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हे पिकांचे उगवण वाढवते.
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त्यामुळे मुळे खूप चांगल्या प्रकारे वाढतात.
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वनस्पतीद्वारे प्रमुख आणि सूक्ष्म पोषक घटकांची शोषण क्षमता सुधारते.
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हे पीक उत्पादन वाढविण्यात मदत करते.
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हे उत्पादित पिकांची गुणवत्ता सुधारते.
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गहू, धान, बटाटा, मिरची, आले, कांदा, तंबाखू, पुदीना, टोमॅटो, मोहरी, शेंगदाणे, ऊस, वांगी आणि इतर सर्व भाज्यांसह मेक्सरूटचा वापर केला जाऊ शकतो.
गेहूँ की फसल में पोषक तत्व प्रबंधन एवं जड़ माहू का नियंत्रण
पोषक तत्व प्रबंधन: गेहूँ की फसल में 20-25 दिन की अवस्था में, अच्छे पौध विकास के लिए, यूरिया 40 किलोग्राम + जिंक सल्फेट @ 5 किलोग्राम + कोसावेट (सल्फर 90% डब्ल्यूजी) @ 5 किलोग्राम + मेजरसोल (फास्फोरस 15% + पोटेशियम 15% + मैंगनीज 15% + जिंक 2.5% + सल्फर 12%) @ 5 किलोग्राम, को आपस में मिलाकर एक एकड़ क्षेत्र के हिसाब से समान रूप से भुरकाव करें एवं भुरकाव के बाद हल्की सिंचाई करें।
जड़ माहू के क्षति के लक्षण: यह कीट नवंबर से फरवरी माह तक अधिक मिलता है। ये पारदर्शी कीट हैं जो बहुत छोटे और कोमल शरीर वाले पीले भूरे रंग के होते हैं। यह पौधों के आधार के पास या पौधों की जड़ों पर मौजूद होते है एवं पौधों का रस चूसते है। रस चूसने के कारण पत्तियां पीली हो जाती हैं या समय से पहले परिपक्व हो जाती हैं एवं पौधे मर जाते हैं।
नियंत्रण के उपाय: इस कीट के नियंत्रण के लिए, सिंचाई से पहले उर्वरक, रेत या मिट्टी में भारतीय गेहूँ एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल के अनुसार थियानोवा 25 (थियामेथोक्सम 25 % डब्ल्यूजी) @ 100 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से भुरकाव करें एवं मीडिया (इमिडाक्लोप्रिड 17.80% एसएल) @ 60 से 70 मिली + सिलिकोमैक्स गोल्ड @ 50 मिली + मैक्सरुट (ह्यूमिक एसिड + पोटेशियम + फुलविक एसिड) @ 100 ग्राम, प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।
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मटर की फसल में अधिक फूल धारण के लिए जरूरी छिड़काव!
मटर की फसल में अच्छे फूल धारण के लिए न्यूट्रीफुल मैक्स (फुलविक एसिड का अर्क– 20% + कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम ट्रेस मात्रा में 5% + अमीनो एसिड) @ 250 मिली या डबल (होमोब्रासिनोलाइड 0.04% डब्ल्यू/डब्ल्यू) @ 100 मिली + बोरोन @ 150 ग्राम प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।
छिड़काव के फायदे
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इससे फूल अधिक लगते है एवं फलो की रंग एवं गुणवत्ता को बढ़ाता है।
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सूखे, पाले आदि के खिलाफ पौधो की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
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जड़ से पोषक तत्वों के परिवहन को भी बढ़ाता है।
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डबल एक हार्मोन है जो फूल के साथ साथ पौधो की भी वृद्धि करता है।
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गेहूँ में ट्राई कोट मैक्स के उपयोग से तेज होगी फसल ग्रोथ की रफ़्तार
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ट्राई-कोट मैक्स में जैविक कार्बन 3%, ह्यूमिक, फुलविक, कार्बनिक पोषक तत्वों का एक मिश्रण है।
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यह अच्छे बीज अंकुरण के लिए प्रभावी है।
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इससे उर्वरक दक्षता बढ़ती है और तीव्र जड़ विकास भी मिलता है।
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यह फसल में विभिन्न पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाता है।
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यह पौधों की वानस्पतिक विकास एवं प्रजनन क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।
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इससे फसल हरी भरी एवं स्वस्थ रहती है।
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यह एक जैविक उत्पाद है इसलिए यह मिट्टी की संरचना में सुधार करता है।
ह्यूमिक एसिड: ह्यूमिक एसिड बीज के अंकुरण एवं जड़ विकास को बढ़ाता है। मिट्टी में पहले से मौजूद पोषक तत्वों की उपलब्धता को बढ़ाता है एवं सूखा के प्रति सहनशील बनाता है। मिट्टी में उपलब्ध सूक्ष्म जीवों की गतिविधि को बढ़ाता है। जिससे यह एक उत्कृष्ट जड़ उत्तेजक बन जाता है।
फुलविक एसिड: फुलविक एसिड से प्रकाश संश्लेषण की क्रिया तीव्र होती है। मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व को अवशोषित करने में मदद करता है।
मात्रा: ट्राई-कोट मैक्स @ 4 किग्रा प्रति एकड़ के हिसाब से भूमि की तैयारी या खाद के साथ जमीन में भुरकाव करें एवं बुवाई के 21 से 35 दिन बाद ट्राई-कोट मैक्स 4 किग्रा प्रति एकड़ के हिसाब से एक बार फिर से भुरकाव कर सिंचाई करें और पाएं बेहतरीन उत्पादन।
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मक्के की फसल में फॉल आर्मी वर्म के लक्षण एवं नियंत्रण के उपाय!
यह कीट मक्के की फसल की सभी अवस्थाओं में आक्रमण करते हैं। सामान्यतः यह मक्के की पत्तियों पर आक्रमण करते हैं परंतु अधिक प्रकोप होने पर यह भुट्टे को भी नुकसान पहुंचाने लगते हैं। इल्ली पौधे के ऊपरी भाग या कोमल पत्तियों पर अधिक आक्रमण करते हैं। ग्रसित पौधे की पत्तियों पर छोटे – छोटे छेद दिखाई देते हैं। नवजात इल्ली पौधे की पत्तियों को खुरच कर खाते हैं, जिससे पत्तियों पर सफेद धारियां दिखाई देते हैं। जैसे-जैसे इल्लियां बड़ी होती हैं, पौधे की ऊपरी पत्तियों को पूर्ण रूप से खाती जाती हैं। अंत में भुट्टे पर हमला करते है जिससे गुणवत्ता और उपज दोनों में कमी आती है।
नियंत्रण के उपाय
भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान के अनुसार इसके नियंत्रण के लिए इमानोवा (इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी) @ 80 ग्राम या कोस्को (क्लोरोट्रानिलिप्रोले 18.5% एससी) 80 मिली + सिलिकोमैक्स गोल्ड @ 50 मिली प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।
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आलू में मिट्टी चढ़ाने के पहले कंद विकास के लिए पोषण प्रबंधन
आलू की बुवाई के 20-25 दिन बाद एवं मिट्टी चढ़ाने के पहले, यूरिया 45 किलोग्राम + एमओपी 50 किलोग्राम + कोसावेट (सल्फर 90% डब्ल्यूडीजी) @ 6 किलोग्राम + जिंक सल्फेट @ 5 किलोग्राम + मैग्नीशियम सल्फेट @ 5 किलोग्राम + कैलबोर (बोरॉन 4 + कैल्शियम 11 + मैग्नीशियम 1 + पोटैशियम 1.7 + सल्फर 12 %) @ 5 किलोग्राम, इन सभी को आपस में मिलाकर एक एकड़ के हिसाब से भुरकाव करें।
उपयोग के फायदे
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इससे पौधों को आवश्यक पोषक तत्व, सूक्ष्म एवं मुख्य पोषक तत्व मिलता है जो पौध वृद्धि के साथ साथ कंद विकास में भी मदद करता है।
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साथ ही प्रकाश संश्लेषण, शर्करा के परिवहन में और कोशिका भित्ति के निर्माण में सहायक होता है।
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आलू की फसल में खरपतवार नियंत्रण कर पाएं बंपर उपज
आलू रबी मौसम की मुख्य नकदी फसल है। आलू की जबरदस्त उपज प्राप्ति के लिए इस समय फसल में होने वाले खरपतवारों का नियंत्रण बेहद जरूरी होता है। खरपतवार मुख्य फसल के साथ पोषक तत्वों, पानी, स्थान, प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। जिस कारण से पौधों में पोषक तत्व की कमी हो जाती है तथा कई प्रकार के कीट एवं बीमारी का भी प्रकोप होता है।
खरपतवार नियंत्रण
आलू की फसल जब 15 से 20 दिन (पौधे की उचाई 5 सेमी) की हो जाए तब खरपतवार नियंत्रण के लिए, बैरियर (मेट्रिब्यूजिन 70% डब्ल्यूपी) @ 300 ग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।
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यह कई घासों और चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करता है।
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जड़ों और पत्तियों के माध्यम से कार्य करता है।
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इसका प्रयोग अंकुरण से पूर्व एवं बुवाई के 15 से 20 दिन बाद, जब पौधे की ऊंचाई 5 सेमी की हो जाये दोनों अनुप्रयोगों के लिए उपयोग किया जा सकता है।
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व्यापक स्पेक्ट्रम गतिविधि और कम खुराक होने के कारण यह खरपतवारनाशी लागत प्रभावी होता है।
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बाद की फसलों पर इसका कोई बुरा प्रभाव नहीं होता है।
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इससे खरपतवार नियंत्रण करके आलू की फसल को खरपतवारो से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है एवं उत्पादन को भी बढ़ाया जा सकता है।
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लहसुन की फसल में बुवाई के 25 से 30 दिन बाद पोषक तत्व प्रबंधन!
लहसुन की फसल अभी 25 से 30 दिन की हो रही है, इस अवस्था में अच्छे जड़ों के विकास एवं पौधों की स्वस्थ बढ़वार के लिए, यूरिया @ 25 किलोग्राम + एग्रोमीन (सूक्ष्म पोषक तत्व- ज़िंक इडीटीए 3% + मैगनीज़ इडीटीए 1% + मोलिब्डेनम 0.1% + कॉपर इडीटीए 1% + बोरोन 0.5% + जटिल कार्बनिक रूप में आयरन 2.5%) @ 5 किलोग्राम, इन सभी को आपस में मिलाकर एक एकड़ के हिसाब से भुरकाव करें।
यूरिया: फसल में यूरिया नाइट्रोज़न की पूर्ति का सबसे बड़ा स्रोत है। इसके उपयोग से, पत्तियो में पीलापन एवं सूखने की समस्या नहीं आती है। यूरिया प्रकाश संश्लेषण की क्रिया को तेज़ करता है।
एग्रोमिन गोल्ड
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एग्रोमिन फसलों के लिए, सूक्ष्म पोषक तत्वों का सबसे प्रभावी स्रोत है।
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एग्रोमिन में एक गीला और फैलाने वाला एजेंट भी होता है जो पौधे द्वारा साथ अवशोषण सुनिश्चित करता है।
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एग्रोमिन सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को ठीक करके और बेहतर पोषक तत्व संतुलन सुनिश्चित करके फसल की उपज बढ़ाता है।
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टमाटर में अधिक फूल धारण एवं पछेती झुलसा रोग नियंत्रण के उपाय!
टमाटर की फसल में अधिक फूल धारण एवं पछेती झुलसा रोग के नियंत्रण के लिए, गोडिवा सुपर (एज़ोक्सिस्ट्रोबिन 18.2% + डिफ़ेनोकोनाज़ोल 11.4% एससी) @ 15 मिली + न्यूट्रीफुल मैक्स (फुलविक एसिड का अर्क – 20% + कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम ट्रेस मात्रा में 5% + अमीनो एसिड) @ 25 मिली + सिलिकोमैक्स गोल्ड @ 5 मिली प्रति 15 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।
न्यूट्रीफुल मैक्स
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इससे फूल अधिक लगते है, एवं फलो की रंग एवं गुणवत्ता को बढ़ाता है।
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सूखे, पाले आदि के खिलाफ पौधो की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
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जड़ से पोषक तत्वों के परिवहन को भी बढ़ाता है।
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प्याज की फसल में रोपाई के 40 दिन बाद जरूरी है पोषक तत्व प्रबंधन!
प्याज की फसल में इस अवस्था में अच्छे जड़ों के विकास एवं पौधों की स्वस्थ वृद्धि के लिए, यूरिया 30 किलोग्राम + कैल्शियम नाइट्रेट 10 किलोग्राम + मैग्नीशियम सल्फेट 10 किलोग्राम इन सभी को आपस में मिलाकर एक एकड़ के हिसाब से समान रूप से भुरकाव करें।
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यूरिया: प्याज की फसल में यूरिया नाइट्रोज़न की पूर्ति का सबसे बड़ा स्रोत है| इसके उपयोग से, पत्तियो में पीलापन एवं सूखने की समस्या नहीं आती है| यूरिया प्रकाश संश्लेषण की क्रिया को तेज़ करता है।
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कैल्शियम नाइट्रेट: कैल्शियम नाइट्रेट से प्याज की कंद का आकार बढ़ाता है, एवं बेहतर गुणवत्ता वाली उपज प्राप्त होती है। साथ ही पौधो में कैल्शियम की कमी को पूरा करता है।
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मैग्नीशियम सल्फेट: मैग्नेशियम सल्फेट प्याज की फसल में मैग्नेशियम के प्रयोग से हरियाली बढ़ती है एवं प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में तेज़ी आती हैं अंततः उच्च पैदावार और फसल की गुणवत्ता बढ़ती है| साथ ही सल्फर गंध बढ़ाने में मदद करता है।
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