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भोपळा वर्गीय पिकांमध्ये, टरबूज पिकामध्ये फळमाशीचा हल्ला प्रामुख्याने दिसून येतो ज्यामुळे पिकाचे नुकसान होऊन उत्पादनावर परिणाम होतो.
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फळाची माशी फळांच्या आत अंडी घालते, सुरवंट अंड्यातून बाहेर पडतो आणि फळांचा लगदा खातो, ज्यामुळे फळे कुजतात.फळे वळतात आणि कमकुवत होतात आणि वेलीपासून वेगळी होतात.
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व्यवस्थापनाचे उपाय : फेनप्रोप्रेथ्रिन 10% ईसी [डैनिटोल] 400 मिली प्रोफेनोफॉस 40 % + साइपरमेथ्रिन 4% ईसी [प्रोफेनोवा] 400 मिली स्पिनोसेड 45% एससी [ट्रेसर] 60 मिली/एकर या दराने फवारणी करावी.
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फळ माशीच्या चांगल्या व्यवस्थापनासाठी, 10 फ्रूट फ्लाई ट्रैपचा प्रती एकर दराने वापर करावा.
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जैविक व्यवस्थापनासाठी, बवेरिया बेसियाना [बवे कर्ब] 250 ग्रॅम/एकर या दराने उपयोग करू शकता.
2025 में कैसा रहेगा मानसून, जानें इस साल कब, कहां और कितनी होगी बारिश?
इस वीडियो में आप दक्षिण पश्चिम मानसून 2025 का विस्तृत पूर्वानुमान देखेंगे। आप देखेंगे की मानसून कैसा रहेगा? जून से लेकर सितंबर के बीच देशभर में बारिश कैसी हो सकती है। मानसून के चारों महीनों के दौरान देश के हर राज्य में बारिश का पूर्वानुमान भी इस वीडियो में बताया गया है।
स्रोत: स्काइमेट वेदर
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तरबूज की फसल में गमी तना झुलसा के लक्षण एवं नियंत्रण के उपाय
तरबूज की खेती के दौरान इसके पूरे फसल चक्र में कई प्रकार के रोगों का प्रकोप देखने को मिलता है। इन रोगों की रोकथाम कर के तरबूज की अच्छी उपज की प्राप्ति की जा सकती है। तरबूज की फसल का एक प्रमुख रोग है गमी तना झुलसा और इस लेख में हम जानेंगे इसी रोग से संबंधित जानकारी एवं रोकथाम के उपाय।
लक्षण: तरबूज की फसल में गमी तना झुलसा गंभीर पर्णीय बीमारियों में से एक है। इस रोग में तने और पत्तियों पर भूरे धब्बे बन जाते हैं और यह धब्बे पीले ऊतकों से घेरे होते हैं। साथ ही तने में यह घाव बढ़कर गलन का निर्माण करता है और इससे चिपचिपे, भूरे रंग के द्रव का स्रावण होता है। इस रोग में फल शायद ही कभी प्रभावित होते हैं, लेकिन पर्णसमूह के नुकसान से उपज और फलों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
नियंत्रण: गमी तना झुलसा से बचने के लिए रोग रहित बीज का उपयोग करें, साथ ही सभी कद्दू वर्गीय फसलों से 2 वर्ष का फसल चक्र रखें। इसके अलावा रोग के लक्षण दिखाई देने पर रासायनिक नियंत्रण के लिए, फफूंदनाशक जैसे जटायु (क्लोरोथॅलोनिल 75% डब्लूपी) 400 ग्राम प्रति एकड़ या एम 45 (मैंकोज़ेब 75% डब्लूपी) 600-800 ग्राम प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी के दर से छिड़काव करें। इसके जैविक नियंत्रण के लिए, मोनास कर्ब (स्यूडोमोनास फ्लोरोसेन्स) 500 ग्राम/एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें।
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क्यों ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती किसानों के लिए है फायदेमंद?
रबी की फसलों की कटाई के बाद खरीफ सीजन आने तक खेत खाली रह जाता है। पर किसान भाई चाहें तो रबी तथा खरीफ के बीच वाले समय जिसे जायद कहते हैं, का सही इस्तेमाल कर के बढ़िया लाभ प्राप्त कर सकते हैं। जायद सीजन में खेती के लिए सबसे अच्छा चुनाव अगर कोई हो सकता है तो वो है मूंग की फसल का जो कम अवधि की फसल है और अच्छा मुनाफ़ा दे सकती है। इसकी खेती के फायदेमंद होने के मुख्य कारण निम्न हैं।
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इसकी खेती खरपतवारों को नियंत्रित करती है और गर्मियों में हवा के कटाव को रोकती है।
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फसल पर कीट एवं रोगों का आक्रमण बहुत कम होता है।
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फसल/किस्में परिपक्व होने में कम समय लेती हैं (60-65 दिन)
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इसकी खेती से राइजोबियम फिक्सेशन के माध्यम से कम से कम 30-50 किग्रा उपलब्ध नाइट्रोजन/हेक्टेयर जुड़ जाता है जिसे अगली खरीफ मौसम की फसल में उर्वरकों को देते समय समायोजित किया जा सकता है।
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इसकी खेती से फसल की सघनता बढ़ जाती है।
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आलू, गेहूँ और सर्दियों के मौसम की मक्का जैसी भारी उर्वरक माँग वाली फसलों के बाद उगाए जाने पर यह मिट्टी की अवशिष्ट उर्वरता का उपयोग करती है।
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अब शुरू करें बकरी पालन और पाएं 10 लाख रुपये की सब्सिडी!
अगर आप खेती के साथ-साथ अतिरिक्त आय का जरिया ढूंढ रहे हैं, तो बकरी पालन आपके लिए शानदार अवसर हो सकता है। केंद्र सरकार की नेशनल लाइव स्टॉक मिशन (NLM) योजना के तहत अब आप 20 लाख रुपये की लागत पर बकरी पालन शुरू कर सकते हैं, जिसमें आपको 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलती है। यानी कुल लागत का 50% सरकार दे रही है!
इस योजना के तहत किसान 100 से लेकर 500 बकरियों तक के प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं। आवेदन के लिए आपको एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट, ज़मीन से जुड़े कागजात, आधार कार्ड, बैंक डिटेल्स आदि दस्तावेज़ अपलोड करने होते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है और आप सीधे NLM पोर्टल से आवेदन कर सकते हैं।
स्रोत: कृषि जागरण
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क्या चल रहे हैं लहसुन के भाव, जानें मंडी का हाल
मध्य प्रदेश के अलग अलग मंडियों में क्या चल रहे हैं लहसुन के भाव? आइये देखते हैं पूरी सूची।
| मध्य प्रदेश की मंडियों में लहसुन के ताजा मंडी भाव | ||||
| जिला | कृषि उपज मंडी | किस्म | न्यूनतम मूल्य (प्रति क्विंटल) | अधिकतम मूल्य (प्रति क्विंटल) |
| उज्जैन | बड़नगर | लहसुन | 2180 | 2551 |
| भोपाल | भोपाल | लहसुन | 1950 | 6650 |
| मन्दसौर | दलौदा | लहसुन | 1601 | 12400 |
| सागर | देवरी | अन्य | 3300 | 3300 |
| इंदौर | इंदौर | लहसुन | 200 | 8000 |
| रतलाम | जावरा | लहसुन | 4001 | 9000 |
| नीमच | जावद | लहसुन | 1110 | 11300 |
| शाजापुर | कालापीपल (F&V) | लहसुन | 1775 | 6510 |
| राजगढ़ | नरसिंहगढ़ | लहसुन | 2000 | 5400 |
| होशंगाबाद | पिपरिया(F&V) | लहसुन | 6500 | 10000 |
| मन्दसौर | पिपल्या | लहसुन | 2411 | 6210 |
| रतलाम | रतलाम | लहसुन | 2452 | 7000 |
| रतलाम | सैलाना | लहसुन | 1300 | 7281 |
| शाजापुर | शाजापुर | लहसुन | 1210 | 2054 |
| शाजापुर | शुजालपुर | देसी | 1100 | 5800 |
| मन्दसौर | सीतामऊ | लहसुन | 710 | 2100 |
| उज्जैन | उज्जैन | लहसुन | 690 | 3000 |
स्रोत: एगमार्कनेट
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धनिया की खेती से कम समय में मिल जायेगी जबरदस्त उपज और होगी खूब कमाई
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धनिया की फसल के लिए शुष्क व ठंडा मौसम अच्छा होता है। इसके बीजों के अंकुरण के लिए 25 से 26 से.ग्रे. तापमान अच्छा होता है।
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धनिया की सिंचित फसल के लिए अच्छी जल निकास वाली दोमट मिट्टी सबसे अधिक उपयुक्त होती है और असिंचित फसल के लिए काली भारी भूमि अच्छी होती है। धनिया क्षारीय एवं लवणीय भूमि को सहन नही करता है।
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सिंचित क्षेत्र में अगर, जुताई के समय भूमि में पर्याप्त नमी न हो तो भूमि की तैयारी सिंचाई करने के उपरांत करनी चाहिए। इससे जमीन में जुताई के समय ढेले भी नही बनेंगे तथा खरपतवार के बीज अंकुरित होने के बाद जुताई के समय नष्ट हो जाएंगे।
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धनिया की उन्नत किस्में जैसे फाऊजा, सुरभी, रौनक-31 की खेती कर सकते हैं। बोने के समय की बात करें तो हरे पत्तों की उपज के लिये अप्रैल – मई माह में इसकी बिजाई कर सकते हैं।
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सिंचित फसल में 15-20 किग्रा/हे तथा असिंचित फसल में 25-30 किग्रा/हे बीज की आवश्यकता होती है।
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भूमि एवं बीज जनित रोगों से बचाव के लिए बीज को करमानोवा (कार्बेंन्डाजिम + मेंकोजेब) 2.5 ग्रा./कि.ग्रा. से उपचारित करें। धनिया की अच्छी पैदावार लेने के लिए गोबर खाद 20 टन/हे का भुरकाव करें। सिंचित फसल 60 किग्रा नत्रजन, 40 किग्रा फॉस्फोरस, 20 किग्रा पोटाश तथा 20 किग्रा सल्फर प्रति हेक्टेयर की दर से उर्वरक का उपयोग करें।
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राजस्थान सरकार की तारबंदी योजना अब छोटे किसानों के लिए भी
राजस्थान सरकार ने किसानों की फसलों को नीलगाय, जंगली सूअर और अन्य आवारा पशुओं से बचाने के लिए ‘तारबंदी योजना’ की शुरुआत की है। इस योजना के तहत किसानों को 50-70% तक की सब्सिडी दी जाती है ताकि वे अपनी कृषि भूमि की चारदीवारी या तारबंदी कर सकें। पहले इस योजना का लाभ सिर्फ उन किसानों को मिलता था जिनके पास कम से कम 1.5 हेक्टेयर जमीन होती थी, लेकिन अब नए दिशा-निर्देशों के अनुसार 2 बीघा (0.5 हेक्टेयर) जमीन वाले किसान भी इस योजना के लिए पात्र होंगे। इससे छोटे किसानों को भी अपनी फसल की सुरक्षा और बेहतर उत्पादन में मदद मिलेगी।
कैसे मिलेगा लाभ और कौन कर सकता है आवेदन?
तारबंदी योजना का लाभ लेने के लिए किसान ‘राज किसान साथी’ पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए आधार कार्ड, जन आधार, भूमि के स्वामित्व प्रमाणपत्र और बैंक विवरण जैसे दस्तावेज़ जरूरी होंगे। लघु और सीमांत किसानों को 60% तक (अधिकतम ₹48,000) और सामान्य किसानों को 50% तक (अधिकतम ₹40,000) की सब्सिडी मिलेगी। सामुदायिक आवेदन करने वाले किसानों के समूह को 70% तक की सब्सिडी दी जाएगी। यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने, उनकी आय बढ़ाने और कृषि कार्यों को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
स्रोत: कृषि जागरण
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मध्य प्रदेश की प्रमुख मंडियों में गेहूँ भाव में दिखी कितनी तेजी
मध्य प्रदेश के अलग अलग मंडियों में क्या चल रहे हैं गेहूँ के भाव? आइये देखते हैं पूरी सूची।
| मध्य प्रदेश की मंडियों में गेहूँ के ताजा मंडी भाव | ||||
| जिला | कृषि उपज मंडी | किस्म | न्यूनतम मूल्य (प्रति क्विंटल) | अधिकतम मूल्य (प्रति क्विंटल) |
| शाजापुर | आगर | गेहूँ | 2451 | 2538 |
| अशोकनगर | अशोकनगर | गेहूँ | 2400 | 2750 |
| छतरपुर | बड़ामलहेड़ा | मिल गुणवत्ता | 2350 | 2435 |
| उज्जैन | बड़नगर | मालवा शक्ति | 2400 | 2410 |
| धार | बदनावर | गेहूँ | 2450 | 2450 |
| शिवपुरी | बराड़ | गेहूँ | 2265 | 2265 |
| रायसेन | बेगमगंज | गेहूँ | 2430 | 2500 |
| बेतुल | बेतुल | मिल गुणवत्ता | 2420 | 2445 |
| सागर | बीना | गेहूँ | 2475 | 2475 |
| अशोकनगर | चंदेरी | गेहूँ | 2325 | 2380 |
| सिवनी | छपारा | मिल गुणवत्ता | 2450 | 2450 |
| मन्दसौर | दलौदा | गेहूँ | 2700 | 2700 |
| दतिया | दतिया | मिल गुणवत्ता | 2400 | 2405 |
| दतिया | दतिया | गेहूँ | 2392 | 2392 |
| सागर | देवरी | मिल गुणवत्ता | 2625 | 2625 |
| सागर | देवरी | गेहूँ | 2600 | 2605 |
| सागर | देवरी | गेहूँ-जैविक | 2600 | 2600 |
| देवास | देवास | गेहूँ | 2300 | 2350 |
| धार | धामनोद | गेहूँ | 2460 | 2460 |
| धार | धार | स्थानीय | 2600 | 2605 |
| धार | धार | लोकवन | 2600 | 2625 |
| धार | धार | मिल गुणवत्ता | 2380 | 2380 |
| धार | धार | गेहूँ | 2430 | 2430 |
| नरसिंहपुर | गाडरवाड़ा | मिल गुणवत्ता | 2399 | 2400 |
| सागर | गढ़ाकोटा | गेहूँ | 2400 | 2425 |
| इंदौर | गौतमपुरा | गेहूँ | 2460 | 2540 |
| भिंड | गोहाद | गेहूँ | 2300 | 2300 |
| गुना | गुना | गेहूँ | 2595 | 3910 |
| हरदा | हरदा | मिल गुणवत्ता | 2510 | 2510 |
| खंडवा | हरसूद | गेहूँ | 2425 | 2460 |
| इंदौर | इंदौर | मालवा शक्ति | 2490 | 2560 |
| इंदौर | इंदौर | मिल गुणवत्ता | 2401 | 2925 |
| इंदौर | इंदौर | गेहूँ | 2466 | 2525 |
| जबलपुर | जबलपुर | गेहूँ | 2425 | 2428 |
| राजगढ़ | जीरापुर | मिल गुणवत्ता | 2330 | 2330 |
| राजगढ़ | जीरापुर | गेहूँ | 2325 | 2330 |
| झाबुआ | झाबुआ | गेहूँ | 2511 | 2511 |
| आलीराजपुर | जोबट | गेहूँ | 2425 | 2430 |
| शिवपुरी | करेरा | मिल गुणवत्ता | 2311 | 2400 |
| शिवपुरी | करेरा | अन्य | 2330 | 2340 |
| कटनी | कटनी | मिल गुणवत्ता | 2405 | 2405 |
| खंडवा | खंडवा | गेहूँ | 2451 | 2462 |
| टीकमगढ़ | खरगापुर | मिल गुणवत्ता | 2426 | 2427 |
| खरगोन | खरगोन | गेहूँ | 2525 | 2550 |
| राजगढ़ | खुजनेर | मिल गुणवत्ता | 2336 | 2336 |
| धार | कुक्षी | लोकवन | 2505 | 2505 |
| धार | कुक्षी | गेहूँ | 2400 | 2511 |
| गुना | कुंभराज | गेहूँ | 2215 | 2215 |
| ग्वालियर | लश्कर | गेहूँ-जैविक | 2300 | 2300 |
| मन्दसौर | मन्दसौर | गेहूँ | 2500 | 2500 |
| भिंड | मेहगांव | गेहूँ | 2355 | 2355 |
| खंडवा | मुंडी | गेहूँ | 2400 | 2400 |
| मंडला | नैनपुर | गेहूँ | 2425 | 2425 |
| राजगढ़ | नरसिंहगढ़ | मिल गुणवत्ता | 2400 | 2400 |
| राजगढ़ | नरसिंहगढ़ | गेहूँ | 2325 | 2325 |
| नरसिंहपुर | नरसिंहपुर | मिल गुणवत्ता | 2350 | 2400 |
| नरसिंहपुर | नरसिंहपुर | मिल गुणवत्ता | 2395 | 2420 |
| सीहोर | नसरुल्लागंज | गेहूँ | 2501 | 2538 |
| छतरपुर | नौगांव | गेहूँ | 2425 | 2435 |
| टीकमगढ़ | निवाड़ी | मिल गुणवत्ता | 2320 | 2395 |
| राजगढ़ | पचौर | गेहूँ | 1537 | 2400 |
| सिवनी | पलारी | गेहूं का मिश्रण | 2409 | 2409 |
| पन्ना | पन्ना | मिल गुणवत्ता | 2500 | 2500 |
| झाबुआ | पेटलावद | लोकवन | 2450 | 2460 |
| झाबुआ | पेटलावद | गेहूँ | 2305 | 2325 |
| शिवपुरी | पिछौर | मिल गुणवत्ता | 2200 | 2300 |
| मन्दसौर | पिपल्या | गेहूँ | 2358 | 2358 |
| शिवपुरी | पोहरी | गेहूँ | 2325 | 2325 |
| रतलाम | रतलाम | गेहूँ | 2400 | 3051 |
| रतलाम | रतलाम | गेहूँ-जैविक | 2950 | 3011 |
| सीहोर | रेहटी | गेहूँ | 2450 | 2450 |
| सागर | रहली | गेहूँ | 2389 | 2402 |
| रतलाम | सैलाना | लोकवन | 2400 | 2500 |
| खरगोन | सनावद | गेहूँ | 2380 | 5650 |
| इंदौर | सांवेर | गेहूँ | 2250 | 2551 |
| सतना | सतना | गेहूँ | 2346 | 2346 |
| जबलपुर | सीहोरा | मिल गुणवत्ता | 2586 | 2586 |
| बड़वानी | सेंधवा | गेहूँ | 2530 | 2600 |
| सिवनी | सिवनी | मिल गुणवत्ता | 2348 | 2350 |
| सिवनी | सिवनी | गेहूँ | 2470 | 2470 |
| सागर | शाहगढ़ | मिल गुणवत्ता | 2350 | 2350 |
| सागर | शाहगढ़ | मिल गुणवत्ता | 2325 | 2350 |
| मन्दसौर | शामगढ़ | गेहूँ | 2307 | 2307 |
| श्योपुर | श्योपुरबडोद | गेहूँ | 2370 | 2370 |
| श्योपुर | श्योपुरकलां | गेहूँ | 2340 | 2480 |
| शिवपुरी | शिवपुरी | मिल गुणवत्ता | 2350 | 2350 |
| देवास | सोनकच | गेहूँ | 2310 | 2450 |
| शाजापुर | सोयतकलां | गेहूँ | 2325 | 2325 |
| शाजापुर | सुसनेर | गेहूँ | 2280 | 2360 |
| उज्जैन | तराना | गेहूँ | 2289 | 2388 |
| झाबुआ | थांदला | मिल गुणवत्ता | 2500 | 2500 |
| उज्जैन | उज्जैन | गेहूँ | 2400 | 2425 |
| श्योपुर | विजयपुर | गेहूँ | 2310 | 2310 |
स्रोत: एगमार्कनेट
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कद्दूवर्गीय सब्जियों की फसल के प्रमुख कीट एवं नियंत्रण के उपाय
लालभृंग: यह चमकीले लाल रंग का कीट है जो पत्तियों को विशेषकर शुरूआती अवस्था में खा कर छलनी जैसा बना देता है। ग्रसित पत्तियाँ फट जाती हैं तथा पौधों की बढ़वार रूक जाती हैं।
नियंत्रण: रासायनिक नियंत्रण के लिए मारक्विट (बायफैनथ्रिन 10% EC) 2 मिली + सिलिकोमैक्स गोल्ड 0.5 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। जैविक नियंत्रण के लिए बवेरिया वेसियाना 2 ग्राम/लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
लीफ माइनर: इस कीट की इल्ली पत्तियों के अंदर सुरंग बना कर हरितलवक को खाती हैं। इसके प्रभाव से पत्तियों पर सफ़ेद धारियां बन जाती हैं। यह मुख्य रूप से टमाटर, गिलकी, ककड़ी एवं समस्त कद्दू वर्गीय फसलों को नुकसान पहुँचाती है।
नियंत्रण: इसके नियंत्रण के लिए नीमगोल्ड (एजाडिरेक्टिन 0.3%) 3000 पीपीएम 150 मिली, या बेनेविया (सायट्रानिलिप्रोएल 10.26% ओडी ) 20-25 मिली + सिलिकोमैक्स गोल्ड 5 मिली प्रति 15 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।
फलमक्खी: इस कीट के मैगट छोटे फलों को अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। इसकी इल्ली फल को अंदर से नुकसान पहुंचती है। इससे फल पकने से पहले ही गिर जाते हैं। इल्ली का आक्रमण होने से फलों में से भूरे रंग का चिपचिपा द्रव बहता है और फल का आकार बिगड़ जाता है। फल मक्खी अंडे देने के लिए फलों में छेद करती हैं। जिससे फलों में छेद नजर आने लगते हैं। प्रभावित फलों का आकार टेढ़ा हो जाता है। कीट का प्रकोप बढ़ने पर फल सड़ने लगते हैं।
नियंत्रण: इसके मैगट पर सीधा नियंत्रण संभव नहीं है परंतु वयस्क नर मक्खियों की संख्या पर नियंत्रण करके इनके प्रकोप को कम किया जा सकता है। खेत में पौधों की रोपाई से पहले खेत की गहरी जुताई करें। इससे मिट्टी में पहले से मौजूद प्यूपा नष्ट हो जाएंगे। कीट को आकर्षित करने के लिए प्रति एकड़ खेत में 10 से 12 फेरोमोन ट्रैप लगाएं और इसके ल्यूर को 15 -20 दिन के अंतराल से बदलें। ल्यूर से नर कीट आकर्षित हो कर फंस जाते हैं। इससे फल मक्खियों की वृद्धि को नियंत्रित किया जा सकता है। प्रभावित फलों को तोड़ कर नष्ट कर दें। साथ ही रासायनिक नियंत्रण के लिए डेसिस (डेल्टामैथ्रिन 100 EC) 1 मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें या सेलक्विन (क्विनलफॉस 25% EC) 2 मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।
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