तराल से करने की सिफारिश की जाती है।

वर्टिसिलियम लेकानी को नीम और अन्य जैविक कीट और फफूंदनाशकों के साथ मिलाकर प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन इसको किसी रासायनिक फफूंदनाशक के साथ मिलाकर प्रयोग न करें।

कृषि क्षेत्र एवं किसानों से सम्बंधित ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए ग्रामोफ़ोन के लेख प्रतिदिन जरूर पढ़ें और शेयर करना ना भूलें।

Share

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा सहित कई राज्यों में बारिश की संभावना

know the weather forecast,

अगले 24 से 48 घंटे के दौरान उत्तरी हवाओं के प्रभाव से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र तक तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। 2 दिन बाद तापमान फिर बढ़ेंगे। 19 मार्च से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ, तेलंगाना, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल सहित झारखंड में बारिश हो सकती है। 20 मार्च के आसपास दिल्ली और उसके आसपास भी हल्की बूंदाबांदी की संभावना दिखाई दे रही है।

स्रोत: स्काइमेट वेदर

मौसम सम्बंधित पूर्वानुमानों की जानकारियों के लिए रोजाना ग्रामोफ़ोन ऐप पर जरूर आएं। नीचे दिए गए शेयर बटन को क्लिक कर इस लेख को अपने मित्रों के साथ भी साझा करें।

Share

कद्दुवर्गीय फसलों में लाल मकड़ी के प्रकोप की ऐसे करें पहचान

Identification of red spider mites in cucurbit crops

लाल मकड़ी दरअसल आंखों से दिखाई न देने वाली यह एक सूक्ष्म जीव है। यह पौधों की पत्तियों की निचली सतह पर चिपक कर पत्तियों से रस चूसते हैं। यह कीट कपास, बैंगन, टमाटर, भिंडी तथा कद्दूवर्गीय फसलों पर आक्रमण करती है। इस कीट का वयस्क लाल रंग का होता है जो अंडाकार होता है तथा इसके शरीर के ऊपरी भाग में दो धब्बे पाए जाते हैं। इनकी शिशु एवं वयस्क दोनों ही अवस्था हानिकारक होती है। पत्तियों की निचली सतह पर इनके द्वारा बनाई गई जाली से इनकी उपस्थिति पता चलती है। मार्च-अप्रैल का गरम मौसम इनके अधिक प्रकोप के लिए अनुकूल समय है। अपने सूक्ष्म आकार के कारण ये हवा के सहारे एक स्थान से दूसरे स्थान तक विचरण कर सकती है। अधिक प्रकोप होने पर पत्तियां सूखकर गिरने लगती हैं।

नियंत्रण: ग्रसित पत्तियों को तथा खरपतवारों को नष्ट करें। अधिक प्रकोप होने पर टफगोर (डायमिथोएट 30 ईसी) की 300 मिली प्रति एकड़ या ओमाइट (प्रोपेरगाईट 57 ईसी) @ 200 मिली प्रति एकड़ 150-200 लीटर पानी में घोलकर प्रकोपित पौधें पर छिड़काव करें।

कृषि क्षेत्र एवं किसानों से सम्बंधित ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए ग्रामोफ़ोन के लेख प्रतिदिन जरूर पढ़ें और शेयर करना ना भूलें।

Share

तरबूज की तुड़ाई के समय बरतें सावधानी, रखें उचित समय का ध्यान

Best time to harvest fruit in watermelon crop
  • तरबूज के फलों को बुआई के 75 से 80 दिन बाद तोड़ना आरम्भ कर देना चाहिए। फलों को यदि दूर के मार्केट में भेजना हो तो तुड़ाई जल्दी करना चाहिए।

  • तुड़ाई का समय हर किस्म के हिसाब से फलों के आकार एवं रंग पर निर्भर करता है। सामान्यता जब परिपक्व फलों पर अंगुलियों से बजाते है तब धप- धप की आवाज आती है साथ ही जब डंडरेल सूखने लगे तभी फल तुड़ाई के लिए योग्य हो जाते हैं।

  • फल का पेंदा जो भूमि में रहता है, यदि यह सफ़ेद से पीला हो जाये तो फल पका हुआ समझा जाता है। फल दबाने पर यदि आसानी से दब जाए, एवं हाथों को दबाते समय ज्यादा ताकत नहीं लगानी पड़े तो फल पका हुआ समझें। 

  • फल की तुड़ाई करते समय ध्यान दें कि फलों को डंठल से अलग करने के लिए तेज चाकू का उपयोग करें। इसके अलावा फलों को ठंडे स्थान पर एकत्रित करके रखना चाहिए।

कृषि क्षेत्र एवं किसानों से सम्बंधित ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए ग्रामोफ़ोन के लेख प्रतिदिन जरूर पढ़ें। आज की जानकारी पसंद आई हो तो इसे  शेयर करना ना भूलें।

Share

कटाई के बाद फसल अवशेष जलाने से होंगे गंभीर नुकसान

Disadvantages of burning crop residue after harvesting

अधिकतर किसान दूसरी फसल की जल्दी बुआई के करने लिए गेहूँ की कटाई के पश्चात बची हुई पराली को खेत में हीं जलाकर नष्ट कर देते हैं, इसके कारण खेतों में जीवाष्म पदार्थ की मात्रा में सतत कमी आती है, एवं मृदा की ऊपरी सतह कठोर हो जाती है। इससे मृदा की उर्वरा शक्ति नष्ट होने के साथ साथ कार्बन की मात्रा में भी कमी आती है। मृदा की भौतिक संरचना भी प्रभावित होती है, एवं जल धारण क्षमता कम होती है। इससे मृदा की जैव विविधता लगभग समाप्त हो जाती है, और मृदा में जैविक क्रियाओं में कमी आती है। 

फसल अवशेषों को जलाने से केचुओं की संख्या में भी भारी गिरावट देखी जाती है। फसल अवशेषों को जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड एवं नाइट्रसऑक्साइड का उत्सर्जन होता है जो वातावरण को प्रदूषित करता है, तथा भूमि में नाइट्रोजन एवं कार्बन का अनुपात प्रभावित होता है।

फसल अवशेषों में आग लगाने से मेड़ों पर लगे पौधे जल जाते हैं, तथा कभी कभी गावों में भी आग लगने की संभावना बढ़ जाती है।

कृषि क्षेत्र एवं किसानों से सम्बंधित ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए ग्रामोफ़ोन के लेख प्रतिदिन जरूर पढ़ें। आज की जानकारी पसंद आई हो तो इसे  शेयर करना ना भूलें।

Share